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सनी लियोनी की असल कहानी में कुछ भी 'अश्लील' नहीं है

सनी को इस बात का क्रेडिट मिलना चाहिए कि उन्होंने 5 साल के छोटे समय में अपनी इमेज को बदल डाला

Animesh Mukharjee | Published On: May 13, 2017 09:05 AM IST | Updated On: May 13, 2017 04:08 PM IST

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सनी लियोनी की असल कहानी में कुछ भी 'अश्लील' नहीं है

2012 के बाद आपको सोशल मीडिया पर एक मैसेज जरूर पढ़ने को मिला होगा, हमारे यहां एक पॉर्न स्टार की इज्जत हो सकती है मगर बलात्कार पीड़ित को मुंह छुपाना पड़ता है.

जाहिर सी बात है कि ये मैसेज भारत की सबसे ज्यादा गूगल की जाने वाली विभूति (वर्तमान प्रधानमंत्री से भी ज्यादा) सनी लियोनी को टार्गेट करता था.

उस समय देश के तमाम नेताओं ने भी सनी पर भारतीय संस्कृति को नष्ट करने और देश में नैतिक भ्रष्टाचार को हवा देने की बात कह दी थी.

कैसे हो रही है संस्कृति खराब?

अब ये तो पता नहीं कि भारतीय संस्कृति कितनी खराब हुई मगर आज की तारीख में सनी के साथ शाहरुख (रईस) और अक्षय (सिंह इस ब्लिंग) भी काम कर रहे हैं. सामने से मिलने पर फैंस के बीच भी उनके लिए एक एडल्ट स्टार से ज्यादा फिल्म स्टार वाला क्रेज होता है.

आगे बात करने से पहले कुछ साल पहले का एक घटनाक्रम दोहरा लेते हैं. टीवी के एक चर्चित पत्रकार ने पिछले साल ‘हॉट सीट’ पर सनी का एक इंटरव्यू लिया था जो चर्चित होने के साथ-साथ विवादास्पद हो गया.

sunny laila

इसमें सनी से एक सवाल पूछा गया कि वो क्यों वो आमिर खान के साथ काम करना चाहती हैं. सवाल पूछने वाले ने सनी के जवाब को अनसुना करते हुए तुरंत खुद ही कहा था, ‘हालांकि! आमिर कभी सनी के साथ काम नहीं करेंगे.’

कुछ इसी तरह पुरुषों को महिलाओं के कपड़े पहनवाकर हर तरह की द्विअर्थी बातें करवाने वाले कपिल शर्मा ने भी सनी को शो पर बुलाने से मना कर दिया था कि उनका शो ‘पारिवारिक’ शो है. वो बात और है कि बाद में सनी इसी पारिवारिक शो का हिस्सा बनीं.

ये सारे पूर्वाग्रह महज कुछ मीडिया प्रोफेशनल्स के नहीं थे बल्कि ये हमारे समाज की की सोच को दिखाता है. वो सोच जिस में बिना नायक वाली ‘लिपिस्टिक अंडर माय बुरका’ और ‘ऐंग्री इंडियन गॉडेसेस’ तो भारतीय संस्कृति के लिए खतरनाक हो जाती है मगर सलमान भाई का लड़की की मिनी स्कर्ट को मुंह से खींचना (किक) महज एक चुहल होता है.

और ये सब वो लोग करते हैं जिन्होंने अपने समय में ‘खड़ा है, खड़ा है’ जैसे गाने और फिल्में बनाए.

कौन तय करता है फूहड़ता? 

ऐसा नहीं है कि सनी लियोनी के आने से सिनेमा में कोई ऐसी क्रांति हो गई जो पहले नहीं थी. राज कपूर की ‘सत्यम् शिवम् सुंदरम्’ देखिए. पूरे गांव की सारी लड़कियों में सिर्फ ज़ीनत अमान अकेली अर्धनग्न सुंदरी बनी घूमती रहती हैं.

बिना किसी लॉजिक, कहानी की जरूरत या किसी भी वाजिब कारण के. मगर ये सब जायज होता है क्योंकि ये एक सामर्थ्यवान पुरुष की कल्पना (पढ़ें फैंटेसी) हैं.

मिस एशिया पैसेफिक रहीं ज़ीनत का प्रदर्शन स्वघोषित ग्लैमर में बदल जाना अपवाद नहीं है. कभी राजकपूर देह को ग्लैमर के नाम पर दिखाते रहे. तो कभी यश चोपड़ा के लिए हिरोइनें सफेद साड़ी में भीगने या बिकनी पहनने को तैयार होती रहीं.

किसी सामर्थ्यवान व्यक्ति या बैनर (निजी या प्रोफेशनल कैसे भी) से जुड़ने का फर्क ही एक हिरोइन को संस्कारी और घरेलू बनाए रखता है जबकि अपने बूते उसी लीक पर चलने वाली दूसरी लड़कियां फूहड़ और बी या सी ग्रेड में कास्ट कर दी जाती हैं.

मल्लिका शेरावत की ‘ख्वाहिश’ और ‘मर्डर’ जब 2003-04 में आई. ठीक उसी समय प्रियंका चोपड़ा ‘अंदाज’ और ‘ऐतराज’ में खूब अंगप्रदर्शन कर रही थीं. मगर उस दौर में सिर्फ मल्लिका के लिए अश्लील चुटकुले बने.

जिनके पीछे एक बड़ा कारण उनके पास विश्व सुंदरी का ठप्पा या सुपर स्टार हीरो न होना था. नीचे दिए गए इस गाने को गौर से सुन लीजिए और इसमें कास्ट हुए हीरो और हिरोइनों के बारे में आज समाज में क्या इमेज बनी हुई है, खुद सोचिए.

कैसे बदली सनी की इमेज? 

सनी लियोनी ने अपनी मर्जी से खुद को फिल्मों में ऑब्जेक्टिफाई किया और सफल हुईं. फर्स्टपोस्ट को पिछले साल दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने ये बात कही भी थी.

सनी को इस बात का क्रेडिट मिलना चाहिए कि उन्होंने 5 साल के छोटे समय में अपनी इमेज को बदल डाला. आज वो फैंस के बीच में किसी दूसरी फिल्म स्टार की तरह ही स्वीकार की जाने लगी हैं.

हालांकि इसमें उनकी गोरी चमड़ी और एक्सेंट वाली अंग्रेजी का भी बड़ा हाथ है. इन दो चीजों के होने का फायदा तो हर हिंदुस्तानी को पता है.

अगर सनी भी सिल्क स्मिता की तरह दक्षिण भारत के अंग्रेजी न बोलने वाले किसी परिवार से आई होतीं तो क्या पूरा हिंदुस्तान उन्हें इसी तरह गूगल कर रहा होता?

एक समाज के तौर पर हम अंग्रेजी बोलने वाली साफ रंग की महिलाओं से इतना ऑबसेस्ड हैं कि ऐसी तमाम हत्याओं को भी राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा बना देते हैं.

मीडिया में महीनों तक सबसे बड़ी खबर के तौर पर छाए रहने वाले तमाम मर्डर केस देख लीजिएगा. साफ रंग और साफ अंग्रेजी बोलना हर जगह मौजूद होगा.

खैर बात निकली है और सनी लियोनी की निकली है तो दूर नहीं बहुत दूर तक जा सकती है. चूंकि सनी के बर्थडे के नाम पर उनकी कुछ खास तस्वीरें दिखा देना तो हमारा मकसद है नहीं.

इसलिए अंत में बस इतना ही, मल्लिका शेरावत के अपनी मर्जी से बिना किसी गिल्ट के दिए गए चुंबनों के बाद, हिंदी सिनेमा की तमाम पारिवारिक फिल्मों में लिपलॉक आम हो गया.

सनी के आने के बाद राधिका आप्टे जैसी प्रतिभावान अभिनेत्रियों का स्वेच्छा से न्यूड होना काफी हद तक एक्सेप्ट कर लिया गया.

हो सकता है कि कुछ दशक बाद कोई कपूर, खान या चोपड़ा सरनेम वाली हीरोइन सनी लियोनी की बायोपिक में काम भी करती दिखे. तब तक सुनिए ‘बेबी डॉल मैं सोने दी’.

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