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चीन मुद्दा: कांग्रेस ने सरकार से पूछा- कोई प्लान है या नहीं?

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है

Bhasha | Published On: Jul 03, 2017 07:58 PM IST | Updated On: Jul 03, 2017 07:58 PM IST

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चीन मुद्दा: कांग्रेस ने सरकार से पूछा- कोई प्लान है या नहीं?

चीन सेना द्वारा भारत की सीमा में घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं पर कांग्रेस ने सोमवार को गहरी चिंता जताई. कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया कि देश की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे से निपटने के लिए क्या उसके पास कोई ठोस रणनीति है?

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताओं से कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है. उन्होंने कहा कि चीन के साथ पिछले 40-50 वर्ष में इतनी तनातनी नहीं देखी गयी है.

उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले 45 दिनों में चीनी सेना द्वारा घुसपैठ की 120 घटनाएं हुई हैं. वर्ष 2017 में चीनी सेना द्वारा ऐसी 240 घटनाएं हो चुकी हैं. इसका मतलब है कि प्रतिदिन घुसपैठ की एक घटना.

'चीन लगातार कर रहा है सीमा उल्लंघन'

उन्होंने कहा कि जून महीने के दौरान उत्तराखंड के चमोली जिले में दो चीनी हेलीकाप्टरों ने भारत की वायु सीमा का उल्लंघन किया. कुछ समय पहले चीनी सैनिक उत्तराखंड में भारतीय सीमा में साढ़े चार किलोमीटर भीतर तक घुस आए थे.

सिंघवी ने कहा कि हाल में चीन के साथ जो तनातनी हुई है, उसमें एक पक्ष भूटान भी है. उन्होंने कहा कि भूटान से भारत के लंबे मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं. इस मामले में भारत को बहुत ही सतर्कता से कदम उठाना होगा. उन्होंने चीन के मुद्दे को सरकार द्वारा गंभीरता से नहीं लिए जाने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह कहते हैं कि चीनी घुसपैठ 'अवधारणा' का मामला है जबकि विदेश राज्य मंत्री संसद में बयान देते हैं कि चीनी सेना द्वारा 'घुसपैठ' नहीं 'अतिक्रमण' किया जा रहा है. सिंघवी ने कहा कि वह किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं कर रहे हैं पर इस सरकार में या तो 'अनिच्छुक' रक्षा मंत्री रखे जाते हैं या 'अल्पकालिक' रक्षा मंत्री.

उन्होंने कहा कि चाहे मौलाना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का मुद्दा हो, परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह या सुरक्षा परिषद की सदस्यता का मामला हो, चीन ने भारत का हर बार कड़ा विरोध किया है.

'रूस भी हमारे साथ नहीं'

उन्होंने कहा कि वर्षों से हमारा मजबूत मित्र रहा रूस भी चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) मुद्दे पर चीन का समर्थन कर रहा है. उन्होंने कहा कि भारत भले ही सीपीईसी का कड़ा विरोध कर रहा हो, पर इस मामले में कोई हमारा समर्थन करता नहीं दिख रहा है.

सिंघवी ने सरकार को सुझाव दिया कि अप्रैल, 2005 के वास्तविक नियंत्रण समझौते और अक्तूबर, 2013 के एक अन्य समझौते को आधार बनाकर चीन के साथ बातचीत कर संबंध सामान्य बनाए जा सकते है.

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