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नोएडा टेंडर घोटाला: सीबीआई की चार्जशीट का क्यों नहीं हो रहा है असर?

सीबीआई नोएडा टेंडर घोटाले में अब तक दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Jul 17, 2017 08:11 PM IST

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नोएडा टेंडर घोटाला: सीबीआई की चार्जशीट का क्यों नहीं हो रहा है असर?

नोएडा अथॉरिटी टेंडर घोटाले में सीबीआई एक और सप्लिमेंटरी चार्जशीट दाखिल करने जा रही है. सीबीआई नोएडा टेंडर घोटाले में अब तक दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.

सीबीआई ने इसी साल 31 मई 2017 को यादव सिंह सहित नोएडा अथॉरिटी के 14 और अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया था. इन लोगों पर षड्यंत्र, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप दाखिल किए गए थे.

पिछले साल फरवरी में यादव सिंह को गिरफ्तार किया गया था. यादव सिंह नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चीफ इंजीनियर पद पर कार्यरत थे. सीबीआई को यादव सिंह की गिरफ्तारी में लगभग एक साल का वक्त लग गया था.

सीबीआई की पूछताछ के दौरान मिली जानकारी

पिछले कुछ दिनों से सीबीआई के अधिकारी नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं. पूछताछ के दौरान सीबीआई को कुछ चौंकाने वाली जानकारी हासिल हुई है.

सीबीआई की टीम ने जानकारी के आधार पर काफी सबूत इकट्ठे किए हैं. जिसके बाद सीबीआई ने नई चार्जशीट दाखिल करने का फैसला लिया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले दिनों नोएडा टेंडर आवंटन घोटाले के एक सहआरोपी और पूर्व अथॉरिटी के पूर्व अधिकारी विमल कुमार मंगलम की याचिका पर सीबीआई से दो हफ्ते में जवाब मांगा था.

याचिकाकर्ता के तरफ से दर्ज मुकदमे को रद्द करने की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2011 से 23 दिसंबर 2011 तक दिए गए टेंडरों की ही जांच का आदेश दिया है, लेकिन सीबीआई ने बाद के टेंडरों को लेकर भी आरोप पत्र दाखिल किया है.

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नोएडा अथॉरिटी के चीफ इंजीनियर यादव सिंह

यादव सहित 9 आरोपी डासना जेल में बंद हैं

नोएडा अथॉरिटी के हजारों करोड़ रुपए के घोटाला मामले में मुख्य आरोपी यादव सिंह की जमानत याचिका को पिछले दिनों इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने खारिज कर दी थी.

यादव सिंह सहित नोएडा अथॉरिटी के 9 आरोपी अधिकारी बहुचर्चित टेंडर घोटाले में डासना जेल में बंद हैं. यादव सिंह पर आरोप है कि उसने नोएडा प्राधिकरण में चीफ इंजीनियर रहते हुए कई सौ करोड़ रुपए घूस लेकर ठेकेदारों को टेंडर बांटे.

यही नहीं नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस अथॉरिटी में इंजीनियर रहते हुए यादव सिंह की सभी तरह के टेंडर और पैसों के आवंटन में बड़ी भूमिका होती थी. सीबीआई ने यादव सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 466, 467, 469, 481 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है.

यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और कानून के उल्लंघन के संबंध में केस दर्ज किया गया है.

नोएडा में टेंडर घोटले को लेकर अबतक नोएडा, ग्रेटर नोएडा के 80 बिल्डरों से पूछताछ की जा चुकी है. पिछले साल ही ईडी की टीम कोर्ट में सुनवाई के बाद यादव सिंह को मुंह छुपाकर बाहर ले जा रही थी. इसी दौरान यादव सिंह के साथ ईडी की टीम पर वकीलों ने हमला बोल दिया था.

ऐसे में यादव सिंह को बचाने के चक्कर में ईडी के अधिकारियों को भी पिटाई झेलनी पड़ी थी. इसके बाद ईडी के अधिकारी यादव सिंह को वहां से एम्बुलेंस से ले कर भागे थे.

यादव सिंह के खिलाफ अवैध संपत्ति के मामले भी हैं

8 अक्टूबर 2015 को ईडी ने लखनऊ की विशेष कोर्ट में यादव सिंह के खिलाफ मनी लॉन्ड्र‍िंग का केस दर्ज कराया था. नोएडा, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के ठेकों में भ्रष्टाचार के साथ-साथ यादव सिंह पर कई सौ करोड़ रुपए की अवैध नामी-बेनामी संपत्ति बनाने का आरोप है.

आयकर विभाग की छापेमारी में तीन साल पहले यादव सिंह के पास अकूट संपत्ति का पता चला था. इस छापेमारी में दो किलो सोना, लगभग 100 करोड़ के हीरे, 10 करोड़ कैश के साथ कई दस्तावेज मिले थे.

सलाना 12 लाख रुपए सैलेरी पाने वाला यादव सिंह और उसका परिवार कुछ ही सालों में 900 करोड़ रुपए का मालिक बन बैठा. सीबीआई के मुताबिक यादव सिंह लगभग 60 कंपनियों का मालिक है.

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