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मेरी किताब पर फिल्म बनती है तो लगता है, सपना देख रहा हूं: चेतन भगत

किताब लिखने में कोई खर्च नहीं होता लेकिन फिल्म बनाने में करोड़ों का खर्च आता है

Runa Ashish Updated On: May 18, 2017 07:57 AM IST

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मेरी किताब पर फिल्म बनती है तो लगता है, सपना देख रहा हूं: चेतन भगत

चेतन भगत की काई पो चे, वन नाइट एट ए कॉल सेंटर जैसी पांच किताबों पर बॉलीवुड में फिल्म बनी है. इनमें सबसे हालिया 'हाफ गर्लफ्रेंड' है. इस बार चेतन लेखक के साथ-साथ निर्माता भी बन गए हैं. फ़र्स्टपोस्ट संवादददाता रूना आशीष ने फिल्म की रिलीज से पहले चेतन भगत से बातचीत की.

फ़र्स्टपोस्ट: शब्दों से खेलने वाले जब पैसों की भाषा बोलते हैं तो कैसा लगता है?

चेतन भगत: मैंने बैंक में 11 साल तक काम किया है तो आंकड़ों से मेरी दोस्ती पुरानी है. निर्माता के तौर पर मैंने मोहित को वो सभी चीजें दी हैं जो उसे चाहिए थी ताकि वो सिर्फ फिल्म बनाने में अपना ध्यान दे. मैं खुद शूट लोकेशन पर खड़ा रहता था और सारी बातों की निगरानी करता था. मैं फिल्मों की क्रिएटिव साइड समझता था.

मैंने काफी समय तक बैंक में काम किया है तो मुझे कॉस्ट या पैसे के बारे में भी पता होता था. वैसे भी फिल्में, किताबें लिखने से बहुत अलग होती हैं. किताब लिखने में कोई खर्च नहीं होता है लेकिन फिल्म बनाने में करोड़ों का खर्च आता है. हर बात पर ध्यान देना पड़ता है.

half girlfriend

जल्द रिलीज होने वाली फिल्म हाफ गर्लफ्रेंड का एक सीन

फ़र्स्टपोस्ट: लेखक और निर्माता का डबल रोल था आपके लिए?

चेतन भगत: फिल्म में मुझे ऐसा लगता है कि एक निर्देशक को अपना विजन देने की आजादी होनी चाहिए. एक लेखक के तौर पर मुझमें भी ये परिपक्वता आनी चाहिए कि, अपनी किताब को कोई दूसरे तरीके से दिखाना चाहे तो बुरा ना लगे. किताब में तो मेरी सोच है लेकिन फिल्म में आपको मोहित की सोच भी देखने को मिलेगी.

वैसे भी मेरी किताब में बहुत सारी चीजें है. दिल्ली है. बिहार है फिर न्यूयॉर्क की भी बातें हैं. यह एक किताब है तीन घंटे में इसे दिखा पाना मुश्किल था. तो कहीं काट-छांट हुई तो कहीं सीन को बढ़ाया भी गया.

फ़र्स्टपोस्ट: अब तो निर्देशन की कुर्सी दूर नहीं दिख रही है?

चेतन भगत: मैंने अभी तो निर्माता की कुर्सी संभाला है, तो निर्देशन तो बहुत दूर की बात है. फिल्म निर्माता बनने के बाद भी मेरे पास इतना समय होता है कि मैं घर लौटकर किताब लिख सकूं. निर्देशन में मुझे इतना समय नहीं मिलेगा. वो दिन-रात जुटे रहने वाला काम है. आपको फिल्म के बारे में ही हर वक्त सोचना होता है. तो मुझे नहीं लगता कि मैं हाल फिलहाल कभी निर्देशन के बारे में सोचूंगा.

फ़र्स्टपोस्ट: आप फिल्म के लेखक हैं. जब पहली बार अपनी लिखी दुनिया को आखों के सामने देखते हैं तो कैसा महसूस होता है?

चेतन भगत: जब मेरे सामने अपनी लिखी किताब की कोई फिल्म आती है तो पहली बार में मुझे लगता है कि मैं सपना देख रहा हूं. मैंने एक खाली कागज पर कहानी लिखी. उसमें के किरदारों को बनाया है.

जब मेरे सामने कोई हीरो आता है तो भले ही मैं उसे कई बार देख चुका हूं फिर भी मुझे बहुत अवास्तविक सा लगता है. लेकिन हाफ गर्लफ्रैंड में ऐसा नहीं हुआ इसलिए क्योंकि इसकी शूट पर मैं था. इस फिल्म के बारे में मैं हर तरह से परिचित हूं. मुझे 'टू स्टेट्स' में थोड़ा शॉक लगा था क्योंकि वो फिल्म बनने के बाद मुझे दिखाई गई थी.

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फ़र्स्टपोस्ट: अभी तक आप की 5 किताबों पर फिल्में बनी हैं. क्या राज है जो हर नॉवेल फिल्मवालों को पसंद आ जाती है?

चेतन भगत: मेरी कहानियों की फिल्म इसलिए बनती हैं क्योंकि कहानी जो है वो सारे भारत वासियों से कनेक्ट कर जाती है. यह एक आम भारतीय की कहानी है और फिल्मों को भी ये ही चाहिए होता है.

मेरे लिए यह जरूरी है कि मेरी किताब काम कर जाए. फिल्म तो आप सभी देखते हैं लेकिन मेरी किताब तीन साल पहले आ गई थी. वैसे भी एक सीधी बात यह है कि अगर पिछली फिल्म काम करती है तो कई अगली बार फिल्म बनाने के लिए मेरी कहानी लेगा. जो सफल होगा वही चलेगा.

फ़र्स्टपोस्ट: आपकी एक और किताब वन इंडियन गर्ल को ले कर कंट्रोवर्सी चल रही है. जहां एक लेखिका ने इसे अपनी कहानी से मिलता-जुलता बताया है?

चेतन भगत: मेरे पीछे एक साथ कम से कम 6-7 विवाद चलते रहते हैं. अब यह सब निराधार है. एक लड़की ने कहा कि मेरी किताब में फेसबुक शब्द का इस्तेमाल किया था. आपने भी किया है तो ऐसे में अब मैं क्या कह सकता हूं. मैं इन सब से साफ बाहर आ जाऊंगा. हमारी न्याय प्राणाली का गलत इस्तमाल मत करो.

मैं इतना बचकाना या मूर्खतापूर्ण काम तो नहीं करूंगा कि एक छपी किताब से कुछ चुराऊंगा. एक मिनट में सब साफ मालूम पड़ जाएगा. कोर्ट का भी अपना तरीका है काम करने का. कोर्ट के बंद होने के दो दिन पहले उसने यह केस किया है.

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फ़र्स्टपोस्ट: आपकी किताब 5 पॉइंट समवन अब सिलेबस में पढ़ाई जाती है?

चेतन भगत: देखिए अब एक और विवाद सामने खड़ा है. सारे विवाद फिल्म रिलीज के साथ ही सामने आते हैं. अब एक बात समझने वाली यह है कि ये किताब देश के पॉपुलर फिक्शन साहित्य के बारे में है न कि साहित्य जगत के बारे में. अब छात्रों को आप पॉपुलर फिक्शन में देश की सबसे अधिक बिकने वाली किताब के बारे में नहीं पढ़ाएंगे क्या.

अब इसमें वाद-विवाद करने की क्या बात है. सौ के लगभग प्रोफेसर एक साथ आ कर धरना देते हैं कि कोर्स को फिर से एक बार बनाया जाए. तो क्या पुराना साहित्य या 200 साल पहले लिखा साहित्य ही सही है. नया नहीं अच्छा है क्या.

अब नॉवेल पाठ्यक्रम में रख भी दिया तो क्या हुआ. कोई नोबल थोड़े मिल गया. अब मैं पॉपुलर सिनेमा की बात करूं और सलमान की बात ना करूं तो चलेगा क्या.

फ़र्स्टपोस्ट: आपकी एक और किताब रिवॉल्यूशन 20-20 की भी फिल्म बनने वाली थी?

चेतन भगत: हां, वो बनने वाली थी. हमारी यूटीवी से बातचीत भी चल रही थी लेकिन वह मुमकिन नहीं हो पाया. हमारी डील भी हुई थी लेकिन फिर बात आगे बढ़ी नहीं. डील की मियाद भी खत्म हो गई. फिर मेरे पास उसके राइट्स भी वापस आ गए. अगर सब ठीक रहा तो वो ही मेरा अगला प्रोजक्ट होगा.

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