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सीबीआई ने सेना में ट्रांसफर रैकेट का किया खुलासा, अफसर समेत दो गिरफ्तार

सीबीआई ने कहा कि गिरफ्तार आरोपी घूस लेकर अफसरों की तैनाती में फेरबदल करने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते थे

Bhasha | Published On: Jun 03, 2017 10:12 PM IST | Updated On: Jun 03, 2017 10:12 PM IST

सीबीआई ने सेना में ट्रांसफर रैकेट का किया खुलासा, अफसर समेत दो गिरफ्तार

सीबीआई ने कहा कि उसने एक लेफ्टिनेंट कर्नल और एक बिचौलिए की गिरफ्तारी के साथ ही थलसेना मुख्यालय में एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है.

जांच एजेंसी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल और बिचौलिए पर आरोप है कि वे घूस लेकर अफसरों की तैनाती में फेरबदल करने के लिए अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते थे.

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि सेना के कार्मिक डिवीजन में तैनात लेफ्टिनेंट रंगनाथन सुब्रमणि मोनी और बिचौलिए गौरव कोहली को उस समय गिरफ्तार किया गया जब बेंगलुरु में रह रहे एक सैन्य अधिकारी के तबादले के लिए दो लाख रुपए की कथित रिश्वत दी जा रही थी.

कई जगह हुई छापेमारी

सीबीआई प्रवक्ता आर. के. गौड़ ने बताया, ‘नयी दिल्ली, हैदराबाद, बेंगलुरु और तिरूवनंतपुरम में गिरफ्तार आरोपियों और अन्य के आवास सहित अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई जिसमें करीब 10 लाख रुपए नगद और कुछ अहम दस्तावेज एवं सामान बरामद किए गए.’

शुक्रवार देर रात तक चली छापेमारी आरोपियों के ठिकानों के साथ-साथ मुख्यालय की कार्मिक शाखा में तैनात एक ब्रिगेडियर के ठिकाने पर भी की गई.

जांच एजेंसी ने मोनी, हैदराबाद में तैनात सैन्य अधिकारी पुरूषोत्तम, बेंगलुरु में तैनात बैरक और भंडार अधिकारी एस. सुभाष और कथित बिचौलिए गौरव कोहली के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

उप महानिदेशक (कार्मिक) ब्रिगेडियर एस. के. ग्रोवर को प्राथमिकी में नामजद किया गया है, लेकिन वह आरोपियों की सूची में शामिल नहीं हैं.

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने छापेमारी के दौरान ग्रोवर के फोन और लैपटॉप जब्त किए.

मोनी, कोहली और कुछ अन्य वरिष्ठ अधिकारी तबादले-तैनाती के एक रैकेट में कथित तौर पर शामिल रहे हैं, जिसमें बड़ी रिश्वत की एवज में पसंद की तैनाती सुनिश्चित की जाती थी. एक-एक मामले में कई-कई लाख रूपए रिश्वत के तौर पर लिए जाते थे.

सीबीआई सूत्रों ने बताया कि यह ‘खुलासा’ थलसेना में खलबली मचा देगा. इस रैकेट में कुछ और वरिष्ठ अधिकारियों के शामिल होने का संदेह है.

हवाला के जरिए होता था लेन-देन

प्राथमिकी में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि हवाला चैनलों के जरिए रिश्वत का भुगतान किया जा रहा था.

इसमें यह भी कहा गया कि मोनी ने कोहली और आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में इंजीनियर भंडार विभाग में तैनात सैन्य अधिकारी पुरूषोत्तम के साथ आपराधिक साजिश की ताकि विभिन्न अधिकारियों के तबादले को प्रभावित किया जा सके.

पुरूषोत्तम कथित तौर पर ऐसे अधिकारियों से संपर्क करता था जो मनपसंद तैनाती चाहते थे. वह कोहली से संपर्क किया करता था जिसके ताल्लुकात थलसेना मुख्यालय की कार्मिक शाखा के वरिष्ठ अधिकारियों से थे. कोहली ने बड़ी रिश्वत की एवज में सैन्य अधिकारियों के तबादले के लिए अपने इन संपर्कों का इस्तेमाल किया.

इसमें दावा किया गया है कि पुरषोत्तम ने कोहली से कथित अनुरोध किया कि वह रिश्वत के बदले में डी एस आर के रेड्डी और सुभाष का तबादला कराए. दोनों बेंगलुरु से सिंकदराबाद या विशाखापत्तनम् में तैनाती चाहते थे.

इसमें आरोप लगाया गया है कि मोनी ने भरोसा दिलाया कि वह धन के बदले सैन्य मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों के जरिए सुभाष के स्थानांतरण में मदद करेंगे.

सुभाष ने कोहली को हवाला माध्यम से रिश्वत के तौर पर पांच लाख रुपए कथित रूप से दिए.

सीबीआई की प्राथमिकी में कहा गया है, ‘कोहली मोनी के आवास पर गया और उसने दिल्ली में सैन्य मुख्यालयों में कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. सूचना में भी खुलासा किया गया कि मोनी सुभाष के तबादले के मामले के लिए सैन्य मुख्यालय के डीडीजी (कार्मिक) बिग्रेडियर एस के ग्रोवर के संपर्क में थे.’

ऐसा आरोप है कि सुभाष के तबादले के लिए कोहली मोनी को दो लाख रुपए देने वाले थे.

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