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Exclusive : करण जौहर का 'स्टूडेंट' अब बन गया है 'जेंटलमैन'

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपनी फिल्म जेंटलमैन से लेकर अपनी जिंदगी के कुछ खास पहलूओं पर हमसे बात की है

Bharti Dubey Updated On: Aug 27, 2017 11:59 PM IST

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Exclusive : करण जौहर का 'स्टूडेंट' अब बन गया है 'जेंटलमैन'

सिद्धार्थ मल्होत्रा इस बात से सहमत हैं कि फिल्म उद्योग में भाई-भतीजावाद यानी नेपोटिज्म होता है. लेकिन ये फिल्म इंडस्ट्री के बच्चों के लिए सिर्फ शुरुआत में ही मदद करता है. इसके बाद उन्हें परफॉर्म करना पड़ता है. सिद्धार्थ प्रयोग करना पसंद करते हैं इसलिए उनकी दो फिल्में एक जैसी नहीं होती. अभिनेता की नई फिल्म जेंटलमैन सामने आ गई है. उन्होंने इस फिल्म, अपनी अभिनेत्रियों और आगे की योजना पर बात की..

आपको लड़कियां कितनी बार 'जेंटलमैनकहती हैं?

मैंने उन्हें कई बार कहते सुना है, ''वह अच्छा लड़का है''- ये ऐसी चीज है जो गौरव फिल्म में अक्सर सुनता है. नाइस और जेंटलमैन, मैं सोचता हूं कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. किसी लड़की ने आज तक ये नहीं कहा कि मैं बदतमीज हूं. इसलिए ये सकारात्मक है.

तो क्या आप दोहरी जिंदगी या दोहरे किरदार वाले एक लड़के का रोल कर रहे हैं? और राज व डीके के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

यह फिल्म एक्शन कॉमेडी है. यहां मैंने दो अलग-अलग भूमिकाओं को पर्दे पर उतारा है. फिल्म के एक्शन और कॉमेडी पर राज और डीके के मिजाज की छाप है. मेरा मानना है कि हमने एक्शन कॉमेडी में नयापन लाया है क्योंकि जो आपने पहले देखा है कि वो शोरपूर्ण और तमाशा था. हमने इसे वास्तविक और स्टाइलिश रखा है. राज और डीके पहले के मुकाबले इस बार ज्यादा खुले हैं. इसलिए ये बोनस है क्योंकि मुझे दो भूमिकाएं मिली है. क्या वो बहुत ज्यादा सिद्धार्थ की तरह है?

क्या गौरव सिद्धार्थ की तरह है?

ऐसा नहीं लगता कि गौरव में सिद्धार्थ जैसा कुछ है, वो मियामी में नौ से पांच की नौकरी और पत्नी के लिए खाना बनाने का ख्वाब देखता है. उसे अपने बच्चों के लिए मिनीवैन मिल गई है और अपने किचन को लेकर एक्साइटेड है. मैं ये चीजें हासिल करने के बारे में नहीं सोचता हूं. वास्तव में, सेटल होने का मेरा कोई इरादा नहीं है, इसलिए मैं खुद को उससे जुड़ा हुआ नहीं  पाता. हालांकि लोग गौरव को शांत मानते हैं, दूसरा चरित्र ऋषि भी ऐसा ही है- चूंकि  वो ज्यादा चिंतन करता है, इसलिए वो अकेला और आक्रामक है. जो लड़का एक्शन करता है, बाइक चलाता है और लेदर की जैकेट पहनता है, वो भी शांत हो सकता है.

ऐसा नहीं लगता कि आप कॉमेडी करके खुश होते हैंफिर भी आपने इस तरह की फिल्म की...

ये एक अलग तरह की कॉमेडी है- यह मेरी संवेदनशीलता के अनुरूप है. इसके अलावा,  मैं ऐसा कोई रोल नहीं कर सकता, जिसमें कोई कहानी न हो. हंसे तो फंसे कॉमेडी फिल्म थी, तो ऐसा नहीं है कि मैंने पहले कॉमेडी फिल्में नहीं की है. कपूर एंड सन्स में भी हंसाने वाले सीन्स हैं. मैं परिस्थितियों के हिसाब से कॉमेडी चाहता हूं और इसमें वही है. इस फिल्म में कई रोचक किरदार हैं, जिन्हें मैं प्यार करता हूं. एक्शन पर भी मुझे अच्छी प्रतिक्रिया मिली है और हर कुछ सालों पर मैं एक्शन फिल्म करना चाहूंगा. ये एक ऐसी शैली है जिसे करना मुझे भाता है और मुझे देखना भी अच्छा लगता है.

आप और जैकलिन का व्यक्तित्व अलग-अलग हैतो आपने सेट्स पर सौहार्दपूर्ण माहौल कैसे बनाया?

अगर आप जैकलिन से पूछेंगे तो वो बताएगी कि मैं पूरी तरह शांत नहीं रहता था. मुझे लगता है कि लोग इंटरव्यू के आधार पर मेरे वास्तविक व्यक्तित्व को लेकर भ्रमित हो रहे हैं. इंटरव्यू के दौरान मैं शांत रहता हूं, मुझे नहीं पता क्यों- फिल्म के पोस्टर की तरह ये दोहरे व्यक्तित्व का मामला हो सकता है. जैकी बात करने से भी अधिक बहुत कुछ है, उसकी एक हंसती हुई सुखी जिंदगी है. वो जान-बूझकर खुश और सकारात्मक रहने की कोशिश करती है, वो तनाव नहीं दिखाना चाहती, जो कि अद्भुत क्षमता है.

उसके साथ रहने का अनुभव शानदार है, या आप उसके साथ काम कर रहे हैं या फिर सोशलाइजिंग कर रहे हैं. वो सेल्फ-मेड पर्सन है और वास्तव में कड़ी मेहनत करती है. मुझे जैकी के साथ काम करने में मजा आया. वो फिल्म में स्वाभाविक है और जो किरदार उसने निभाया है, वो उसकी वास्तविक जिंदगी के काफी करीब है. लोग ट्रेलर देखकर अच्छी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और अच्छा है कि लोग पर्दे पर हमारी दोस्ती को सकारात्मक तरीके से ले रहे हैं.

आप हमें अपनी दूसरी फिल्म इत्तेफाक के बारे में बताइए.

इत्तेफाक एक क्सालिक मूवी है- मर्डर मिस्ट्री वाली इस फिल्म का निर्देशन यश चोपड़ा जी ने किया था, ये 1969 में बिना गाने वाली पहली फिल्म थी. हम अपना सम्मान इस अर्थ में जता पाएंगे कि इसको कितना अडेप्ट किया है- यह सिर्फ फ्रेम-टू-फ्रेम फिर से बनाने का मामला नहीं है. नए किरदार जोड़े गए हैं और सिचुएशन भी बदली गई है, यप पहले जैसा सेट नहीं हो सकता है. यहां तक कि जो किरदार मैंने निभाया है या सोनाक्षी ने प्ले किया है वो नंदा जी और राजेश खन्ना जी से मिलता-जुलता नहीं है.

हमारे लिए फायदे की बात ये है कि हमारी पीढ़ी के अधिकतर लोगों ने फिल्म पहले नहीं देखी है. वास्तव में, मैंने अब तक वो फिल्म नहीं देखी. मेरे निर्देशक ने कहा है कि अगर तुमने पहले मूवी नहीं देखी है तो अब मत देखो. इसमें मर्डर मिस्ट्री की शैली को फिर से लाने का उत्साह है जो आजकल कोई नहीं बनाता है. और यह एक स्वच्छ, शुद्ध मर्डर मिस्ट्री है जहां बातचीत और पूछताछ होती है. फिल्म में मेरे और सोनाक्षी के बीच कोई रोमांस नहीं है, हम अनूठे तरीके से किरदार भूमिका निभा रहे हैं.

जैकलीन से सोनाक्षी किस तरह अलग है?

दोनों बहुत अलग हैं. मैं पहली बार सोनाक्षी के साथ काम कर रहा हूं. इसलिए अभनिय को लेकर ये बहुत गहन था. मुझे फिल्म दिलचस्प लगी क्योंकि मैं पहली बार किसी के साथ रोमांस नहीं कर रहा हूं और फिल्म में कोई गीत नहीं हैं. यहां सिर्फ किरदार और कहानी है. लोगों ने मुझे या सोनाक्षी को इस अवतार में पहले नहीं देखा है. सोनाक्षी शानदार कलाकार हैं. दर्शकों को नया अनुभव देना हमेशा एक अभिनेता के लिए रोमांचक होता है.

क्या भूमिकाओं और किरदार के साथ कुछ अलग करने का यह प्रयास जान-बूझकर है?

यह प्रयास जान-बूझकर है कि आप पिछली दुनिया और किरदारों से हमेशा कुछ अलग करें. मेरी कोई दो फिल्में एक जैसी नहीं दिखती और मैं इसका आनंद उठाता हूं. मेरा मानना है कि अगर मैं फिल्म इंडस्ट्री में कम उम्र में आया हूं तो मुझे दर्शकों के सामने कुछ नया पेश करना चाहिए.

मेरा लक्ष्य नया कंटेट देना और कारोबारी हित को बरकरार रखना है. मैंने अब तक जितनी फिल्में की हैं उनका व्यावसायिक पक्ष मजबूत है, सिर्फ बार-बार देखो को छोड़कर जहां हम दर्शकों से जुड़ने में विफल रहे, लेकिन वहां भी संदेश अच्छा था.

क्या आप जान-बूझकर स्टेज शो और अवार्ड फंक्शन से दूर रहते हैं?

ज़रुरी नहीं. मैंने दो साल तक थोड़ा-बहुत किया. इसके अलावा, मैं व्यस्त रहा हूं. इसका मतलब ये नहीं है कि मैं आराम से नहीं हूं, यह सिर्फ इसलिए है कि ये शो व्यवस्थित रूप से हुए. मैं फिल्मफेयर पुरस्कारों में जाता हूं क्योंकि मैं जितेश के नजदीक हूं, लेकिन अन्य पुरस्कार आपके धैर्य का परीक्षण लेते हैं.

क्या 'स्टूडेंटबड़ा हो गया है या वो अब भी करण जौहर से सलाह लेता है?

स्टूडेंट बड़ा हो गया है और अब उसकी अपनी समझ है. फिर भी करण यहां हैं. इसके बाद भी आपने पांच साल तक काम किया है, आपने सहज ज्ञान का विकास कर लिया है. वैसे भी, सभी निर्णय मेरे थे. करण ने हमें कभी मजबूर नहीं किया - या मैं रहा हूं या दो अन्य अभिनेता. फिल्म इंडस्ट्री को समझने का एक शुरुआती चरण होता है जो अब खत्म हो चुका है. अब समय परफॉर्म करने का है.

क्या आप वैरागी हैं?

मेरे पास मेरे लोगों का समूह है जिनके साथ मैं समय व्यतीत करता हूं, लेकिन मैं अपने आप में बहुत कुछ कर सकता हूं और मुझे वास्तव में ऐसा पसंद है.

फिल्म निर्माण का कोई विभाग जिससे आप भविष्य में जुड़ना चाहेंगे?

मुझे प्रोडक्शन और निर्देशन की प्रक्रिया पसंद है. मैं स्क्रिप्ट में अपना नाम जोड़ना चाहता हूं, जो हर अभिनेता के लिए क्रमिक प्रगति है.

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