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व्यंग्य: ...पी गया चूहा सारी व्हिस्की

करप्शन पर लीपापोती की एक नई दिलचस्प कहानी बिहार से आई है.

Rakesh Kayasth | Published On: May 06, 2017 03:35 PM IST | Updated On: May 06, 2017 03:35 PM IST

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व्यंग्य: ...पी गया चूहा सारी व्हिस्की

वाकई ये समय बहुत दिलचस्प है. किस्से, कहानी, मुहावरों और चुटकुलों में कही गई बातें पूरी तरह सच साबित हो रही हैं. गीतकार अनजान ने तीन दशक पहले अमिताभ बच्चन की फिल्म शराबी के लिए एक गाना लिखा था. जरा उसकी चार लाइनों पर गौर फरमाएं-

पी गया चूहा सारी व्हिस्की कड़क के बोला कहां है बिल्ली दुम दबाके बिल्ली भागी चूहे की फूटी किस्मत जागी

अनजान ने प्रतीकों के सहारे ये कहा था कि शराब पीने के बाद चूहे जैसा मरियल शौहर भी बीवी के सामने शेर हो जाता है. गाना लिखते तक उन्होने भला ये कहां सोचा होगा कि चूहे उनकी बात को सीरियसली ले लेंगे. चूहे अब सिर्फ व्हिस्की ही नहीं वोदका, जिन और रम भी पी रहे हैं और वो भी एक ऐसे राज्य में जहां इंसानों को मय की एक बूंद भी मयस्सर नहीं.

बेवड़े हुए बिहार के चूहे

बिहार में आजकल पीना और पिलाना दोनों हराम है. शराब कारोबार करने वालों के साथ शराबियों पर भी सरकार की टेढ़ी नजर है. जगह-जगह छापा मारा जा रहा है. राज्य के कई इलाकों से बरामद की गई लगभग नौ लाख लीटर शराब सरकारी मालखानों में रखी गई थी. अचानक शराब की पूरी खेप गायब हो गई. छानबीन शुरू हुई तो शराब की रखवाली करने वालों ने सनसनीखेज जानकारी दी- पूरी शराब चूहे पी गए.

ना पानी, ना सोडा, एकदम नीट और वो भी बिना चखना. वाह रे बिहारी चूहे. मूषक वंश की आनेवाली पीढ़ियां तुम पर गर्व करेंगी. बिहार की मदिरा प्रेमी जनता, अपनी दिलेरी और दुस्साहस के बावजूद जो नहीं कर पा रही है, वो चूहों ने कर दिखाया. ज़रा सोचिये उन चूहों के बारे में जिन्होने 9 लाख लीटर शराब गटकी होगी. क्या वे पीने के बाद मतवाले हुए होंगे? क्या उन्होने दारू पीकर दंगा किया? अगर नहीं तो फिर इसका मतलब ये है कि नशा सिर्फ इंसानों के सिर चढ़कर बोलता है. आनंद बख्शी ने ठीक ही लिखा है- नशा शराब में होता तो नाचती बोतल.

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क्या चूहों के लिए रीहैबिलेटेशन सेंटर खोलेंगे नीतीश?

अब सवाल ये है कि बिहार की संवेदनशील सरकार उन चूहों का क्या करेगी जिन्हे शराब की लत लग चुकी है. ना जाने कितनों को फैटी लीवर या लिवर सिरोसिस हो चुका होगा. कायदे से देखा जाये तो नीतीश कुमार को उनके लिए रीहैबिलेटशन सेंटर खोलना चाहिए. नशा अगर बुराई है, तो सबके लिए है, प्राणीमात्र के आधार पर भेदभाव करना गलत होगा. लेकिन सरकार ने चूहों के लिए रीहैब खोलने का कोई संकेत नहीं दिया है. उल्टे बेवड़े चूहों की कहानी सुनकर सरकार के कई आला अफसर चकरा रहे हैं. मामले की जांच एक सीनियर आईपीएस अधिकारी को सौंपी जा चुकी है.

चूहा गुनहगार तो इंसान क्यों गिरफ्तार?

मामले की परतें खुलनी शुरू हुई तो अंदाज़ा होने लगा कि चूहों की शराबखोरी की कहानी अपराध पर लीपा-पोती की बाकी कहानियों की तरह मनगढ़ंत है. सरकार ने बिहार पुलिस मेंस एसोसिएशन के प्रेसिडेंट को गिरफ्तार किया है. इसके साथ एसोसिएशन के एक और सदस्य को भी अरेस्ट किया गया है. माना जा रहा है कि इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां मुमकिन है. इसके बाद ही 9 लाख लीटर शराब के गायब होने की पूरी कहानी सामने आ सकती है.

ये ठीक है कि मालगोदाम में रखी शराब की बोतलों को चूहे नुकसान पहुंचा सकते हैं. हो सकता है उन्होंने मिलकर पउवा या अध्धा गटक भी लिया हो. लेकिन 9 लाख लीटर शराब पी जाने की बात कपोल-कल्पना ही है. बहुत मुमकिन है कि छानबीन के बाद चूहे पूरी तरह बाइज्जत बरी हों और वो गर्व से कह सकें- मैने होंठों से लगाई तो हंगामा हो गया.

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तस्वीर पीटीआई

जब स्कूटर पर सवार हुई गाय-भैंसे

शुक्र है कि जानवरों के पास मानहानि का मुकदमा दर्ज करने का कोई अधिकार नहीं है, वर्ना ऐसे कई मुकदमे अब तक दर्ज हो चुके होते. बिहार के कुख्यात चारा घोटाले की परतें जब खुलनी शुरू हुई थीं, तब ये पता चला कि कारस्तानी इंसानों की थी और बदनाम गाय-भैंसे हुई. दरअसल पशुओं के ट्रांसपोर्टेशन के लिए जो बिल ट्रेजरी में जमा कराये गए थे, उनकी छानबीन से पता चला था कि ज्यादातर नंबर स्कूटर और मोटरसाइकिल के हैं. यानी सप्लायर अपनी गौ-माता और भैंस मौसी को स्कूटर पर बिठाकर एक जगह से दूसरी जगह ले गए थे.

जानवरों का चारा खाने, सड़क बनाने के लिए मंगाई की तारकोल पीने और अपाहिजों की बैसाखी चुराने तक इस देश में कई महान कारनामे हो चुके हैं. इन तमाम घोटालों को छिपाने के लिए असंख्य कहानियां गढ़ी गई हैं.

मुर्दों का एलान- हम जिंदा हैं

चारा घोटाले में फंसे एक वेटनरी डॉक्टर की जब अदालत में पेशी हुई और उनसे पूछा गया कि उनके पास बोरियों में भरे नोट कहां से आये. जवाब में डॉक्टर साहब ने फरमाया—मेरी पत्नी बार डांसर हैं, ये पैसे उन्हीं की कमाई के हैं. ये अलग बात है कि डॉक्टर साहब की पत्नी एक इज़्जदार महिला थीं और शौकिया तौर पर स्कूल टीचर की नौकरी करती थीं.

ऐसी कई और कहानियां चारा घोटाले की सुनवाई के दौरान आई थीं. बात सिर्फ एक राज्य या एक घोटाले की नहीं है. इस देश में ऐसी अनगिनत कहानियां बिखरी पड़ी हैं. व्यापम जैसे घोटाले के बाद रहस्मय परिस्थितियों में 50 से ज्यादा लोग मर गए और मध्यप्रदेश सरकार ने उसे प्राकृतिक मौत माना. आसाराम बापू के आध्यात्मिक तेज का प्रभाव ये है कि जो भी उनके खिलाफ गवाही देता है, कहीं से उड़ती हुई गोली आकर उसे लग जाती है.

ये वही देश है, जहां प्रॉपर्टी हड़पने के लिए रिश्तेदारों द्वारा कागज पर मार दिये गए सैकड़ों लोगों को रैली निकालकर इस बात का एलान करना पड़ता है- हम अभी जिंदा हैं.

(लेखक जाने-माने व्यंग्यकार हैं)

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