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संगीत बंधनों को तोड़ता है? रहमान के संगीत कार्यक्रम को देखकर ऐसा तो नहीं लगता!

रहमान के बतौर संगीतकार 25 साल पूरे होने पर लंदन के वेंबले स्टेडियम में कॉन्सर्ट के दौरान कुछ संगीत प्रेमी नाराज हो गए थे

IANS Updated On: Jul 16, 2017 03:01 PM IST

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संगीत बंधनों को तोड़ता है? रहमान के संगीत कार्यक्रम को देखकर ऐसा तो नहीं लगता!

हाल में लंदन में आयोजित प्रसिद्ध संगीतकार ए.आर रहमान के संगीत समारोह से प्रशंसकों का एक बड़ा हिस्सा जब इस बात को लेकर बाहर चला गया कि उन्होंने न सिर्फ हिंदी बल्कि तमिल गाने भी गाएं तो इससे यह बात सामने आती है कि बहुत सारे भारतीय अब भी इस अवधारणा से प्रेरित हैं कि मनोरंजन पूरी तरह ‘पैसा वसूल’ होना चाहिए और उसमें विविधता, विभिन्न संस्कृतियों की झलक बाद की चीजें हैं.

इस विवाद ने इसका भी खुलासा कर दिया कि भारतीय लोग अभी भी भाषा, धर्म और संस्कृति के नाम पर किस तरह से बंटे हुए हैं, वो भी जब वे विदेश में प्रवासियों के तौर पर रह रहे हैं जहां यह अंतर दिखाई नहीं देना चाहिए था.

1992 में शुरू हुआ था रहमान का सफर

ऑस्कर विजेता संगीतकार ए आर रहमान के संगीत जगत में 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आठ जुलाई को लंदन के वेंबले स्टेडियम के एसएसई अरेना में ‘नेत्रु, इंद्रु, नलई’ नामक कॉन्सर्ट का आयोजन किया गया था. रहमान का संगीत सफर 1992 में आई फिल्म ‘रोजा’ के साथ शुरू हुआ था.

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भाषा से संबंधित पूर्वाग्रहों की शिकायतों को दूर करने के लिए उनके ट्रैक सूची को बाद में सोशल मीडिया पर भी डाल दिया गया था जिसमें हिंदी और तमिल गानों का लगभग समान मिश्रण था.

कंसर्ट के आयोजक ह्यू बॉक्स एंटरटेनमेंट और हमसिनी एंटरटेनमेंट के मुताबिक, 16 गाने हिंदी में और 12 गाने तमिल में हैं और एक गाने में तमिल और हिंदी का मिश्रण है.

दिल्ली के एक समाजशास्त्री संजय श्रीवास्तव का कहना है कि रहमान द्वारा ‘तू ही रे’ और ‘जय हो’ जैसे गाने गाए जाने के बावजूद इस गुस्से से ‘भाषाई अंधराष्ट्रवाद’ प्रदर्शित होता है, जिससे यह पता चलता है कि अन्य लोगों में भारतीय की पहचान किस तरह से अलग होती है.

श्रीवास्तव का मानना है कि इस तरह की प्रतिक्रिया एक हद तक भाषाई अंधराष्ट्रवाद को दर्शाता है जो भारत में लंबे समय से चलता आ रहा है, जहां केवल हिंदी को ही भारतीय भाषा समझा जाता है.

उनके विचार में, कंसर्ट का शीर्षक तमिल में था इसलिए यह कहना गलत होगा कि आयोजकों ने कंसर्ट में गए लोगों को धोखा दिया है.

बहरहाल, इस पूरे विवाद में दुनिया भर के कई संगीतकारों व कलाकारों ने रहमान का समर्थन किया है.

संगीतकार विशाल ददलानी ने कहा, ‘संगीत दुनिया की पहली भाषा है. इसे लोगों को एकजुट करने वाली ताकत होनी चाहिए. मैं भाषाई संकीर्णता से ग्रस्त लोगों पर तरस आता है.’

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