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प्लीज! रहमान के संगीत को तमिल या हिंदी के बंधन में मत बांधिए

रहमान का पक्ष लेने वालों को भी समझना चाहिए कि वह इस मुद्दे को नॉर्थ-साउथ इंडिया के विभाजन से न जोड़ें

Pawas Kumar | Published On: Jul 14, 2017 07:40 PM IST | Updated On: Jul 14, 2017 07:40 PM IST

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प्लीज! रहमान के संगीत को तमिल या हिंदी के बंधन में मत बांधिए

एक बार किसी ने मुझसे पूछा कि तुम्हारा सबसे खास टैलेंट क्या है. मेरा जवाब था- मुझे दिल से का 'जिया जले, जान जले...' वाला गाना आता है, पूरा.

जिन्होंने ये गाना सुना होगा वे मेरा इशारा समझ गए होंगे. जिन्हें नहीं पता उनके लिए बता दूं कि गाने में हिंदी बोलों से पहले तमिल के कुछ शब्द हैं. रहमान के संगीत से सजे ये शब्द समझ में भले न आएं लेकिन सुनने में बहुत शानदार लगते हैं. एआर रहमान के हालिया कॉन्सर्ट से जुड़ी खबर सुनकर मुझे यही गाना याद आ गया.

एआर रहमान यानी मोजार्ट ऑफ मद्रास, भारत का सबसे बड़े संगीतकार, ऑस्कर विजेता और 'मां तुझे सलाम' गाने वाला कलाकार- खबर आई कि रहमान के वेंबली में हुए कॉन्सर्ट से कुछ लोग इसलिए नाराज होकर चले गए क्योंकि रहमान ने इस कॉन्सर्ट में कई तमिल गाने गाए थे. नाराज लोगों ने वही किया आजकल लोग करते हैं- सोशल मीडिया पर हंगामा. कुछ लोगों ने तो रिफंड की मांग कर दी. तर्क था कि आखिर वे रहमान का कॉन्सर्ट सुनने गए थे, तमिल गानों का नहीं. (ये बात दीगर है कि आयोजकों के मुताबिक कॉन्सर्ट में 65 फीसदी गाने हिंदी ही थे.)

जवाब में रहमान के समर्थन में भी जमकर ट्वीट-फेसबुक पोस्ट चले. रहमान का समर्थन करने वालों ने भी इस लड़ाई को भाषा से जोड़ा. किसी ने ट्वीट किया 'अब समझे जब हमपर हिंदी थोपी जाती है तो कैसा लगता है.' या 'हिंदी वालों को अब समझ में आया कि दूसरी भाषाएं भी होती हैं.'  लोगों ने कहा कि इस शो का नाम ‘नेत्रु, इंद्रु, नलाई’ था, जिसका मतलब ‘कल, आज और कल’ होता है. अगर किसी को तमिल समझ नहीं आती तो कम से कम इस शो टाइटल के नाम से ही समझ जाना चाहिए था कि वहां कौन से गाने गाए जाएंगे.

a r rahman

पूरी बहस भाषा को लेकर हो गई. भाषा को लेकर वैसे भी मामला फिलहाल गर्माया हुआ है. बेंगलुरु में मेट्रो स्टेशनों पर हिंदी के साइन बोर्ड मिटाए गए. इससे पहले भी भाषा और नॉर्थ-साउथ डिवाइड को लेकर खासी बयानबाजी होती रही है. अब ये लड़ाइयां आम तौर पर ट्विटर पर लड़ी जाती हैं.

रहमान के कॉन्सर्ट को छोड़ कर जाने वालों की समझ पर सवाल उठना लाजिमी है. पहली बात तो रहमान के कॉन्सर्ट का नाम तमिल में था और दूसरी बात ये कि रहमान असल में एक बहुभाषी कलाकार हैं. क्या रहमान को सुनने गए लोगों को नहीं पता कि वह तमिलभाषी हैं और उनके संगीत की शुरुआत तमिल फिल्मों से ही हुई? क्या रहमान के सबसे पॉपुलर गाने पहले तमिल में नहीं रचे गए? और क्या इन गानों का सुर हिंदी के गानों जितना ही सुरीला नहीं है?

अगर यह कॉन्सर्ट बठिंडा, लखनऊ या पटना में हो रहा होता तो यह शिकायत समझ में आती कि तमिल के गाने क्यों गाए गए. लंदन के वेंबली में हुए कॉन्सर्ट में हर भाषा बोलने वाले फैंस थे. ऐसे में भाषा को लेकर विवाद बड़ा बेतुका और बचकाना है. सोचिए जरा अगर ऑस्कर पुरस्कार चुनने वाले यही सवाल उठाते तो 'आजा.. आजा.. जिंद आसमाने के तले...' कभी ऑस्कर जीता पाता क्या?

सबसे अजीब तो ये लगता है कि आजकल स्पेनिश के 'डेसपासितो' और कभी एनरीके के 'बायलामोस' और यहां तक के साइ के 'गंगनम स्टाइल' पर थिरकने वालों को तमिल इतनी 'एलियन' भाषा क्यों लगने लगती है. यही फैंस 'कोलावरी डी' और 'आ अंते अमलापुरम' पर कैसे नाच लेते हैं. या इनको राज कपूर का 'रमैया वस्तावैया' समझ नहीं आता.

हालांकि रहमान का पक्ष लेने वालों को भी समझना चाहिए कि वह इस मुद्दे को नॉर्थ-साउथ इंडिया के विभाजन से न जोड़ें. वेंबली में जो हुआ, वह कुछ फैंस की नाराजगी हो सकती है लेकिन रहमान के संगीत का सम्मान करने वालों की कमी नहीं है. कुछ लोगों के रहमान पर सवाल उठाने से आपको यह कहने का मौका नहीं मिल जाता कि 'हिंदी वाले' होते ही ऐसे हैं.

संगीत एक ऐसी भाषा है जो दुनिया भर के लोगों को एकसाथ लाती है- रहमान के संगीत ने पूरे देश के लोगों को गर्व करने का मौका दिया है, इसे देश को बांटने का बहाना बनने न दें.

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