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गर्भवती स्त्रियां मीट और सेक्स से आखिर क्यों परहेज करें ?

आयुष मंत्रालय की बुकलेट में गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ ऐसी सलाह दी गई है जिसका हकीकत से कोई लेना देना नहीं है

Manasi Nene Updated On: Jun 17, 2017 06:31 PM IST

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गर्भवती स्त्रियां मीट और सेक्स से आखिर क्यों परहेज करें ?

‘मांसाहार मत कीजिए, काम-वासना, क्रोध और लोभ से बचिए, बेडरूम में सुंदर-सुंदर तस्वीरें टांगिए.' अगर आप सोच रहे हैं कि हम यहां पॉपुलर गेम ‘कार्डस् अगेन्स्ट ह्युमेन्टी’ के कुछ मजेदार जवाबों की एक चुनिंदा फेहरिश्त बना रहे हैं तो फिर आप सच्चाई से उतने दूर भी नहीं हैं.

जहां तक हमारा सवाल है, ये जवाब हमारी पसंदीदा फेहरिश्त में शामिल हो सकते हैं. लेकिन सिर्फ हमीं थोड़े हैं ऐसा सोचनेवाले! भारत सरकार भी कुछ ऐसा ही सोचती है कि इन नियमों के पालन से स्वस्थ और सुंदर शिशु का जन्म होता है.

कितनी सही है अायुष मंत्रालय की सलाह?

जी हां, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी (सीसीआरवायएन) से जारी पुस्तिका में ये नियम बताए गए हैं. सीसीआरवायएन आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आता है.

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इसकी शुरुआत 2014 में उपचार के परंपरागत तरीकों को बढ़ावा देने के लिए हुई. पुस्तिका में गर्भवती महिलाओं के लिए सुझावों की एक फेहरिश्त दी गई हैं जिसमें बेतुकी सीख ( जैसे कि बुरी साथ-संगत से बचें, मन में काम-भावना, क्रोध, लोभ-लालच ना लाएं) से लेकर एकदम जानी-समझी सिखावन (शांत रहिए) तक सबकुछ दर्ज है.

जानना चाहते हैं कि इनमें हमारी पहली पसंद कौन सी सीख है ? यह है काम-वासना पर नियंत्रण यानी यह सीख कि मन में सेक्स करने के ख्याल नहीं लाना है क्योंकि वही तो गर्भ ठहरने की असली वजह है!

अजीबोगरीब सोच की वजह?

क्या सरकार मानकर चल रही है कि ‘सेक्स’ किए बगैर ही गर्भ ठहर जाता है? इस सवाल का जो उत्तर आपको सूझे कुछ वही जवाब हमारा भी होना है लेकिन गर्भवास्था में ‘क्या करना है और क्या नहीं करना है’ के बेतुके नियम बनाने का मामला सिर्फ भारत सरकार तक सीमित नहीं है.

पिछले महीने कोलकाता में आरोग्य भारती (आरएसएस की चिकित्सा-शाखा) ने एक कार्यशाला का आयोजन किया था. कार्यशाला का दावा था कि उनके पास गोरे, लंबे और और ‘मनपसंद’ शिशु तैयार करने का एक नुस्खा है.

यह भी कहा गया कि जर्मनी ने दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अपने देश को धनी बनाने के लिए आयुर्वेद के इस नुस्खे का इस्तेमाल किया. इस हास्यास्पद पद्धति के अंतर्गत आपको तीन महीने की शुद्धीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होता है (यानी सेक्स उन्हीं घड़ियों में करना होता है जब आसमान में ग्रह-नक्षत्रों का शुभ संयोग हो रहा हो), गर्भाधान के पूरे होने तक सेक्स नहीं करना होता है तथा अंडाणु और वीर्य के शुद्धीकरण के लिए आर्युवेद के मुताबिक परहेजी भोजन करना होता है.

स्त्री देह की निगरानी क्यों?

गर्भावस्था के दिनों की देखभाल के नाम पर सरकार बार-बार वही कर रही है जो सबसे आसान है और यह काम है कि स्त्री की देह को निगरानी के नियमों से बांध दो.

इतना ही नहीं, नैतिकता और सेक्सुअलिटी के इस घालमेल से जी नहीं भरा तो गर्भवती स्त्रियों को यह भी सीख दी जाने लगी कि काम-वासना पर नियंत्रण रखो जबकि दूसरी तरफ विवाह-संबंध के भीतर बलात्कार अब भी वैधानिक बना हुआ है.

जाहिर है, हमलोगों को साफ-साफ शब्दों में बताया जा रहा है कि: अगर मर्द सेक्स करना चाहे तो ठीक है लेकिन औरत करना चाहे तो गलत है. क्या यही संदेश नहीं सुनाया जा रहा ? इसमें गर्भ का ठहरना तो एक संयोग मात्र है.

देबस्मिता दिल्ली में रहती हैं, वो लेखिका और दो बच्चों की मां हैं. सरकार के नये सुझावों की व्याख्या करते हुए झुंझलाहट में उन्होंने एक ऐसी बात कही कि हंसी छूट जाये. उन्होंने कहा कि मर्दों को बहाना दिया गया है कि पत्नी गर्भवती है तो वे अपने अफेयर का चक्कर कहीं और चलाएं.

ये सवाल है अहम?

आइए, वह सवाल पूछें जो सेहत के दुश्मन या कह लें सीधे-सादे दुश्मन पूछना ही नहीं चाहते. क्या गर्भावस्था के दौरान औरतें सेक्स करना चाहती हैं? इसका जवाब है: यह किसी औरत पर निर्भर है!

कुछ महिलाएं इस सवाल का जवाब हां में देंगी जबकि बाकी महिलाएं अपनी दशा का बयान करते हुए कहेंगी कि गर्भ के कारण हमेशा उल्टी आते रहती है, थकान और बेचैनी बनी रहती है और सेक्स की तनिक भी इच्छा नहीं होती.

साल 2010 में प्रकाशित एक शोध-अध्ययन में कहा गया है कि गर्भावस्था के दिनों के बढ़ने के साथ, बहुत संभव है किसी महिला का सेक्स करना कम हो जाए और ऐसा होने की बहुत सी वजहें हो सकती हैं (जिसमें यह भी शामिल है कि महिला का साथी उस अवस्था में सेक्स करने से घबराए) लेकिन इसका कत्तई मतलब नहीं कि गर्भवती स्त्री को सेक्स में आनंद नहीं मिलता.

अध्ययन में शामिल आधे से ज्यादा औरतों ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान उनकी सेक्स संबंधी संतुष्टी में कोई बदलाव नहीं हुआ.

इंतजार और सही

हालांकि हमें अभी इंतजार करना होगा कि विज्ञान गर्भावस्था के दौरान स्थापित किए जाने वाले यौन-कर्म और उसके आनंद के बारे में विस्तारपूर्वक बताए.

फिर भी यहां-वहां की सुनी-सुनाई बातों के (हाल ही में गर्भवती हुई किसी स्त्री से भेंट हो तो पूछिए या फिर आसपास कोई गर्भवती महिला हो तो उससे भी पूछा जा सकता है) आधार पर यह कहा जा सकता है कि गर्भ के दिनों में औरतों में सेक्स की इच्छा मौजूद होती है, बल्कि यह कहना ठीक होगा कि उनकी सेक्स की इच्छा ज्यादा बढ़ी-चढ़ी होती है.

बंगलुरु में एनालिटिक्स का काम करने वाली सुरूपा का कहना है, 'जब गर्भ ठहरा तो मेरी उम्र 34 साल की थी और तब किसी ने, हां सचमुच किसी ने भी मुझे नहीं बताया था कि तुम्हें हर वक्त सेक्स करने की तलब लगी रहेगी. उन दिनों मैं हमेशा अपने हसबैंड की तरफ यों देखती थी कि वो बस आये और आकर..... हमने गर्भ के थर्ड ट्रायमेस्टर (28वें हफ्ते) तक सेक्स किया और मेरे सारे बच्चे एकदम दुरुस्त हैं. हमदोनों भी बिल्कुल फिट हैं'

क्या गर्भावस्था के दौरान सेक्स करना ठीक है?

गर्भावस्था के दौरान सेक्स को लेकर क्या, कैसे और कब जैसे सवाल हमने एक्सपर्ट से पूछे. बंगलुरु के क्लाउड नाइन की यूरोगॉयनाक्लाजिस्ट डॉक्टर किरन अशोक का कहना है, 'गर्भावस्था के दौरान कुछ महिलाओं में सेक्स करने की इच्छा बढ़ जाती है और ऐसा है तो इसमें कुछ भी बुराई नहीं.'

डॉक्टर अशोक के मुताबिक ऑब्सटेट्रिशियन के बीच विलियम ऑब्सटेट्रिक्स को अब भी प्रजनन संबंधी जानकारियों के लिए बुनियादी गाइड-बुक की मान्यता हासिल है और इस किताब में कहीं नहीं लिखा कि गर्भावस्था के दौरान सेक्स नहीं करना चाहिए.

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बुधवार के दिन सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड नेचुरोपैथी के डा आचार्य ने भी स्पष्ट किया कि पुस्तिका में महिलाओं को सहवास से परहेज करने की सलाह नहीं दी गई है, ‘काम-वासना से बचें’ जैसी सलाह के झांसे में मत रहिए.

क्या है डॉक्टरों की राय?

डा. अशोक का कहना है कि गर्भावस्था के पहले दो ट्रायमेस्टर के दौरान सेक्स करने में कोई हर्जा नहीं है. चलिए यह बात सुनकर मन खुश हुआ?

अनुजा मुंबई में एचआर मैनेजर के पद पर हैं. उनके डाक्टर ने कहा कि जितना सेक्स करने का मन हो, अभी कर लो क्योंकि बच्चे के जन्म होने के बाद कुछ महीनों तक एकदम नहीं कर सकोगी.

डाक्टर यह भी कहते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद चार से छह हफ्ते तक सेक्स नहीं करना चाहिए ताकि देह को दुरुस्त होने का समय मिल सके.

चलिए मान लिया, लेकिन क्या गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से बेबी को कोई चोट पहुंचती है? सेक्स से, चाहे वह पेनिट्रेटिव सेक्स ही क्यों ना हो, गर्भपात नहीं हो जाता. गर्भस्थ शिशु गर्भाशय की मजबूत दीवारों के भीतर एमनियोटिक द्रव (तरल) में सुरक्षित होता है और यह जगह उस स्थान से बहुत दूर होता है जहां असल प्रेम-क्रीड़ा चल रही होती है, सो कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे पुरुष को लगे कि उसका कामांग खूब भरा-पूरा है!

गर्भ के दिन जैसे-जैसे बढ़ते हैं एक समय के बाद आपको लगने लगता है कि बेबी अब लगभग मनुष्य रुप में दिखने लगा होगा लेकिन इस अवस्था में भी यौन-क्रीड़ा करें तो शिशु को ऐसा लगेगा जैसे कोई उसे गर्भाशय में हिला-झुला रहा हो.

अब चाहे शिशु की होने वाली मां जितने ही ऑर्गेज्म (आनंदातिरेक) हासिल करे (और दुआ कीजिए कि उसे ज्यादा से ज्यादा आर्गेज्म महसूस हों) गर्भस्थ शिशु को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, उसके लिए इसके कोई मायने नहीं होते.

लेकिन फिर अपवाद की कोई स्थिति है या नहीं ?

गर्भावस्था के आखिर के महीनों में अगर पता चलता है कि गर्भवती स्त्री को प्लेसेंटा प्रीविया ( इसमें मां से शिशु को बांधे रखने वाली गर्भनाल सर्विक्स यानी योनि-मार्ग के भीतरी द्वार के सामने आ जाती है) है तो ऐसी अवस्था में पेनिट्रेटिव सेक्स-संबंध स्थापित करने से बचना चाहिए.

आईवीएफ (कृत्रिम गर्भाधान) के जरिए गर्भ धारण की उम्मीद कर रही महिलाओं को सलाह दी जाती है कि इस प्रक्रिया से गुजरने के बाद सेक्स या फिर हैस्तमैथुन (मेस्टरबेशन) से बचें.

जिन महिलाओं को पहले ट्रायमेस्टर के दौरान भारी रक्तस्राव हुआ हो उन्हें भी सलाह दी जाती है कि जबतक यह ना कंफर्म हो जाए कि गर्भ अब स्थिर हो चुका है तबतक अपने ऊपर काबू रखें. ऐसे मामले में भी जब डाक्टर को लगता है कि गर्भ को अब कोई खतरा नहीं है, वे सेक्स संबंध स्थापित करने की मंजूरी दे देते हैं.

वडोदरा के एक क्लीनिक की डा सुचित्रा नेने बताती हैं, 'कुछ मामलों में गर्भवती स्त्री के लिए सेक्स करना खतरनाक हो सकता है लेकिन बाकी स्थितियों में सेक्स करने में कोई हर्जा नहीं.'

'कुछ गंभीर स्थितियां होती हैं, जैसे गर्भनाल बहुत नीचे आ गया हो, बार-बार गर्भपात होता रहा हो, पेटुलस सर्विक्स (दबाव के कारण गर्भतंत्र में सूजन) की हालत हो या इंफेक्शन लग गया अथवा झिल्ली टूट चुकी हो तो हम महिला को सेक्स से परहेज करने की सलाह देते हैं.'

और, अब बात कुछ तौर-तरीके की !

दिल्ली के मेदांता हास्पिटल की डाक्टर नम्रता कछरा कहती हैं, 'पहले ट्रायमेस्टर के शुरुआती दिनों में भ्रूण अभी स्थापित ही हुआ रहता है, ऐसे में किसी धक्कामार काम से बचना चाहिए.' लेकिन दूसरे ट्रायमेस्टर में, अगर दोनों पार्टनर ठीक महसूस करते हैं तो कोई कारण नहीं कि सरकारी सुझाव को मानकर वे अपने यौन-जीवन को नियंत्रित करें.

गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने से कोई इंफेक्शन ना लग जाए, इससे बचने के लिए डॉक्टर अशोक कुछ एहतियाती उपाय भी करने की बात बताते हैं. कंडोम का इस्तेमाल सबसे आसान है और इसमें कोई ज्यादा ताम-झाम भी नहीं होता.

और इस सिलसिले की आखिरी बात यह कि गर्भवती महिला जानना चाहेगी कि उसे योनि-मार्ग का कोई संक्रमण लग जाये तो वह इससे कैसे निबटे? बहुत संभव है ऐसा उसके पुरुष सहयोगी की असावधानी के कारण हुआ हो. अगर सरकार को सचमुच हमारी की फिक्र है तो उसे कुछ समय और रकम खर्च करते हुए यह सिफारिश करनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा पुरुष कंडोम का इस्तेमाल करें, चाहे सेक्स में उनका साथी मर्द, औरत या गर्भवती स्त्री कोई भी हो. और हां, यह बात भी याद रहे कि मन कर रहा हो तो फिर बिना सेक्स किए नौ महीना रहना कुछ ज्यादा ही लंबा इंतजार कहलाएगा.

( लेखिका द लेडिज फिंगर (टीएलएफ) से जुड़ी हैं. यह महिला-केंद्रित एक अग्रणी ऑनलाइन मैगजीन है और इसमें राजनीति, संस्कृति, स्वास्थ्य, सेक्स, नौकरी तथा इन सबके बीच आने वाले तमाम मुद्दों पर नए नजरिए और रोचक तर्कशैली के लेख छपते हैं.)

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