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भारत की जमीन चीन को बेच रहा है पाकिस्तान!

पाकिस्तान इस इलाके को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है ताकि सीपीईसी को कानूनी मान्यता मिल सके

FP Staff Updated On: Jun 06, 2017 06:22 PM IST

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भारत की जमीन चीन को बेच रहा है पाकिस्तान!

पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान के लोग इस बात का विरोध कर रहे हैं कि उनकी जमीन चीनी कंपनियों और वहां की आर्मी को सौंपी जा रही है.

चीन पाक आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के लिए पाकिस्तानी अफसरों ने स्थानीय लोगों से यह जमीन जबरदस्ती हासिल किया है. जमीन देने से इनकार करने वालों को या तो मार दिया गया या फिर बिना किसी सुनवाई के जेल में बंद कर दिया गया है.

गिलगिट-बाल्टिस्तान थिंकर्स फोरम के चेयरमैन वजाहत हसन ने बताया, 'हजारों लोगों की जमीन सैनिकों ने छीन ली. इस कठोर नियम के चलते कोई सीपीईसी के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता.'

स्थानीय लोगों को किस बात का है डर?

वहां रहने वाले कई लोगों को डर है कि उनसे छीनी हुई जमीन पर पाक और चीन की सेना को तैनात हो सकती है. इस जमीन को आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान ने भारत से छीन लिया था.

बलावरिस्तान नेशनल फ्रंट (बीएनएफ) के चेयरमैन अब्दुल हामिद खान ने कहा, 'गिलगिट-बाल्टिस्तान में बड़ी संख्या में पाकिस्तान और चीन की सेना तैनात किए जाएंगे.'

क्या है पाकिस्तान की मंशा?

पाकिस्तान इस इलाके को संवैधानिक मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहा है ताकि सीपीईसी को कानूनी मान्यता मिल सके.

गिलगिट-बाल्टिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर का सबसे बड़ा हिस्सा है. यह पीओके के बाकी हिस्से से छह गुना बड़ा है. यह जम्मू और कश्मीर के अविभाजित राज्य का उत्तरी हिस्सा था.

पिछले साल जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में यहां के लोगों पर पाकिस्तानी सेना की ज्यादतियों का जिक्र किया तब से यह इलाका चर्चा में आया.

गिलगिट-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान का पांचवा प्रांत बनाने की भी योजना है. यह भारत के लिए चिंता का विषय है. अभी बलूचिस्तान, खैबर पख्तून्ख्वा, पंजाब और सिंध पाकिस्तान के चार प्रांत हैं. माना जा रहा है कि इलाके के असंवैधानिक स्टेटस को लेकर चीन काफी चिंतित है और इसी वजह से पाकिस्तान इस दिशा में कदम उठा रहा है. पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान इस इलाके को संवैधानिक मान्यता दिलाने की दिशा में प्रयास कर रहा है, ताकि सीपीईसी को कानूनी संरक्षण मिल सके.

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