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मिरर गेम्स: फिर चमकने को तैयार हैं गायब हुई अभिनेत्री पूजा बत्रा

पूजा बत्रा की क्राइम थ्रिलर 'मिरर गेम्स' 2 जून को रिलीज हो रही है.

Runa Ashish | Published On: Jun 01, 2017 03:30 PM IST | Updated On: Jun 01, 2017 03:30 PM IST

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मिरर गेम्स: फिर चमकने को तैयार हैं गायब हुई अभिनेत्री पूजा बत्रा

'मैंने भी अपने सायकोलॉजिस्ट के साथ कई सेशन्स किए हैं तो मुझे मालूम था कि सेशन्स कैसे होते होंगे. भारत में ऐसी कोई बात है ही नहीं.' जिंदगी में रिश्तों के उतार चढ़ाव देखने वाली पूजा बत्रा उन अभिनेत्रियों में से हैं जो खुलकर मानती हैं कि उन्हें जिंदगी के एक पड़ाव में सायकोलॉजिस्ट की जरूरत पड़ी थी.

'मिरर गेम्स- अब खेल शुरू' के साथ पूजा एक बार फिर लोगों के सामने आने वाली हैं. इस फिल्म में पूजा एक सायकोलॉजिस्ट बनी हैं. जो पुलिस की मदद करती है ताकि अपराधियों के दिल की बात समझकर क्राइम केस को सुलझाने में मदद हो सके. लेकिन पूजा की मानें तो वो खुद भी ऐसे कई सेशन्स कर चुकीं हैं. उनसे उनकी नई फिल्म के बारे में बात की फ़र्स्टपोस्ट संवाददाता रूना आशीष ने-

फिल्म में आप सायकोलॉजिस्ट का रोल कर रही हैं तो कोई तैयारी की?

तैयारी तो मैंने नहीं की. मैं अमेरिका में रहती थी और वहां पर सायकोलॉजिकल थैरेपी करना कोई नई या आश्चर्यजनक बात नहीं है. हमारे देश में थिरेपी लेने का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं है. मैंने भी अमेरिका में थैरेपी करवाई है तो जब रोल ऑफर हुआ तो लगा कि मैं भी थेरेपिस्ट बन सकती हूं. इस बार क्यों ना मेज के उस तरफ बैठा जाए.

फिल्म का पोस्टर.

फिल्म का पोस्टर.

किस तरह की थिरेपी की बात कर ही हैं आप?

थिरेपी में जहां आपको साइकायट्रिस्ट के सामने बैठकर अपनी समस्याओं को सुलझाना होता है. वो समस्याएं जो आप अपने आप से सुलझा नहीं पा रहे हैं..

आपको क्यों थिरेपी की जरूरत पड़ी?

जिंदगी कभी किसी की भी एक समान नहीं चलती है. हर किसी का हर दिन खुशियां लेकर नहीं आता है. कभी आप खुशी देखते हैं तो कभी दुख भी देखते हैं. कभी आपको अपने मां पिता के साथ तो कभी अपने भाई बहनों के साथ तो कभी आपको अपने साथी के साथ परेशानियां हो सकती हैं. तो जीवन में कई तरह की परेशानियों का हम सामना करते हैं. उन परेशनियों को कोई पहचानना चाहता है तो कोई नहीं चाहता है. तो ये जो थैरेपी होती है ये आपको मदद करती है कि आप कैसे परेशानी से निपट कर इसका हल निकाल सकते हैं.

'मिरर गेम्स' के लीड एक्टर परवीन डबास और एकता कपूर के साथ पूजा.

'मिरर गेम्स' के लीड एक्टर परवीन डबास और एकता कपूर के साथ पूजा.

आपको देखकर लगता है कि आप बहुत बबली किरदार करेंगी. लेकिन ये रोल तो बिल्कुल उलट है.

बस इसीलिए ये किरदार किया. आप हमेशा एक ही तरह के रोल नहीं कर सकती हैं. हर बार बबली रोल नहीं करना था मुझे. मैं कुछ अलग कहना चाहती थी. मैं ये भी सोचती हूं कि अगर कोई कैरेक्टर निभाना मिले तो आपकी ऐक्टिंग में भी कई सुधार या बदलाव आते हैं. वैसे भी मैंने ऐसा रोल और ऐसी फलिम कभी की ही नहीं थी.

आपने बच्चों के लिए भी बहुत काम किया है. वो काम कहां तक पहुंचा है?

वो तो चलते रहने वाला काम है. मैं उन बच्चों के लिए काम करती हूं. जब भी मेरे पास थोड़ा सा समय निकलता है तो मैं उन संस्थानों से जुड़ जाती हूं जो बच्चों के लिए काम करें. मैं अमेरिका में भी अपना काम जारी रखती हूं. ये संस्थान भारत में गरीब बच्चों के लिए काम करती है.

मैंने अभी एक डॉक्यूमेंट्री में भी अपनी आवाज दी थी. नाम था 'सेव हर फ्रॉम द सेक्स ट्रैफिकिंग' जो भारतीय लड़की पर थी. इसमें हैदराबाद की कहानी दिखाई गई है एक लड़की देहव्यापार में फंस जाती है और कैसे वो बाहर निकलती है. मझे ऐसा लगता है कि हम लोगों को लोग सुनते हैं. हमारी बातें सुनते हैं तो हमें भी इन लोगों की मदद में आगे आना चाहिए. ताकि लोगों का ध्यान जाए और इन लोगों की बातें समझें. वैसे भी ये मेरी नैतिक जिम्मेदारी है कि ऐसे काम करके लोगों की मदद करूं.

अब एक सायकोलॉजिकल सवाल- क्या आपकी लाइफ का कोई ऐसा हिस्सा है, जिसे आप दुबारा जीना चाहेंगी?

मैं अपनी लाइफ में बहुत खुश हूं. मैं चाहती हूं कि मेरी जिंदगी में मिस इंडिया बनना या 'विरासत' में काम करना या सफर करते रहना, फिल्म 'वन अंडर द सन' का कान्स जाना और वहां लोगों की तारीफें मिलना, मेरा सोशल काम में जुटना, ये ऐसे काम हैं जो मैं बार-बार करते रहना चाहूंगी.

जिंदगी का कोई ऐसा हिस्सा जिसे मिटा देना चाहती हैं?

मेरे हिसाब से कुछ ऐसे पल हैं जब मैं कुछ लोगों से उतनी दोस्ताना नहीं हो सकी जितनी हो सकती थी. कुछ लोगों और दोस्तों से मिलना छूट गया या फिर मैंने कभी किसी का दिल दुखाया या कभी मेरा दिल दुखा है, काश कि मैं ये लम्हे मिटा पाती.

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