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साम दाम दंड भेद : सास बहू के ड्रामा के बीच अलग लीग पर चलता एक उम्दा शो

स्टार भारत के प्राइम टाइम शो 'साम दाम दंड भेद' को दर्शकों का मिल रहा है प्यार

Rajni Ashish Updated On: Sep 16, 2017 08:56 PM IST

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साम दाम दंड भेद : सास बहू के ड्रामा के बीच अलग लीग पर चलता एक उम्दा शो

स्टार भारत पर हाल ही में प्राइम टाइम पर शुरू हुआ शो 'साम दाम दंड भेद' अपनी अद्भुत कहानी की वजह से दर्शकों के बीच पॉपुलर हो रहा है. एक अर्से बाद सास बहू के ड्रामे, भूत, सांप और मक्खी की कहानियों के बीच दर्शकों को उनके करीब की कोई कहानी छोटे पर्दे पर देखने को मिल रही है. पहले पहल देखने पर महिला नायिकाओं के इर्द गिर्द रचे टीवी के इस चक्रव्यूह में साम दाम दंड भेद पुरुष नायक की कहानी लिए अभिमन्यु समान दिखाई देता है. इस शो से चैनल और निर्माताओं ने मौजूदा टीवी शोज की लीग से अलग हटकर कहानी दिखाने का बहुत बड़ा जोखिम उठाया था, लेकिन शो को मिल रहे दर्शकों के प्यार ने ये साबित कर दिया है कि भेड़चाल से अलग हटकर अगर कुछ क्रिएट किया जाए तो उसे जरूर पसंद किया जाएगा.

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क्या है 'साम दाम दंड दंड भेद ?

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उत्तर भारत के एक काल्पनिक शहर 'कौशलपुर' की पृष्ठभूमि वाले ‘‘साम दाम दंड भेद‘‘ में आज के समाज की स्याह सच्चाई और भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था उभरकर आती है. 'साम दाम दंड भेद' एक दयालु आत्मा वाले अपने लक्ष्य से भटके हुए एक युवक विजय नामधारी की कहानी है. विजय आज के निर्भीक, लाज-रहित युवा जगत का बेहतरीन उदाहरण है, जिन्हें ये तक पता नहीं कि जिंदगी से वो क्या चाहते हैं? शाकुंतलम टेलीफिल्म्ज द्वारा निर्मित 'साम दाम दंड भेद' एक युवक विजय नामधारी की ऐसी असाधारण कहानी है, जिसके पास कुछ नहीं है, लेकिन वो सब कुछ जीतने का माद्दा रखता है.

इस शो में दिखाया गया है कि कैसे एक भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था में कैसे एक सच्चा समाज सेवी (विजय का बड़ा भाई प्रभात) और उसका परिवार फंस कर रह जाता है. कैसे एक युवा उत्साही व्यक्ति (विजय) राजनीतिक खेल में फीनिक्स पक्षी की तरह उभरकर सामने आता है. अपने परिवार की खातिर वह वास्तविक राजनीति की दुनिया में प्रवेश करने का फैसला करता है. अपने मृत भाई का आवरण ओढ़कर वह थोड़े ही समय में देश का नेता बनकर अपने तरीकों में सुधार कर लेता है. शो के नाम को सार्थक करता विजय चार तरीकों ‘साम -हाथ पैर जोड़कर, दाम -पहली बार असफल होने पर काम करवाने के लिए रिश्वत का सहारा लेकर, दंड- डराकर तथा भेद- दुश्मनों का राजफाश करके उनपर विजय पाना. यह शो सत्ता पाने के लिए कुछ लोगों द्वारा अपनाए जा रहे खतरनाक खेल के अलावा पारिवारिक बंधन के महत्व की बात करता है. इस शो में प्रेम,परिवार और मित्रता, अपराध और भ्रष्टाचार सभी का पुट दिखाई देता है.

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शो के बारे में निर्माता द्वय श्यामाशीष भट्टाचार्य और नीलिमा बाजपेयी ने बताया कि ‘‘साम दाम दंड भेद‘‘ की अवधारणा प्रत्येक भारतीय घर से मेल खाती है, जिसमें कोई भी किसी भी सीमा तक जा सकता है तथा अपने परिवार की खुशी के लिए अपने जीवन के सुखों का त्याग कर सकता है. साम दाम दंड भेद में ये भी कहा गया है कि हम सभी के अंदर शक्ति है, हमें केवल इसके बारे में जागरूक रहने की जरुरत है. इस शो में एक ऐसे शोषित व्यक्ति की कहानी कही जाएगी जो एकदम नीचे से आया है और जिसके पास कुछ भी नहीं है. वह इतना पा लेता है, जिसके बारे में उसने सपने में भी नहीं सोचा था. उसकी यह यात्रा उसके मिजाज, उसके संबंधों की परीक्षा लेगी, उसे त्याग करने को कहेगी, उसे अलग से सोचने के लिए मजबूर करेगी. लेकिन, यदि कोई ठान ही ले तो जीत उसी की होगी. उन्होंने कहा कि इसे वास्तविकता प्रदान करने के लिए हमारी टीम बहुत पसीना बहा रही है और हमें पूरा विश्वास है कि यह शो दर्शकों की सही नब्ज पकड़ने में कामयाब होगा.

क्यों पसंद आई 'साम दाम दंड भेद' की कहानी ?

कहानी

शो की अद्भुद कहानी जो छोटे से लेकर बड़े शहरों के परिवारों को खुद से जोड़ती है. युवा समाज सबसे ज्यादा इस कहानी से खुद को जोड़कर देख रहा है क्योंकि उनके पास शो के नायक विजय नामधारी की तरह ऊर्जा तो बहुत है लेकिन उन्हें मालूम नहीं कि इसका सही उपयोग किस दिशा में किया जाए और इसी पशोपेश में कभी उन्हें सही दिशा मिल जाती है तो कभी वो पूरी तरह से भटक जाते हैं. शो आज के भ्रष्ट राजनीतिक व्यवस्था और समाज की काली सच्चाई का भी उम्दा चित्रण जिससे हर कोई रिलेट कर रहा है. कहानी कम्पलीट फैमिली एंटरटेनर है क्योंकि इसमें पारिवारिक मूल्यों से लेकर अपराध और प्रेम कहानी से लेकर मनोरंजन का हर मसाला दिखाई देता है.

कास्टिंग

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यहां शो की कास्टिंग की तारीफ जरूर बनती है. भानु उदय विजय की भूमिका में जान फूंक रहे हैं. इस शो में भानु उदय के भाई के रूप में अक्षय आनंद भी अपने रोल से पूरा न्याय करते हुए दीखते हैं. इसके साथ ही इसमें गिरीश सचदेव विलेन के रूप में पंकज चौधरी की भूमिका में उम्दा एक्टिंग करते हुए नजर आ रहे हैं. शो की चंचल लेकिन संजीदा अभिनेत्री के तौर सोनल वेंगुरलकर भी खूब जंच रहीं हैं.

कमियां

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ये तो जगजाहिर है कि टीवी देखने वालों में सबसे बड़ा वर्ग महिलाओं का होता है जिन्हें सास-बहू ड्रामा और हल्के फुल्के एंटरटेमेंट से भरे शो देखने में मजा आता है ऐसे में उन्हें राजनीति, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे हार्ड हिटिंग सब्जेक्ट से भरा ये शो थोड़ा भारी और डार्क लग सकता है. लेकिन इसके साथ फायदा ये भी है कि शो से इसकी कहानी की वजह से ही टीवी से दूर हो रहे पुरुषों और युवा वर्ग को वापस आने का मौका मिलेगा.

डायलॉग

वैसे तो शो में विजय नामधारी के डायलॉग्स अच्छे लिखे गए हैं लेकिन इसे थोड़ा और अच्छा किया जा सकता है. डायलॉग्स में और वजन और पंचेस डाले जा सकते हैं जिसकी दर्शक उम्मीद भी कर रहे हैं.

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