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महिला प्रधान फिल्मों से क्यों घबरा रहा है बॉलीवुड

नाम शबाना, नूर, फिल्लौरी, मातृ जैसी बड़ी फिल्मों के फ्लॉप होने से अब मेकर्स को पैसा डूबने का डर सता रहा है

Kumar Sanjay Singh | Published On: May 04, 2017 01:07 PM IST | Updated On: May 04, 2017 01:07 PM IST

महिला प्रधान फिल्मों से क्यों घबरा रहा है बॉलीवुड

बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई 'अनारकली ऑफ आरा', 'नाम शबाना', 'बेगम जान', 'नूर', 'फिल्लौरी,'मातृ और 'रंगून' जैसी महिला प्रधान फिल्मों का हश्र देखने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स इन फिल्मों को लेकर काफी मायूस नजर आ रहे हैं. खबरों की मानें तो महिला प्रधान फिल्मों को लेकर अब वितरकों में ज्यादा उत्साह नजर नहीं आ रहा.

इसलिए इन फिल्मों के निर्माताओं के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी हैं. आगामी दिनों में श्रीदेवी की 'मॉम' कंगना रनौत की 'सिमरन, श्रद्धा कपूर की 'हसीना', विद्या बालन की ‘तुम्हारी सुलु' और कीर्ति कुल्हाड़ी की 'इंदु सरकार' जैसी फिल्मों आने वाली हैं. आइए जानते हैं इन फिल्मों की खूबियों के बारे में

मॉम - 7 जुलाई को श्रीदेवी की फिल्म 'मॉम' रिलीज होने वाली है. लम्बे अरसे बाद फिल्मों में वापसी कर रही ये फिल्म सौतेली मां और बच्चों के संबंधों पर आधारित है. फिल्म में नावजुद्दीन सिद्दीकी भी एक महत्वपूर्ण रोल में नजर आएंगे.

इस फिल्म के लिए उनका नया लुक इन दिनों मीडिया में खूब सुर्खियां बटोर रहा है. वापसी कर रही अभिनेत्रियों में श्रीदेवी ही एक ऐसी अभिनेत्री है जिस पर डिस्ट्रीब्यूटर को पूरा भरोसा है. उनकी पिछली फिल्म 'इंग्लिश-विंग्लिश’ ने अच्छा कारोबार भी किया था. वितरकों को उम्मीद है कि श्रीदेवी का क्रेज फिल्म की नैया पार लगाने में कामयाब साबित होगा.

Mom

 

सिमरन- कंगना रनौत वुमन सेंट्रिक फिल्मों के लिहाज से सबसे सेलेबल एक्ट्रेस मानी जाती है. कंगना ने क्वीन और तनु वेड्स मनु जैसी कई फिल्मों में अपना ये दम ख़म दिखाया भी है. लेकिन उनकी पिछली फिल्म 'रंगून' ने उनकी सारी प्रतिष्ठा पर पानी फेर दिया. शाहिद कपूर, सैफ अली खान और विशाल भारद्वाज जैसे नामों के बावजूद कंगना को ही इस फिल्म की नाकामयाबी का जिम्मेदार माना गया.

उनकी अगली फिल्म 'सिमरन' 15 सितम्बर को रिलीज हो रही है. हंसल मेहता निर्देशित इस फिल्म को लेकर कहा जा रहा है कि कंगना ने इस फिल्म में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है. लेकिन हंसल मेहता की फिल्मों के मिजाज और कंगना के मौजूदा बॉक्स ऑफिस स्टेटस को देखते हुए वितरक इस फिल्म से ज्यादा उम्मीद लगाने को तैयार नहीं है.

Kangana-Bloody-Hell

हसीना-द क्वीन ऑफ मुंबई - श्रद्धा कपूर को एक फीमेल डॉन के किरदार में कास्ट करना निर्देशक अपूर्वा लखिया के अति आत्मविश्वास का ही नतीजा है. जबसे फिल्म के पोस्टर और टीजर रिलीज हुए हैं इसे लेकर कारोबारी सर्कल में कुछ ख़ास सुगबुगाहट नहीं दिख रही.

अंडरवर्ल्ड डॉन हसीना पारकर की ये बायोपिक 14 जुलाई को रिलीज हो रही है. अपूर्वा लखिया इस तरह की फिल्मों के मास्टर माने जाते है. हो सकता है श्रद्धा कपूर और उनकी जोड़ी दर्शकों के लिए मनोरंजन के कुछ क्षण जुटा सकें.

shraddha kapoor

इंदु सरकार - शुजित सरकार की फिल्म 'पिंक' के छोटे से रोल में अभिनत्री कीर्ति कुल्हाड़ी ने काफी उम्मीदें जगाई थी. मधुर भंडारकर ने अपने पॉलिटिकल ड्रामा 'इंदु सरकार' में उन्हें कास्ट कर उन पर एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है.

आपातकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित 'इंदु सरकार' कीर्ति से ज्यादा खुद मधुर भंडारकर के लिए काफी अहम है. जाहिर है मधुर ने इस फिल्म में पूरा जोर लगाया होगा. लेकिन क्या कीर्ति कुल्हाड़ी किसी फिल्म को अकेली अपने कंधे पर ढो सकती हैं? ये तो वक्त ही बताएगा.

VidyaBalan

तुम्हारी सुलु - कहानी 2 और बेगम जान की असफलता से साबित हो गया कि विद्या बालन भले ही बॉलीवुड की बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं लेकिन बॉक्स ऑफिस के लिए केवल इतना भर ही काफी नहीं है. विद्या बालन ने अपनी पिछली फिल्मों में जो जलवे दिखाए हैं उसके कारण दर्शक उन्हें रोने-धोने वाले रोल में पचा ही नहीं पा रहे.

1 दिसंबर को रिलीज होने वाली 'तुम्हारी सूलु ' में भी विद्या बालन का रोल कमोबेश 'हमारी अधूरी कहानी ' के उनके ही किरदार से मिलता-जुलता है. अगर फिल्ममेकर्स विद्या बालन के सहारे अपना बेड़ा पार लगाना चाहते हैं तो उन्हें विद्या की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल करना भी सीखना होगा.

समीक्षकों की मानें तो वुमन सेंट्रिक फिल्मों के जरिये फिल्ममेकर्स दर्शकों की नब्ज ही नहीं पकड़ पा रहे जिसकी वजह से ये फ़िल्में घाटे का सौदा साबित हो रही हैं. इसके लिए निर्देशकों को नयी परिभाषा गढ़नी होगी वरना अभिनेत्रियों को फिर से पुराने ढर्रे पर ही चलने के लिए मजबूर होना पडेगा.

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