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Review शेफ : इस 'शेफ' का खाना लजीज है, जाइए आप भी इसे चखिए

इस फिल्म से सैफ अली खान की धमाकेदार वापसी हो रही है. सैफ ने दिल चाहता है में जो किरदार निभाया था ये काफी कुछ वैसा ही है

फ़र्स्टपोस्ट रेटिंग:

Abhishek Srivastava Updated On: Oct 05, 2017 09:08 PM IST

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Review शेफ : इस 'शेफ' का खाना लजीज है, जाइए आप भी इसे चखिए
निर्देशक: राजा कृष्ण मेनन
कलाकार: सैफ अली खान, पद्मप्रिया, मिलिंद सोमन

मुंबई फिल्म जगत में एक बात प्रचलित है कि कौन डायरेक्टर कितना बड़ा है इसका अंदाजा उसकी दूसरी फिल्म से लगाया जाता है. एयरलिफ्ट बनाने वाले राजा कृष्ण मेनन ने इसके पहले अपनी शुरुआत दो फ्लॉप फिल्मों से की थी. उनकी सही मायने में शुरुआत हुई थी फिल्म एयरलिफ्ट से. शेफ देखने के बाद अब ये बात कही जा सकती है कि राजा मेनन का नाम अब ए लिस्ट डायरेक्टर की श्रेणी में शुमार होगा.

सैफ अली खान अभिनीत एक खट्टी-मीठी इस फिल्म में जिसमें इमोशन के वही रंग भरे हैं जिससे आप रोज़मर्रा की जिंदगी में दो चार होते हैं. शेफ एक जमीनी फिल्म है जिसमें आपको अपनी जिंदगी की खुद की झलक भी दिख सकती है. ये फिल्म बाकी लोगों को आईना दिखाती है कि बिना लाउड बैकग्राउंड स्कोर के भी फिल्मों के सीन्स आपके दिल को छू सकते हैं.

यह जमीनी फिल्म उड़ने की कोशिश नहीं करती है और जमीन पर ही रहती है और इसकी सबसे बड़ी खूब यही है. जाइए और जाकर देखिए कि खाद्य मसाले और रिश्ते कड़ाही में जब एक साथ मिलते हैं तो क्या होता है. ये एक बेहद ही सरल फिल्म है जो आपके दिल में जरूर उतरेगी. और हां, सैफ अली खान से बेहतर शेफ और कोई नहीं हो सकता है.

सैफ की धमाकेदार वापसी

देखकर अच्छा लगता है कि सैफ की वापसी फिर से एक बार हुई है और बड़े ही जबरदस्त तरीके से. सैफ कभी भी बुरे एक्टर नहीं रहे हैं लेकिन बॉलीवुड में सफलता का मापदंड सिर्फ और सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों का चलना ही होता है तो सैफ उस पर पिछले कुछ सालों से खरे नहीं उतरे थे. लेकिन शेफ से उन्होंने सारी कसर वसूल ली है. रोशन कालरा के रोल में किसी और को आप देख ही नहीं सकते हैं. सैफ के रोल के बारे में आप यूं समझ लीजिए कि जो किरदार उन्होंने दिल चाहता है में निभाया था वो किरदार अब चालीस साल का हो चुका है यानी जिंदगी को करीब से देख चुका है और बाप बनने के बाद थोड़ा बहुत उसके अंदर अनुभव भी आ चुका है. जिंदगी के खेल में वो थोड़ा पिछड़ने लगा है और जब उसे इस बात का एहसास होता है तब वो एक बार फिर से कमर कस लेता है उसका मुकाबला करने के लिए.

रोशन कालरा की स्टोरी

शेफ की कहानी रोशन कालरा के बारे में है जो न्यूयार्क में शेफ है. एक दिन जब रेस्टोरेंट में एक ग्राहक उसके खाने की बुराई कर देता है तो गुस्से में आग बबूला हो कर अपना हाथ उसके ऊपर उठा देता है. बदले में उसे जेल जाना पड़ता है. वापस आने के बाद उससे कुछ चीजों का एहसास होता है कि वो जिंदगी की लड़ाई हार रहा है. एक ब्रेक के चलते वो अपने बेटे के साथ वक़्त बीतने के लिए कोच्चि चला जाता है. वहां पर वो अपनी पत्नी के घर में ही रहता है जिसके साथ उसका अब तलाक हो चुका है लेकिन रिश्तों में जरा भी खटास नहीं आई है. अपनी खोई हुई धार पाने के लिए वो एक मोबाइल ट्रक में खाना बनाना शुरू करता है. यह ट्रक केरल से दिल्ली तक का रास्ता सफर करता है और इसी बीच वह जिंदगी की सच्चाइयों से दो चार होता है.

'शेफ' के रोल में फिट लगे सैफ

अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान शेफ के रोल में पूरी तरह से फिट बैठते हैं. उनको इस तरह के रोल आग चल कर और करने चाहिए. देख कर लगता है कि निर्देशक ने उनसे मेहनत करवाई है. उनकी पत्नी के रोल में हैं पदमप्रिया जिनका अभिनय बेहद ही उम्दा और सरल है. इसके अलावा मिलिंद सोमन भी एक महत्वपूर्ण भूमिका में है और उनका काम भी काफी अच्छा है. इस फिल्म के कई सीन्स काफी लुभावने बन पड़े हैं.

शानदार सिनेमैटोग्राफी

एक सीन में जब रोशन कालरा अपने मोबाइल ट्रक की शुरूआत करता है तो पहले दिन सभी को फ्री में खाना खिलाने का निर्णय लेता है. भीड़ जब बढ़ जाती है तब उसका बेटा कहता है कि अगर बुरा खाना भी दे दे तो किसी को पता नहीं चलेगा. उसके बाद रोशन अपने बेटे को ट्रक से दूर ले जाकर कैसे समझाता है कि ये गलत बात है, ये बेहद ही भाव पूर्ण सीन बन पड़ा है. उसके अलावा जब रोशन अपनी तलाकशुदा पत्नी को डांस करना सिखाता है तो उससे भी देखने में बेहद मज़ा आता है. ये फिल्म ट्रैवल और फूड का संगम भी है. और इसकी शानदार सिनेमैटोग्राफी सोने पर सुहागा का काम करती है. रघु दीक्षित का संगीत कानों को परेशान नहीं करता है.

डायरेक्टर की करनी होगी तारीफ

शेफ उन फिल्मों की श्रेणी में आती है जो बॉलीवुड साल में एक बार बनाने की कोशिश करता है. 100 साल बॉलीवुड को हो चुके हैं और अधिकतर इस बात को समझना नहीं चाहते हैं कि असली खूबसूरती सिम्पलिसिटी में ही होती है. और इस मापदंड पर ये फिल्म पूरी तरह से खरी उतरती है. इस फिल्म में आपको खाने की वैराइटी, सब्जियां और मसाले देखने को ज्यादा नहीं मिलेंगे क्योंकि यह फिल्म उसके बारे में नहीं है. ये एक शेफ के बारे में है जो अपनी खोई हुई लय पाने के लिए जी तोड़ कोशिश करता है और बदले में रिश्तों की मज़बूती को समझता है. राजा मेनन ने अपनी इस फिल्म के साथ किसी भी तरह से कोई भी समझौता नहीं किया है. शेफ की बेहद ग्लैमरस लाइफ को वो दिखा सकते थे लेकिन वो रास्ता उन्होंने नहीं चुना है. इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही होगी की देखने के बाद आपके चेहरे पर एक मुस्कान होगी.

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