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झारखंड: बदहाली का दंश झेलने को मजबूर हैं 'भगवान' के वंशज

आजादी के सत्तर सालों बाद भी झारखंड में भगवान माने जाने वाले शहीद बिरसा मुंडा का परिवार बदहाली से जूझ रहा है

Brajesh Roy Updated On: Sep 15, 2017 10:31 AM IST

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झारखंड: बदहाली का दंश झेलने को मजबूर हैं 'भगवान' के वंशज

दिन, महीने और कई साल बीत गए. देश की आजादी के साथ उलिहातू के सुखराम मुंडा ने भी जीवन के 70 साल की दहलीज पर कदम रख दिया. 1947 में जन्म लेने वाले आदिवासी सुखराम मुंडा ने कभी भी दो जून का भोजन भर पेट नहीं किया. सुख और बेहतर जिंदगी किसे कहते हैं, ये आदिवासी बुजुर्ग आज भी नहीं जान पाए हैं.

हां, इधर 17 साल से इन्हें गाहे-बगाहे आश्वासनों की घुट्टी जरूर मिलती रही है. इतना ही नहीं सीएम से लेकर सरकारी बाबू तक चहुंमुखी विकास का सपना इन्हें हर मौकों पर दिखाते जरूर रहे हैं. जमीनी हकीकत से बिल्कुल परे सुखराम मुंडा अपने परिवार के साथ न केवल आज भी बदहाली का दंश झेल रहे हैं बल्कि अब अपने पूर्वजों को कोसने भी लगे हैं. पूर्वज कौन ? पूर्वज ,जिन्हें झारखंड में भगवान का दर्जा प्राप्त है. जी हां, हम आपको जो कहानी बता रहे हैं वो दर्द और पीड़ा झारखंड के भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों की है.

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सुखराम मुंडा

70 वर्षीय सुखराम मुंडा, भगवान बिरसा मुंडा के पोते हैं. आज इस संदर्भ की चर्चा इसलिए कि 15 से 17 सितंबर तक झारखंड दौरे पर आ रहे हैं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य सभा सांसद अमित शाह. अमित शाह 17 सितंबर को झारखंड के भगवान बिरसा मुंडा की पूजा-अर्चना करने उनके गांव रांची से लगभग 80 किमी दूर खूंटी जिला के उलिहातू जाएंगे.

बीजेपी अध्यक्ष के साथ राज्य के मुख्यमंत्री और पूरा लाव-लश्कर भी दिन भर उलिहातू में रहेगा. इस दौरान सोलर लैंप लाइट से लेकर उज्ज्वला योजना सहित चहुंमुखी विकास की अविरल धारा यहां बहाने के वायदे किए जाएंगे. कारण भी है. झारखंड सरकार ने शहीद ग्राम योजना के तहत भगवान बिरसा मुंडा के गांव को प्राथमिकता के आधार पर सबसे ऊपर रखा है. उलिहातू में अमित शाह के स्वागत के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. कैसी हो रही है अमित शाह के लिए भगवान के गांव में तैयारी और आज भी किस हालात में हैं भगवान के वंशज ? यह हम आपको आगे बताएंगे. पहले आप सभी संक्षेप में जान लें भगवान बिरसा मुंडा यानि झारखंड के धरती आबा के विषय में.

बिरसा मुंडा क्यों हैं झारखंड के भगवान ?

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को रांची से सटे खूंटी जिला अड्की प्रखंड के उलिहातू गांव में एक गरीब आदिवासी मुंडा परिवार में हुआ था. मां करमी मुंडा और पिता सुगना मुंडा के पुत्र बिरसा मुंडा ने महज 25 साल की अपनी जिंदगी में वो काम कर दिखाया जिसे आदिवासी समाज कभी भुला नहीं सकता. अंग्रेजों के ईसाई धर्म के विरोध से बिरसा ने अपना उलगुलान यानि विरोध शुरू किया था.

युवा हो रहे बिरसा मुंडा ने रामायण और महाभारत सहित सनातन धर्म को पढ़ने की कोशिश की थी. फिर उन्होंने ‘बिरसाइत धर्म’की नींव डाली. इसके तहत ईसाई धर्म और अंग्रेजों से अलग अपनी समृद्ध संकृति के साथ जीवन यापन करना शुरू किया. इतना ही नहीं युवा बिरसा मुंडा ने वन एवं भूमि संबंधी अधिकारों को लेकर उलगुलान शुरू कर दिया. इस उलगुलान आदिवासी समाज ने बिरसा मुंडा को 'धरती आबा' यानि इस पृथ्वी का भगवान मान लिया.

बिरसा मुंडा ने इस दौरान न केवल अंग्रेजी हुकूमत बल्कि महाजनी सूदखोरी व्यवस्था का भी पुरजोर विरोध करना शुरू कर दिया था. अहिंसावादी युवा बिरसा मुंडा के उलगुलान का खूब असर हुआ आदिवासी समाज पर. निशाने पर अंग्रेज़ और उनकी व्यवस्था रही. अंग्रेजी हुकूमत ने आदिवासियों के इस उलगुलान को हर संभव कुचलने का प्रयास किया. इसी क्रम में पहली दफा 22 अगस्त 1895 को बिरसा मुंडा को अंग्रेजी सेना ने गिरफ्तार कर लिया.

इस बीच उलगुलान के साथ बिरसा मुंडा का जेल जाने और बाहर आने का क्रम चलता रहा. इसी कड़ी में एक बार फिर बिरसा मुंडा 3 फरवरी 1900 को गिरफ्तार किए गए. इस दफा उन्हें रांची जेल में रखा गया जहां 9 जून 1900 को उनकी मृत्यु हो गई. अंग्रेजी हुकूमत ने 25 वर्षीय बिरसा मुंडा की मौत का कारण बीमारी बताया था. बिरसा मुंडा तो समय से पहले चले गए लेकिन धरती आबा ने शोषण के खिलाफ जो आदिवासी समाज को जो प्रेरणा और दिशा दी उसने उन्हें भगवान बना दिया.

आलम यह है कि आजादी के बाद अविभाजित बिहार या फिर वर्तमान झारखंड में शहीद बिरसा मुंडा को भगवान माना जाता है. यही वजह है कि झारखंड की राजनीति का केंद्र बिंदु भी भगवान बिरसा मुंडा ही हैं. यह अलग बात है कि यहां के नेता और दल अपने सियासी फायदे की रोटी बदहाली का दंश झेल रहे भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों के चूल्हे पर सेंकते आ रहे हैं.

अमित शाह के लिए सजाया जा रहा है भगवान के गांव को

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परंपरा के अनुसार बिहार और फिर वर्तमान झारखंड की हर सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्म स्थली को नमन किया है. दो साल पहले देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी उलिहातू आए थे तब भी यहां सजवाट खूब हुई थी. इस बार अमित शाह के लिए मखमली टाइल्स लगाने से लेकर रंग रोगन का काम चल रहा है.

मसलन अमित शाह यहां जितनी भी देर और जहां रहेंगे वो सब चकाचक दिखेगा. सवा दो सौ घर वाले इस गांव उलिहातू की सड़कें पक्की तो हो गईं पर शहीद के गांव के तीन चौथाई ग्रामीण आज भी कच्चे मकान में रहने को विवश हैं. बिजली है लेकिन कब आएगी इसका दावा कोई नहीं कर सकता. मोदी के डिजिटल इंडिया के इस गांव नेटवर्क के ढूंढना कुछ ग्रामीणों की दिनचर्या है. नेतागिरी की चमक के आगे वंशजों की पीड़ा नहीं दिखती

गांव में रह रहे भगवान के बिरसा मुंडा पोते सुखराम मुंडा के घर में भी टाइल्स लगाया जा रहा है. कच्चे ईंट से बने मकान पर रंग-रोगन भी हो रहा है. पिछले एक सप्ताह से सुखराम के एक बेटा और एक व्याहता बेटी को यहां रोजगार भी मिल गया है.

ठेकेदार ने बड़ा बेटे बिनन्द मुंडा और बेटी चंपा मुंडा को दैनिक मजदूरी पर काम दे दिया है. इससे खुश भी है परिवार. कुछ दिन के लिए कुछ रुपए तो हाथ में आ जाएंगे. वैसे 70 वर्षीय सुखराम मुंडा आज भी मजदूरी करके ही जीवन यापन करते हैं. सुखराम मुंडा कहते हैं, 'केवल खेती के सहारे पूरा साल नहीं कटता. सरकारी राशन के साथ और भी जरूरतें होती हैं उनके लिए तो हाथ में रुपया चाहिए न ? मेरे चार बेटे और दो बेटी में से सिर्फ दो बेटे को सरकारी नौकरी मिली है. मेरा छोटा बेटा राम मुंडा मजदूरी करने अंडमान चला गया है. अपनी पीड़ा किससे कहूं? यहां नेता लोग हर बार सिर्फ ठगने के लिए आता है. बाहर का चमक दमक छोड़िए, मेरे घर के अंदर देख लीजिए फिर आप ही फैसला कीजिए? '

अमित शाह सुखराम मुंडा के घर पर भोजन करेंगे

यह अलग बात है कि ताम-झाम का अवलोकन करने उलिहातू पहुंचे राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने इस बात को नहीं स्वीकारा कि अमित शाह सुखराम मुंडा के घर भोजन करेंगे. लेकिन इससे उलट सुखराम मुंडा ने खुद ही कहा, 'साहेब मन कहे हैं कि अमित शाह और मुख्यमंत्री जी तुम्हारे घर पर भोजन करेंगे.' अब इस तस्वीर को आप देख लीजिये सुखराम मुंडा की बेटी चंपा मुंडा घर में रखे मोटे चावल को दिखा रही हैं. चावल का स्टॉक भी घर में सिर्फ थोड़ा ही है.

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सुखराम मुंडा की बेटी चंपा मुंडा

बहरहाल, झारखंड सरकार से लेकर झारखंड के भगवान के गांव उलिहातू और भगवान के वंशजों को 17 सितंबर का इंतजार है॰ उम्मीद और इंतजार इस बात का भी है कि शायद इस दफा उनकी तकदीर संवर जाएगी. अमित शाह झारखंड की वर्तमान रघुवर दास सरकार को जो निर्देश देंगे वो धरातल पर उतरेगा. फिर भगवान बिरसा मुंडा का गांव और उनके वंशज भी खुशहाली की जिंदगी जी पाएंगे.

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