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27 बरस बाद मंच पर गाने आईं चित्रा सिंह, लेकिन खुल न सकें लब

चित्रा ने यह कहकर चौंका दिया कि वह 27 साल बाद माइक पर बोल रही हैं और उनके लिए गाना तो दूर बोलना भी मुश्किल है.

Avinash Mishra Updated On: Apr 16, 2017 04:22 PM IST

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27 बरस बाद मंच पर गाने आईं चित्रा सिंह, लेकिन खुल न सकें लब

दुनिया भर में मशहूर ‘संकट मोचन संगीत समारोह’ का शनिवार शाम शुभारंभ हुआ. हर साल बनारस के संकट मोचन मंदिर में हनुमान जयंती के आस-पास शुरू होने वाले इस 6 दिनी संगीत समारोह का यह 94वां संस्करण है.

देश-दुनिया के प्रख्यात संगीतज्ञ इस मौके पर संकटमोचन के परिसर में अपनी प्रस्तुतियां देते हैं. शाम साढ़े सात बजे से शुरू होकर पूरी रात चलने वाली ये प्रस्तुतियां अगले दिन सूरज की किरणों के साथ समाप्त होती हैं. संगीत रसिकों की एक बहुत बड़ी संख्या इस दरम्यान पूरे माहौल को संगीतमय बनाए रखती है.

इस दफा इस समारोह की शुरुआत हैदराबाद से आईं प्रख्यात नृत्यांगना पद्मजा रेड्डी के कुचिपूड़ी से हुई. उन्होंने सीता-स्वयंवर और उनकी शिष्याओं योगा, तेजस्विनी और ख्याति ने गणेश वंदना को मंच पर पेश किया. अपनी शिष्याओं के साथ मिलकर पद्मजा ने भाषा नहीं अभिव्यक्ति की प्रबलता वाली देवी-शक्ति को भी मंच पर प्रस्तुत किया.

'गाना तो दूर, बोलना भी मुश्किल'

इस समारोह की घोषणा के बाद से ही इसमें प्रसिद्ध गजल-गायक जगजीत सिंह की संगिनी चित्रा सिंह के 27 साल बाद गाने की चर्चाएं फैली हुई थीं. वह तब पधार भी चुकी थीं, जब किराना घराने के ख्याल गायक पंडित विश्वनाथ जयकारे की शक्ल में समारोह को जागरण का लुक देने में लगे हुए थे.

लेकिन जोरदार तालियों और शोर के बीच जब करीब 10 बजकर 30 मिनट पर चित्रा मंच पर आईं तो उन्होंने यह कहकर सबको चौंका दिया कि वह 27 साल बाद माइक पर बोल रही हैं और उनके लिए गाना तो दूर बोलना भी मुश्किल है.

इस पर संकट मोचन मंदिर के महंत विश्वम्भर नाथ मिश्र ने कहा कि अब जो 27 साल से नहीं हुआ वह इस मंच से होगा, हनुमान जी आपसे गवाएंगे. लेकिन चित्रा का गायन मुमकिन नहीं हुआ और ‘जिंदा रही तो फिर आऊंगी...’ यह कहकर मंच से सम्मानित होने के बाद वह श्रोताओं में जा बैठीं.

‘उधर वो हैं कि जाने को खड़े हैं और इधर दिल है कि बैठा जा रहा है...’

चित्रा सिंह की जिंदगी को देखें तो महाकवि निराला याद आते हैं: ‘दुख ही जीवन कथा रही/ क्या कहूं आज जो नहीं कही...’

Chitra singh in Sankat mochan

चित्रा सिंह सम्मान ग्रहण करते हुए.

27 साल से नहीं गातीं चित्रा

कहते हैं कि साल 1991 में अपने 21 साल के बेटे को एक कार दुर्घटना में खो देने के बाद चित्रा सिंह ने गाना छोड़ दिया. जगजीत सिंह ने अपना गम गाकर दूर किया, लेकिन चित्रा सिंह खामोशियों में डूबती चली गईं. 2009 में उनकी पहली शादी से हुई बेटी मोनिका चौधरी ने भी आत्महत्या कर ली और साल 2011 में जगजीत सिंह भी दुनिया छोड़ गए.

इतने सारे गमों को गले लगाए हुए चित्रा की आवाज में एक दर्द और आंखों में नमी के सिवा और कुछ नहीं है. वह पत्रकारों के सवालों से बचती हैं. उन्हें बहुत कुरेदो तब भी आवाज में एक दर्द और आंखों में नमी के सिवा और कुछ नजर नहीं आता.

ahmad husain mohmmad huasin in sankat mochan

उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की जोड़ी.

जयपुर के उस्तादों ने बांधा समां

बहरहाल, चित्रा को सुनने की आस लगाए श्रोताओं के टूटे हुए दिलों को संभालने का काम किया जयपुर से आए उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन की जोड़ी ने.

‘गाइए गणपति जग वंदन...’ से शुरू करके ‘मैं हवा हूं, कहां वतन मेरा...’ तक आने के लिए इस जोड़ी को शिव-स्तुति, दुर्गा-स्तुति और राधे-वंदना से गुजरना पड़ा. उन्होंने कहा कि यह पवित्र मंच है, इसलिए गजल गाना यहां ठीक नहीं लग रहा. इस पर पीछे से आई एक आवाज ने कहा कि पर गुलाम अली आए थे तो उन्होंने गाई थी. इस सवाल को उसके बगल से ही जवाब मिला कि गुलाम अली और इनमें बहुत फर्क है. फर्क शायद मुल्क का है.

जय श्री राम और हर हर महादेव के नारों के बीच इस संगीत समारोह की सारी प्रस्तुतियां शुरू और खत्म हो रही हैं.

कोलकाता से आए उस्ताद निशात खां का सितार-वादन, धारवाड़ के जयतीर्थ मेउंडी का गायन, अफगानिस्तान से आए गुलफाम अहमद खां का रबाब संकट मोचन संगीत समारोह की पहली रात की अन्य प्रस्तुतियां रहीं. पहली रात का समापन बनारस के देवाशीष डे और उनके बेटे शुभंकर डे के गायन से हुआ.

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