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पहरेदार पिया की : शो बंद के लिए शुरू हुयी मुहीम के बाद अब एक एनजीओ ने दायर की शो पर बैन लगाने की याचिका

'पहरेदार पिया की' को बंद किये जाने के लिए हाल ही में मुहीम शुरू की गयी थी. जिस पर स्मृति ईरानी ने एक्शन भी लिया था, अब मुंबई बेस्ड एक एनजीओ ने शो पर बैन लगाने की अर्जी दी है

Rajni Ashish Updated On: Aug 12, 2017 01:03 PM IST

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पहरेदार पिया की : शो बंद के लिए शुरू हुयी मुहीम के बाद अब एक एनजीओ ने दायर की शो पर बैन लगाने की याचिका

सोनी टीवी के कॉन्ट्रोवर्सीयल शो 'पहरेदार पिया की' को बैन करने की मांग थमने का नाम नहीं ले रही.'पहरेदार पिया की' के कंटेंट के खिलाफ दर्शकों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. पहरेदार पिया की में 9 साल के बच्चे और 18 साल की लड़की की शादी दिखाये जाने की पहले से ही जबरदस्त आलोचना हो रही थी. लेकिन फिर सुहागरात और हनीमून वाले सीन के शूट किये जाने की खबर से दर्शकों के एक वर्ग के सब्र का बांध टूट गया. इसके बाद 'पहरेदार पिया की' को बंद कराने के लिए change.org पर एक कैंपेन शुरू की गई जिसमें 1 लाख से भी ज्यादा दर्शकों ने इस शो को बंद करने के खिलाफ स्मृति ईरानी को एड्रेस करते हुए शो को बंद कराने के लिए पिटीशन को साइन किया.

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'पहरेदार पिया की' के खिलाफ चलाये जा रहे मुहीम पर सूचना और प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने एक्शन लेते हुए ब्रॉडकास्ट‍िंग कंटेंट कप्लेंट्स काउंसिल (BCCC) को पत्र लिखा है. स्मृति ईरानी ने BCCC को शो का कंटेंट रिव्यू करने के साथ ही तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा है.

एनजीओ ने शो बैन करने के लिए उठायी आवाज

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अब इस सीरियल को बैन करने के लिए मुंबई के एक एनजीओ ने पुलिस कमिश्नर दत्ता पडसलगीकर और सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी से शिकायत की है. ये एनजीओ मुंबई का है जिसका नाम 'जय हो फाउंडेशन' है. इस एनजीओ के प्रेसिडेंट अफरोज मलिक और जनरल सेक्रेटरी आदिल खत्री ने इस मामले के ऊपर अपना कड़ा रुख जाहिर किया है.

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि 'पहरेदार पिया की' सीरियल में 9 साल के एक बच्चे को अपने से दोगुनी उम्र की लड़की का पीछा करते और उसकी मांग में सिंदूर भरते हुए दिखाया जा रहा है. यहां तक कि हनीमून सीन भी शूट किया जा रहा है. ये सीरियल रात 8:30 बजे सोनी टीवी पर आता है जो कि फैमिली टाइम होता है. इस सीरियल से दर्शकों की मानसिकता प्रभावित होगी. हम सभी इस सीरियल पर बैन चाहते हैं. हम नहीं चाहते कि हमारे बच्चे ये सीरियल देखकर प्रभावित हों'.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने ये शिकायत पास्को एक्ट 2012 के अंतर्गत की है. हमने ऐसा इसलिए किया ताकि सभी सीरियल निर्माताओं के लिए ये एक मिसाल बनें.

एक तरफ सरकार बाल विवाह और बच्चों के यौन उत्पीड़न को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए कई अभियान चला रही हैं तो वहीं हमें इस बात की हैरानी है कि आखिर सेंसर बोर्ड इस तरह के कंटेट को हरी झंडी कैसे दे सकती है.

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