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एक कॉमिक्स, जो ग्रामीण महिलाओं को पीरियड्स में स्वच्छता का पाठ पढ़ाती है

जब लड़कियों को यह महसूस होगा कि पीरियड्स छुपाने की चीज नहीं है, वो अपनी दिक्कतों पर बात कर सकेंगी

Neerja Deodhar | Published On: Jul 16, 2017 02:47 PM IST | Updated On: Jul 16, 2017 03:54 PM IST

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एक कॉमिक्स, जो ग्रामीण महिलाओं को पीरियड्स में स्वच्छता का पाठ पढ़ाती है

मासिक धर्म या माहवारी के बारे में लोग आम तौर पर चर्चा करने से बचते हैं. भले ही लड़कियां हर महीने इस कुदरती प्रक्रिया का सामना करती हैं, मगर इसे लेकर चर्चा को अच्छा नहीं माना जाता. नतीजा ये कि इसे लेकर तमाम भ्रांतियां फैली हुई हैं. लोग इसे गंदा कहते हैं. माहवारी के दौरान महिलाओं को अस्वच्छ और अपवित्र कहकर घर के कामों से दूर रखा जाता है.

समाज की ऐसी सोच की वजह से गांवों में लड़कियां अक्सर इस बारे में तब जानती हैं, जब उनका मासिक धर्म शुरू हो जाता है. उनकी मां या बड़ी बहनें और दूसरे परिजन भी लड़कियों इस बारे में आगाह नहीं करते.

इस दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखा जाना जरूरी है. मगर मासिक धर्म को इतना खुफिया रखा जाता है कि अक्सर साफ-सफाई से समझौता होता. लड़कियां तमाम बीमारियों की शिकार हो जाती हैं.

'पाप' नहीं है पीरियड्स 

अमेरिका की रहने वाली अरियाना अबादियान-हीफेज इन दिनों मासिक धर्म को लेकर जागरूकता फैलाने में जुटी हैं. अरियाना ने इस बारे में एक कॉमिक बुक भी तैयार कराई है, ताकि आसानी से लड़कियों को इसके बारे में समझाया जा सके. उन्हें बताया जा सके कि माहवारी के दौरान साफ-सफाई और सेहत का खयाल रखना कितना जरूरी है.

अमेरिका के बोस्टन शहर की अरियाना अपने दिन याद करते हुए बताती हैं कि जब उनकी माहवारी शुरू हुई थी, तो उनके मां-पिता ने 'पीरियड पार्टी' दी थी. उन्हें इस बारे में शर्मिंदा होने के बजाय खुलकर बात करना और इसे सहजता से लेना सिखाया गया था. अरियाना को बताया गया था कि ये एक कुदरती प्रक्रिया है, जिससे हर युवती को गुजरना होता है.

भारत में जागरूकता की कमी

लेकिन जब अरियाना एक स्वयंसेवी संस्था के लिए काम करने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में गईं, तो देखा कि वहां लड़कियों को इशकी बुनियादी जानकारी तक नहीं थी. वो न तो मासिक धर्म के बारे में जानती थीं, न ही किसी ने उन्हें बताने-समझाने की कोशिश की.

जिन लड़कियों की माहवारी शुरू हो गई थी, उनके किस्से सुनकर तो अरियाना और भी हैरान रह गईं. लड़कियां इसके लिए बेहद गंदे कपड़े, कचरा साफ करने वाले कपड़े, पुराने गद्दे के टुकड़े वगैरह इस्तेमाल करती थीं. उनके पास यही तरीका था. उन्हें सैनिटरी पैड के बारे में न तो मालूम था और न ही उन्हें इस्तेमाल के लिए वो उपलब्ध था.

अहम है साफ-सफाई

इनमें से ज्यादातर लड़कियों को माहवारी शुरू होने तक इस कुदरती प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती थी. इनमें से एक लड़की ने तो बताया कि उसकी दोस्त ने मासिक धर्म होने पर साइकिल साफ करने वाला कपड़ा इस्तेमाल किया था. जिसकी वजह से उसे इनफेक्शन हो गया.

इन तजुर्बों के बाद अरियाना को लगा कि गांव की लड़कियों के बीच मासिक धर्म को लेकर जागरूकता फैलाने की जरूरत है. उन्हें आसान तरीकों से इसके बारे में समझाने और और खुद का खयाल रखना सिखाने की जरूरत है.

फिर वो अपने एनजीओ के साथियों के साथ, दिन में चार सेशन करके लड़कियों को इसके प्रति जागरूक करने लगीं. लेकिन, अरियाना को लगा कि कई बार तो खुद उन्हें अपनी बात याद नहीं रहती. ऐसे में जो लड़कियां उनको सुनती हैं, उन्हें भला क्या सबक याद रहते होंगे?

ये एहसास होने पर अरियाना ने मासिक धर्म के प्रति जागरूकता फैलाने वाली किताबों की तलाश शुरू की. ताकि किताबों के जरिए लड़कियों को इसके बारे में समझाया जा सके. लेकिन कोई भी किताब ऐसी नहीं मिली, जिसमें पूरी जानकारी आसान तरीके से बताई गई हो.

पिक्चर बुक को बनाया जरिया 

इसके बाद अरियाना ने जानकारों की मदद से खुद एक पिक्चर बुक तैयार की है. इस किताब का नाम है-स्प्रेडिंग योर विंग्स (Spreading Your Wings). इस किताब के जरिए लड़कियों को मासिक धर्म के बारे में जानकारी दी जाती है. उन्हें अपनी साफ-सफाई का खयाल रखना सिखाया जाता है.

अरियाना कहती हैं कि माहवारी को लेकर भारतीय समाज में जो सोच है, उसे बदलने की जरूरत है. वो लड़कियों को इस बात के लिए उत्साहित करती हैं कि वो अपनी मां, चाची या मौसी से इस बारे में बात करें.

अपनी पिक्चर बुक तैयार करने में अरियाना ने मशहूर इलस्ट्रेटर पिया अलीजे हजारिका की मद ली है. साथ ही उन्होंने महिलाओं की डॉक्टरों से सटीक जानकारी लेकर किताब में इसे सरल तरीके स समझाने की कोशिश की है.

अरियाना की किताब में सिर्फ माहवारी को लेकर जानकारी नहीं है. इसमें परिवार नियोजन जैसे मुद्दों की जानकारी भी दी गई है. समझाया गया है कि पीरियड्स की शुरुआत का ये मतलब नहीं है कि लड़की का शरीर बच्चा पैदा करने के लिए तैयार है. अरियाना को लगता है कि उन्होंने जो विषय चुना है वो बहुत व्यापक है, मगर कम से कम एक शुरुआत तो हुई है.

क्या है 'स्प्रेडिंग योर विंग्स'

अरियाना की कॉमिक बुक-स्प्रेडिंग योर विंग्स 100 पन्नों की किताब है. इसमें मिसालों और खेल के जरिए लड़कियों को मासिक धर्म और इससे जुड़े दूसरे मसलों के बारे में समझाया गया है. अरियाना ने दो देशों की लड़कियों के बीच काम किया है. उन्हें पता है कि बच्चों को अगर चित्रों और इलस्ट्रेशन के जरिए बातें समझाई जाएं तो उन्हें ज्यादा याद रहती हैं. इसीलिए उन्होंने अपनी किताब में माहवारी जैसे संजीदा विषय को भी हल्के-फुल्के अंदाज और चित्रों के जरिए समझाया है. ये बताया गया है कि माहवारी शुरू होने से लड़कियां अपवित्र नहीं हो जाती हैं.

अपनी किताब में अरियाना ने जो किरदार गढ़े हैं, वो समाज के हर वर्ग और समुदाय की नुमाइंदगी करते हैं. उन्हें इस तरह से पेश किया गया है कि किशोरियों को वो पढ़ने में दिलचस्प और दोस्ताना लगें. अरियाना को उम्मीद है कि उनकी किताब पढ़ने से लड़कियां इस विषय को लेकर जागरूक होंगी. लोग मासिक धर्म के बारे में बात करने में हिचकिचाएंगे नहीं.

पुरानी परंपराओं को बदलने का वक्त

अरियाना ने कोशिश की है कि मासिक धर्म को लेकर पुरानी परंपराओं पर चोट करने के बजाय वो ये समझाएं कि ये पुरानी पड़ गई हैं. उन्हें लगता है कि अगर वो सवाल उठाएंगी तो इसकी प्रतिक्रिया होगी.

इसीलिए अरियाना लड़कियों को ये बताती हैं कि वो अपने घर के बड़ों को ये समझाएं कि कुछ परंपराएं जो किसी दौर में अच्छी थीं, वो अब ठीक नहीं हैं. जैसे माहवारी के दौरान लड़कियों को हर काम से दूर रखना. या फिर साफ-सफाई का खयाल न रखना. कई लड़कियों को पहले से ही लगता था कि मासिक धर्म को लेकर कुछ बातें गड़बड़ हैं. मगर उन्हें ये कहने का हौसला नहीं था. अरियाना ने उन्हें ये हौसला दिया है.

उन्हें लगता है कि लड़कियों को उनकी किताब अपनी मांओं के साथ पढ़नी चाहिए. इससे माहवारी को लेकर सहज बातचीत हो सकेगी. आगे चलकर लड़कियां अपने घर के मर्दो के साथ भी इस पर चर्चा कर सकेंगी. समाज में माहवारी को लेकर जो सोच है, उसे बदलने की अरियाना को सख्त जरूरत लगती है.

अरियाना की किताब में मर्द किरदार नहीं!

फिलहाल अरियाना ने अपनी किताब में कोई मर्द किरदार नहीं रखा. इसका वजह वो ये बताती हैं कि इससे लड़कियां और महिलाएं खुद को उससे जोड़ नहीं पातीं. लेकिन अरियाना मानती हैं कि महिलाओं को अपने लड़कों से इस बारे में बात करनी चाहिए. साथ ही लड़कियों को अपने पिता के साथ मासिक धर्म को लेकर चर्चा करनी चाहिए. तभी तो सोच बदलेगी और माहौल खुलेगा.

लेकिन फिलहाल उन्होंने इसे दूर की कौड़ी बताया है. अरियाना की नजर में आज का भारतीय समाज इस इंकलाबी कदम के लिए तैयार नहीं. इसीलिए उन्होंने अपने मिशन का फोकस लड़कियों पर रखा है.

किताब को तैयार करने के दौरान सबसे बड़ी चुनौती इसे बोरिंग होने से बचाना था. किरदार और बातें इस दिलचस्प तरीके से बतानी जरूरी थीं कि पढ़ने वालों को वो उबाऊ न लगें. साथ ही कोई जानकारी भी नहीं छूटनी चाहिए थी. इसीलिए उन्होंने इस किताब को कॉमिक बुक की तरह तैयार किया.

लड़कियों को ट्रेनिंग की टिप्स

अरियाना की किताब-स्प्रेडिंग योर विंग्स में इस बात की टिप्स भी दी गई हैं कि लड़कियों को कैसे ट्रेनिंग दी जाए. इसकी मदद से कई लड़कियां आगे चलकर खुद अपने ट्रेनिंग सेशन चला सकेंगी. अरियाना को लगता है कि माहवारी को लेकर जो शर्मिंदगी का माहौल बना है, उसे तोड़ने और बदलने की जरूरत है.

जैसे ही लड़कियों को ये महसूस होगा कि ये छुपाने की चीज नहीं है, वो सहजता से अपनी दिक्कतों के बारे में बात कर सकेंगी. इससे लोगों की सोच भी बदलेगी और परिवार नियोजन जैसे गंभीर मुद्दों पर बहस के लिए नई खिड़की भी खुलेगी.

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