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बिहारः ठीक नहीं लग रहे हैं इंटरमीडिएट टाॅपर के सुर-ताल

इंटर की परीक्षा में आर्ट्स में टॉप करने वाले गणेश कुमार पर सवाल खड़े

Manish Shandilya | Published On: Jun 02, 2017 01:38 PM IST | Updated On: Jun 02, 2017 06:19 PM IST

बिहारः ठीक नहीं लग रहे हैं इंटरमीडिएट टाॅपर के सुर-ताल

बिहार बोर्ड नतीजों के बाद फिर टॉपर निशाने पर हैं. इस बार इंटरमीडिएट में आर्ट्स में टॉप करने वाले गणेश कुमार पर सवाल खड़े हुए हैं. पिछले साल साइंस और आर्ट्स के टॉपर्स के रिजल्ट पर सवाल थे.

इंटर परीक्षा के कला संकाय में टॉप करने वाले गणेश कुमार को 500 में 413 नंबर मिले हैं. रिजल्ट जारी होने के बाद दो दिनों तक वो मीडिया की पहुंच से दूर रहे जिसके बाद उनकी योग्यता पर सवाल उठाए जाने लगे. गणेश गुरूवार को मीडिया के सामने आए और अपनी ‘योग्यता का परिचय’ दिया. गणेश की योग्यता पर सवाल उठाए जाने की एक बड़ी वजह उनका संगीत विषय में 83 अंक लाना है. इस विषय की प्रैक्टिकल परीक्षा में उन्हें 70 में 65 अंक मिले हैं लेकिन गुरुवार को जब उन्होंने अलग-अलग न्यूज चैनलों के सामने सुर साधा तो वे उतने सुरीले नहीं दिखे जितने अंक उन्हें मिले हैं.

सामान्य से बहुत अधिक उम्र के हैं टाॅपर

गणेश की एक और ‘खसियत’ भी सामने आई है. उन्होंने एमए पास करने के 24 साल की उम्र में इंटर की परीक्षा दी और टॉपर बने. अमूमन 18 साल के आस-पास के छात्र इंटर परीक्षा में शामिल होते हैं. गणेश के मुताबिक पारिवारिक हालात के कारण उन्हें मैट्रिक पास करने के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. इस टॉपर की ख्वाहिशें भी छोटी ही हैं. वे आईएएस, आईपीएस या कोई अफसर नहीं बनना चाहते केवल एक अदद सरकारी नौकरी की ख्वाहिश रखते हैं.

चिटफंड कंपनी चलाते थे गणेश?

इस बीच ये भी खबरें आईं कि गणेश 7 साल से झारखंड में एक चिटफंड कंपनी चलाते थे. हालांकि उनके परिवार ने इस बात से इनकार किया है. गणेश की बहन मुक्ता स्वर्णकार ने बताया कि 2009 में कैंसर से पिता के मौत के बाद उनके इकलौते भाई पर घर की जिम्मेदारी पड़ गई. इस कारण वे तब नियमित पढ़ाई नहीं कर पाए. पिता के मौत के बाद गणेश ने मजदूरी की, अखबार बेचे और घर पर छोटा सा दुकान चलाया. गणेश की बहन के मुताबिक इसके बाद वे काम की तलाश में झारखंड के गिरिडीह जिले के सरिया से समस्तीपुर पहुंचे. वहां उन्होंने सरकारी नौकरी की चाह में जरुरी पढ़ाई फिर शुरु की. और वहीं से मैट्रिक की परीक्षा पास की.

मंत्री ने गड़बड़ी की बात को किया खारिज

गणेश की योग्यता पर सवाल उठने के बाद बिहार के शिक्षा मंत्री अशोक चौधरी ने बिहार बोर्ड के अध्यक्ष के हवाले से दावा किया है कि गणेश ‘मेरिट वाले’ हैं. इसके उलट उन्होंने गणेश से सवाल करने पर पूछ डाला कि जिन लोगों ने प्रश्न किया वे क्या उस विषय (संगीत) के ज्ञानी हैं. बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने इस मामले पर प्रेस-कॉन्फ्रेंस कर गुरुवार को कहा, ‘टॉपर्स की जो सूची बोर्ड द्वारा जारी की गई है वह पूरी तरह से सही है. सूची में कोई गड़बड़ी या अनियमितता होने का प्रश्न ही नहीं उत्पन्न होता है.’

टॉपर का स्कूल भी सवालों के घेरे में

गणेश समस्तीपुर जिले के चकहबीब के जिस रामनंदन सिंह जगदीप नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र हैं वह विद्यालय पूरी तरह साधनों से लैस नहीं है. स्कूल में पर्याप्त म्यूजि़क का सामान तो क्या खिड़की-दरवाजे तक सही से नहीं लगे हैं. स्कूल की फर्श पूरी तरह तैयार नहीं है और न ही दीवारों पर प्लास्टर है. ऐसे स्कूल से स्टेट टॉपर निकलने की बात भी संदेह पैदा कर रही है. इस संबंध में बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने गुरुवार को इतना जरुर कहा कि स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच संबंधित जिला पदाधिकारी द्वारा टीम गठन कर की जाएगी. वहीं गणेश के स्कूल के दयनीय स्थिति पर शिक्षा मंत्री का कहना है कि स्कूल की दयनीय स्थिति से छात्र का मेरिट खत्म नहीं हो जाता.

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