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सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स, क्या छिपाती और क्या बताती है?

पूरी फिल्म में सचिन के निजी जीवन को उनके काम से ज्यादा तवज्जो दी गई है.

Anna MM Vetticad | Published On: May 27, 2017 04:50 PM IST | Updated On: May 27, 2017 05:03 PM IST

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सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स, क्या छिपाती और क्या बताती है?

एक शख्स जो 24 साल तक खेल के मैदान पर रहा हो, जिसकी हर छोटी-बड़ी बात पर दुनिया भर की क्रिकेट मीडिया और क्रिकेट के दीवाने के अलावा उसके अपने देश की पैनी नजर रही हो, जिसका अंतरराष्ट्रीय करियर अब भी लोगों के दिलो-दिमाग में तरोताजा है, उसके बारे में क्या ऐसी कोई बात कह पाना संभव है जिसे उसके चाहने वाले या फिर पत्रकार पहले से न जानते हों?

क्या उसके पीछे या उसके खेल के पीछे पागल किसी दर्शक के लिए आप ऐसी चीज पेश कर सकते हैं जिसमें वह डूब जाए?

सचिन तेंदुलकर पर बनने वाली किसी भी फिल्म को इन दोनों सवालों से जूझना पड़ता है, वह चाहे फीचर फिल्म हो या कोई डॉक्यूमेंट्री. लगता है कि जेम्स एर्सकिन की डॉक्यूमेंट्री ड्रामा ‘सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स’ को शायद इन दोनों सवालों की चुनौती का अहसास था. इसमें क्रिकेट के जार्गन्स यानी तकनीकी शब्दों का ज्यादा इस्तेमाल नहीं है. इसलिए वे लोग भी इसके साथ खुद को अच्छी तरह जोड़ पाते हैं जिनमें क्रिकेट का कीड़ा नहीं है.

Sachin

यह फिल्म उन लोगों का भी मनोरंजन करती है जो सचिन के फैन नहीं है, बल्कि अकादमिक जिज्ञासा से फिल्म को देखने पहुंचे हैं. यह ऐसे जाने पहचाने लम्हों से भरपूर है, जो इस महान क्रिकेटर के चाहने वालों के दिल को छू जाएंगे. यह आपको ऐसी पीआर कवायद नजर नहीं आती जिसका मकसद सचिन के अपार प्रशंसकों की भावनाओं से फायदा हासिल करना हो.

विवादों पर खामोश यह फिल्म सीधे सादे तरीके से कई जगह इंसान के तौर पर सचिन के कुछ अंजान पहलुओं को सामने रखती है, उन्हें सही या गलत के खांचे में रखे बिना. यह बेहद सफाई से बनाई गई फिल्म है जो तेंदुलकर को लेकर मौजूद राष्ट्रीय जनभावनाओं के विपरीत कोई बात कहने का जोखिम नहीं उठाती. उन सब विवादित पहलुओं पर पूरी तरह पर्दा डालती है, जो इस क्रिकेट स्टार की पेशेवर जिंदगी से जुड़े रहे. फिर भी, यह काम इतनी चतुराई से किया गया है कि आपको कुछ भी अटपटा नहीं लगता.

विवादित बातों को शायद इसलिए नहीं छुआ गया है ताकि इस प्रोजेक्ट के साथ सचिन को जोड़ने में कोई दिक्कत ना आए. इसके बावजूद एक फिल्मकार के तौर पर यह एर्सकिन की काबलियत ही है कि सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स पिछले साल बॉलीवुड में भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के जीवन पर बनी फिल्म ‘अजहर’ और महेंद्र सिंह धोनी पर बनी ‘एमएस धोनी : द अनटोल्ड स्टोरी’ से कहीं बेहतर नजर आती है.

Sachin-Tendulkar-Wankhede-Stadium

‘सचिन: ए बिलियन ड्रीम्स’ में आपको शुरू से लेकर आखिर तक की कहानी सिलसिलेवार तरीके से नहीं दिखाई जाती. सचिन के शानदार बचपन से लेकर रिटायरमेंट और उनके मौजूदा समय तक के सफर को समेटने वाली इस फिल्म में बीच-बीच में सचिन अपनी कहानी कहते दिखते हैं. दूसरे लोग भी उनसे जुड़े अनुभव बताते हैं तो कभी-कभी मैच के दृश्य नजर आते हैं. इसमें फाइल फुटेज और पुराने तस्वीरें इस्तेमाल की गई हैं.

सुनील गावस्कर, विवियन रिचर्ड्स, रवि शास्त्री और विराट कोहली जैसे क्रिकेट के बहुत सारे नए और पुराने मेगास्टार्स के अलावा सचिन के भाई अजित तेंदुलकर, उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर, कमेंटेटर हर्षा भोगले और पत्रकार बोरिया मजुमदार उनके बारे में अपने अनुभव और ख्यालात साझा करते हैं. इस फिल्म में दिग्गज फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जिनका क्रिकेट से नाता नहीं है. यहां उन्हें देखना थोड़ा अजीब लगता है.

अनुत्तरित सवाल

फिल्म को आगे-पीछे एर्सकिन और उनके एडिटर अवधेश मोहला ने अच्छी तरह पेश किया है. इसके साथ ए आर रहमान के संगीत की धमक भी है, जो फिल्म के सबसे दमदार पहलुओं में से एक है. फैमिली एलबम और सचिन और उनके भाई-बहनों का किरदार निभाने वाले अभिनेताओं के जरिए हम उस प्रतिभाशाली बच्चे से मिलते हैं, जो अपने परिवार के भरपूर समर्थन, रमाकांत अचरेकर की अच्छी ट्रेनिंग और अपने दम और जुनून से उन ऊचाइयों को छूता है जहां आज हम उसे देखते हैं.

sachin

हालांकि उनकी कहानी का एक बड़ा हिस्सा हम सबको पहले से ही पता है, लेकिन फिर भी एर्सकिन की यह फिल्म आपको बांधे रखती है. यहां पर यह कहना जरूरी है कि तमाम घटनाओं को लेकर हम यहां सचिन का नजरिया देखते हैं. क्रिकेट के मैदान पर जाते हुए फिल्म पूरी तरह उनकी नेकदिली को ही पेश करती नजर आती है. उसे सचिन में कोई खोट नहीं दिखता.

देश की क्रिकेट टीम के कप्तान के तौर पर सचिन की पहली पारी खासी मुश्किलों से भरी रही. साफ तौर पर इसके लिए मोहम्मद अजरुद्दीन को पूरी तरह जिम्मेदार माना जाता है. यह बात सच भी हो सकती है लेकिन फिल्म में अजहर की तरफ से बोलने वाला कोई नहीं दिखता.

सचिन का मूल्यांकन भी यहां होना चाहिए. हो सकता है अजहर का दोष हो, लेकिन ऐसा भी तो संभव है कि उस समय टीम का नेतृत्व करने के लिए सचिन ही पूरी तरह काबिल न हों. ना यह सवाल किसी ने पूछा और न ही इसका जवाब दिया गया.

बेहतर होता अगर..

इसी तरह फिल्म में सचिन के उन दिनों का भी कोई जिक्र नहीं है जब उन पर आरोप लगे कि वह टीम की जीत से ज्यादा अपने निजी रिकॉर्डों के लिए खेलते हैं. कहा जाता है कि उन दिनों उनके बनाए रन टीम की जीत के लिए कम और उनके नाम नए-नए रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए ज्यादा होते थे. मैं एक सेकंड के लिए भी यह नहीं कह रही हूं कि यह सच था. फिर भी यह ऐसा मुद्दा है जिसे क्रिकेट देखने वालों को उठाना चाहिए और इसीलिए इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

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मैं कम से कम एक ऐसे न्यूजरूम में रही हूं जहां सचिन के रवैए पर सवाल उठाने वाले एक रिपोर्टर को संपादक ने यह कहकर चुप करा दिया था, 'लेकिन हम यह नहीं पूछ सकते क्योंकि यह बात जनता के मूड के खिलाफ जाती है.'

मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि दूसरे संपादकों ने भी और लोगों के सुर में सुर मिलाने और टीआरपी हासिल करने के लिए ऐसा ही किया होगा. अगर फिल्म ऐसे चुभने वाले सवालों से किनारा ना करती तो यह कहीं ज्यादा सम्मान की हकदार बनती.

Sachin Poster

इस सब बातों से परे, सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स उनके निजी जीवन को बहुत मजेदार तरीके से सामने रखती है.

फिल्म में एर्सकिन का सबसे इंटेलीजेंट पल उस वक्त आता है जब सचिन बताते हैं कि उनकी पत्नी ने परिवार की खातिर बतौर डॉक्टर अपना करियर छोड़ा. फिल्म में सचिन को साफ तौर पर कहते दिखाया गया है कि अंजलि ने उन्हें बताया कि वह अपना करियर छोड़ना चाहती हैं. अगले ही सीन में अंजलि खुद याद करती है कि सचिन ने उनसे कहा था कि दोनों में से किसी एक को अपना करियर छोड़ना पड़ेगा.

बेशक हम सब जानते हैं कि अपना करियर छोड़ने की बात तो वह नहीं ही कर रहे थे. आगे फिल्म में एक जगह सचिन खुद ही कहते हैं कि उन्हें एक ऐसी जीवनसाथी की तलाश थी जो पूरी तरह उनके सपनों को समझे. फिर अंजलि भी बताती हैं कि बाल रोग विज्ञान में एमडी होने के बावजूद उन्होंने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ दी.

यहां हमें देखने को मिलता है कि सचिन पितृसत्तात्मक व्यवस्था से कुछ अलग नहीं हैं. जहां एक व्यक्ति परिवार में अपने सपनों और लक्ष्य को हर किसी से ऊपर रखता है. बढ़िया तरीके से एडिट की गई इस फिल्म में इस बात पर ज्यादा जोर नहीं दिया गया है, लेकिन जिस तरह उन बाइटों को एक साथ रखा गया है, वह बहुत कुछ बयान कर देता है.

अंतरराष्ट्रीय नायक

पूरी फिल्म में सचिन के निजी जीवन को उनके काम से ज्यादा तवज्जो दी गई है. उनके बचपन की तस्वीरें और तब से लेकर आज तक की घर की वीडियो फुटेज बहुत ही आकर्षक हैं. अंजलि के साथ उनके रोमांस को बड़े ही प्यारे और मजाकिया अंदाज में बयान किया गया है. सचिन को अपने जीवन के अंतरंग पलों की बातें करते देखना बेहद आनंदित करता है.

Sachin Film Poster

सचिन : ए बिलियन ड्रीम्स एक ऐसी फिल्म है जो आपको लगेगा कि वैसी नहीं है जैसी कई मोर्चों पर हो सकती थी, फिर भी यह उससे कहीं ज्यादा है, जितनी दिखाई पड़ती है. यह पूरी तरह एक जीवनी नहीं है, जो उनके जीवन को बिना लाग लपेट हमारे सामने रखती हो. फिर भी शुक्र है कि यह सचिन के स्तुतिगान से भी बहुत-बहुत दूर है.

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क्रिकेट के प्रशंसकों की इस पर अपनी राय होगी, लेकिन मुझे तो खेल से कोई मतलब नहीं है. मैं तो बस सिनेमा की परवाह करती हूं. मैं यह फिल्म देखकर जब थिएटर से निकली तो थोड़ी सी भावुक और बहुत अधिक प्रेरित थी.

बेशक सचिन तेंदुलकर कोई संत नहीं हैं. आप कितने लोगों को जानते हैं जो संत हैं? फिर भी यह असंभव है कि आप जेम्स एर्सकिन की बनाई इस सच्ची जीवनगाथा से कुछ न सीखें. उस 16 साल के लड़के से न सीखें जिसने अपनी प्रतिभा को अद्वितीय और रिकॉर्ड ध्वस्त करने वाले शानदार करियर में तब्दील कर दिया. इसी ने उनको आज एक अंतरराष्ट्रीय नायक के मुकाम तक पहुंचाया है.

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