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'मम्मी-पापा बेकसूर, तो मेरा गुनहगार कौन?'

सीबीआई की पहली जांच टीम यह तो नहीं तय कर पाई कि हत्यारा कौन है. हां यह जरूर साबित करने की कोशिश की थी कि तलवार दंपत्ति का इस दोहरे हत्याकांड से कोई वास्ता नहीं है.

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Updated On: Oct 13, 2017 04:00 PM IST

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'मम्मी-पापा बेकसूर, तो मेरा गुनहगार कौन?'

16 मई 2008 की सुबह यही तकरीबन 7 बजे का वक्त रहा होगा. नोएडा सेक्टर 25 में रहने वाले एक परिचित ने मोबाइल पर आशंका जताई कि, 'सेक्टर के एल-32 नंबर फ्लैट में पुलिस आई है. भीड़ बहुत लगी है. मैं देखकर आया हूं. एक बच्ची की लाश पड़ी मिली है. फ्लैट मालिक कोई डॉक्टर तलवार दंपत्ति है.

सेक्टर 25 दिल्ली से सटे हाईटेक सिटी नोएडा का हाई-प्रोफाइल लोगों की रिहाइश वाला सेक्टर है. यहां किसी फ्लैट में लाश मिलना बड़ी खबर थी. मौके पर पहुंचा, तो पुलिस और पब्लिक की भीड़ सेक्टर की तकरीबन हर गली-सड़क को जाम किए हुए थी. जैसे-तैसे फ्लैट की छत पर पहुंचा.

12-14 साल की एक लड़की (आरुषि) की लाश को पुलिस वाले सील करके पंचनामा (कानूनी कागजात) बनाने में जुटे थे. फॉरेंसिंक साइंस एक्सपर्ट मौके से फिंगर प्रिंट व अन्य सबूत इकट्ठे करने में मसरूफ थे. उस समय नोएडा (जिला गौतमबुद्ध नगर) के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ए. सतीश गणेश के आसपास चंद लोग इकट्ठे थे.

नौकर हेमराज पर सबसे पहले शक की सुई घूमी थी

लड़की के माता-पिता (राजेश तलवार और नुपुर तलवार) फ्लैट के एक कमरे पड़ोसियों से घिरे हुए कोने में जमीन पर बेहाली के आलम में बैठे थे. एसएसपी से बातचीत करने पर पता चला कि आरुषि नोएडा के ही एक मशहूर पब्लिक स्कूल में पढ़ती थी. फ्लैट में आरुषि मां-पिता के साथ रहती थी.

रात के वक्त कोई आरुषि को कत्ल कर गया. एसएसपी गणेश ने आशंका जाहिर की कि तलवार दंपत्ति का घरेलू नौकर हेमराज घर से गायब है. एसएसपी को यह बात आरुषि के पिता राजेश तलवार ने बताई थी. कानूनी-कागजी खानापूर्ति के बाद आरुषि की लाश पोस्टमॉर्टम कराके परिजनों को सौप दी गई.

इस घटना ने नोएडा और दिल्ली को हिला कर रख दिया था. पॉश सेक्टर में घर के भीतर लड़की का कत्ल अगले दिन अखबारों की सबसे बड़ी खबर थी. डॉक्टर राजेश तलवार बेटी की अस्थियां विसर्जित करने हरिद्वार चले गए.

हेमराज का शव छत पर मिलने से मची थी सनसनी

जब डॉक्टर तलवार हरिद्वार में थे, तभी यहां नोएडा में एक बड़ा खुलासा और हो गया. तलवार दंपत्ति जिस नौकर हेमराज को फरार बता रहे थे, उसकी लाश फ्लैट की ही दुछत्ती (बरसाती) के करीब पड़ी मिल गई.

हेमराज-आरुषि दोहरे हत्याकांड में बस एक यही मोड़ या पड़ाव कहिए (हेमराज की लाश भी तलवार के फ्लैट की छत से मिलना) जिसने पूरे मामले को उलझा दिया. हेमराज की लाश मिलने के बाद पुलिस, मीडिया, कोर्ट-कचहरी, वकील, समाज सब उलझकर रह गए.

सबके जेहन में जो सवाल 9 साल पहले था, वही सवाल आज भी कचोट रहा है. आखिर इस दोहरे हत्याकांड का मुजरिम कौन है? इन बदले हालातों में जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरुषि की मां नुपुर तलवार और पिता राजेश तलवार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है.

अब तक की सबसे अधिक अनसुलझी गुत्थी

हेमराज की लाश मिलने के बाद से आरुषि हत्याकांड की गुत्थी जिस कदर उलझी, मेरे 27 साल के अपराध पत्रकारिता करियर में शायद ही ऐसी कोई अन्य घटना हो, जिसने आरुषि-हेमराज दोहरे हत्याकांड की तरह अनसुलझी रहकर परेशान किया हो. यह तथ्य तो दीगर है कि एक फ्लैट में एक ही रात में दो-दो कत्ल हुए हैं.

एजेंसियों की मिली-जुली पड़ताल की कड़ियों को जोड़-तोड़ कर देखा जाए तो यह भी तय है कि, घटना वाली रात फ्लैट में किसी के जबरदस्ती प्रवेश का कोई निशान मौका-ए-वारदात पर नहीं मिला. घर में आरुषि तलवार के माता-पिता उस रात मौजूद थे.

जिस नौकर हेमराज पर आरुषि का शक तलवार दंपत्ति ने शुरुआती दौर में जाहिर किया था, शक जाहिर करने के अगले दिन ही उस हेमराज की लाश भी उसी फ्लैट से बरामद कर ली गई.

सीबीआई की दो टीमों को लगाया गया था जांच में

इस पूरे मामले की तह में जाने के लिए उत्तर-प्रदेश पुलिस की उस पहली (शुरुआती) पड़ताल को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है, जिसमें घटनास्थल के मौके के हालातों के मुताबिक तलवार दंपत्ति को शक के दायरे में खड़ा किया गया था.

चूंकि तलवार दंपत्ति संदेह का लाभ देकर उच्च न्यायालय से बरी किए जा चुके हैं. ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि,आखिर हेमराज और आरुषि की हत्या किसने, क्यों की?

इन्हीं दो सवालों के जबाब खोजने के लिए यूपी की तत्कालीन मायावती सरकार ने पड़ताल यूपी पुलिस से छीनकर देश की इकलौती काबिल समझी जाने वाली सीबीआई को थमाई गई थी. किसी मामले की जांच के लिए सीबीआई की ही दो टीमों को लगाया गया हो, ऐसा अमूमन देखने में न के बराबर ही आता है.

सीबीआई की पहली जांच टीम यह तो नहीं तय कर पाई कि हत्यारा आखिर कौन है? हां पहली टीम ने यह जरुर साबित करने की कोशिश की थी, कि तलवार दंपत्ति का इस दोहरे हत्याकांड से कोई वास्ता नहीं है.

सीबीआई की दूसरी टीम ने पहली टीम पर उठा दिए थे सवाल

सीबीआई की दूसरी टीम के हाथों में जब पड़ताल गई, तो उसने अपनी ही जांच एजेंसी की पहली टीम की पड़ताल को कटघरे में खड़ा किया. जिसका परिणाम यह हुआ कि तलवार दंपत्ति को दूसरी टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही निचली अदालत से उम्र कैद की सजा सुना दी गई.

यह अलग बात है कि बाद में इलाहबाद हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया. निचली अदालत से सजायाफ्ता तलवार दंपत्ति को बरी कर दिया. साथ हरी सीबीआई की दूसरी टीम और उसकी जांच को संदेह के घेरे में ले जाकर खड़ा कर दिया.

आरुषि और हेमराज की हत्या हुई. दुनिया को पता है. हत्यारे कौन हैं? हत्या की वजह क्या थी? दोनो सवाल आज भी मुंह बाए खड़े हैं. जो भी अंत में यह तो मानना ही होगा कि, हमारे साथ साथ कहीं न कहीं या जहां कहीं भी हो आरुषि की आत्मा भी जानना चाहती होगी कि, मेरे मम्मी-पापा अगर बेगुनाह हैं तो, तो फिर मेरी और हेमराज की हत्या का गुनाहगार आखिर कौन है?

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