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अब हाशिये पर चली गई है बॉलीवुड की 'सेक्युलर' विचारधारा?

रंग दे तू मोहे गेरुआ...कैसे बन चला है बॉलीवुड का फेवरेट एंथम?

Hemant R Sharma Hemant R Sharma | Published On: Jun 24, 2017 01:10 PM IST | Updated On: Jun 24, 2017 02:28 PM IST

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अब हाशिये पर चली गई है बॉलीवुड की 'सेक्युलर' विचारधारा?

पिछले दिनों सोनू निगम ने मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकरों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की, तो अनुपम खेर कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुए अत्याचारों पर काफी बार नाराज हुए हैं.

अशोक पंडित तो रोजाना बीजेपी के रंग में रंगे टीवी पर बोलते नजर आते हैं. इन सब ने कहीं ना कहीं उन्हीं बातों को कहने की कोशिश की है जिसे आज से कुछ साल पहले तक आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा माना जाता था.

परेश रावल, किरण खेर, स्मृति ईरानी, हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा, मुकेश खन्ना, पहलाज निहलानी, गजेन्द्र चौहान, रवीना टंडन, मधुर भंडारकर, विवेक ओबरॉय और प्रीति जिंटा ऐसे कई नाम है जो अब भगवा ब्रिगेड के साथ हैं.

ये कुछ नाम हैं, लेकिन सिर्फ नाम ही गिनने बैठ जाएंगे तो पता चलेगा कि बॉलीवुड की ब्रिगेड अब सेक्युलर की जगह ‘भगवा’ सी हो चली है. ये हवा धीरे-धीरे ही बदली है लेकिन अब काफी मुखर हो चुकी है.

चलिए, थोड़ी पीछे से शुरू करते हैं, क्या आपको याद है जाहिरा शेख का केस, गुजरात दंगों के बाद इस लड़की को लेकर महेश भट्ट, जावेद अख्तर, शबाना आजमी और कई लोगों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी.

जिसमें इससे मीडिया के सामने अपील की जा रही थी कि वो बिना किसी से डरे अपने साथ हुए हादसों के बारे में बताए और उसे न्याय दिलवाने के लिए बॉलीवुड अपनी पूरी ताकत झोंक देगा.

वो अलग बात है कि जाहिरा शेख खुद बाद में अपने बयानों से पलट गई और उसके अकांट्स में लाखों रुपए के ट्रांजेक्शन्स की खबरें भी आईं.

इस केस के बाद सेक्युलरिज्म की आवाज उठाने के लिए मशहूर ये स्टार्स जाहिरा से अपने हाथ जला चुके थे और फिर इस तरह का स्टंट करने की किसी ने सीधी कोशिश नहीं की.

फिल्ममेकर्स की इस एकता को देखकर पहले दावे किए जाते थे कि बॉलीवुड एक सेक्युलर जगह इंडस्ट्री है और यहां सबकी आवाज समानता से सुनी और उठाई जाती है. फिल्मों में भी सिर्फ सेक्युलरिज्म का मैसेज दिया जाता है लेकिन वक्त के साथ हवा भी बदली और धीरे-धीरे बॉलीवुड सेक्युलर की जगह भगवा रंग में रंगा आने लगा.

पुरानी बातों को ज्यादा याद न भी किया जाए तो सबसे पहले रोजाना सी छपने वाली सेंसर बोर्ड की कहानियों को ही याद कर लीजिए. संस्कारी थानेदार तो ये काफी वक्त से बने हुए हैं लेकिन फिल्म 'समीर' से पहलाज निहलानी ने एक डायलॉग इसलिए कटवा दिया था क्योंकि उसमें ‘मन की बात’ का इस्तेमाल किया गया था.

अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘फिल्लौरी’ से हनुमान चालीसा का सीन कटवा दिया क्योंकि ऐसा माना जाता है हनुमान चालिसा पढ़ने से भूत भाग जाते हैं और फिल्म में भूत बनी अनुष्का चालीसा पढ़ने के बावजूद वहां खड़ी रहती हैं.

यानी कि सेंसर बोर्ड पर अब भगवा ब्रिगेड का भूत सवार हो चुका है और उनकी जैसी बातें कीजिए तो आपकी फिल्म पास वर्ना फेल.

पहलाज निहलानी ने तो मधुर भंडारकर की फिल्म इंदु सरकार को अभी से एनओसी दे दिया है क्योंकि मधुर ने अपनी फिल्म में इमरजेंसी की बातों को दिखाया है जिसके लिए बीजेपी हमेशा कांग्रेस की आलोचना करती रहती है.

64th National Film Awards

अक्षय कुमार को नेशनल अवॉर्ड भी कॉन्ट्रोवर्सी में आ गया और उनकी फिल्ममेकर प्रियदर्शन से करीबियों की वजह से ये आरोप भी लगे कि उनको नेशनल अवॉर्ड सिर्फ इसलिए दिया गया है क्योंकि वो गेरुए रंग की बातें करते हैं. अक्षय कुमार के लिए तो वाट्सऐप पर बाकायदा हिंदू स्टार होने के मैसेज तक फैलाए गए.

जिस पार्टी की सरकार होती है कुछ लोग अपने फायदे के लिए उसकी जैसी भाषा बोलने लगते हैं ये तो पुरानी रीत है लेकिन जब ये संख्या ‘कुछ’ से ज्यादा हो चले तो फिर ये काफी कुछ करवाने लगती है.

पाकिस्तानी कलाकारों को पूरी तरह से बॉलीवुड में बैन करना भी अब इस बात का प्रतीक है कि पलड़ा इन दिनों भगवावालों का ज्यादा भारी है और इसे देशभक्ति की चाशनी में परोसकर पेश किया गया है इसलिए इसकी मिठास काफी लोगों को पसंद आ रही है.

SonuNigam

कई लोग ये भी मानते हैं कि सोनू बेरोजगारी के दिनों में खबरों में बने रहने की कोशिश कर रहे हैं

सिंगर सोनू निगम का पिछले दिनों मस्जिद पर लगे लाउडस्पीकर पर आवाज उठाना काफी बड़ा मुद्दा बन गया था. फतवा जारी करके उसमें और ड्रामा घुसा दिया गया और सोनू ने अपना सिर मुंडवाकर इस स्टोरी का फिल्मी क्लाइमैक्स जैसा दिखा डाला. लेकिन उसके पीछे सोनू की मंशा कहीं न कहीं गेरुए रंग में रंगी नजर आई.

संजय दत्त का परिवार कांग्रेसी रहा है लेकिन संजय अब बीजेपी से दोस्ती बढ़ा रहे हैं

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आमिर खान ने भी असिहष्णुता के मुद्दे पर जब अपनी बात रखी थी तो लोगों के भारी दबाव में आकर उन्हें कंपनियों ने अपने ब्रांड एंबैसडर से हटा दिया. उनका ऐसा बायकॉट किया गया कि उनको अब अपनी आवाज बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा. आमिर खान का आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से अवॉर्ड लेने पर तो काफी लोगों को हैरानी भी हुई थी.

Aamir Mohan Bhagwat

उनको फिर से टाटा स्काई ने अपने विज्ञापन में इसलिए जगह दी क्योंकि आमिर खान ने अपनी इमेज बदली थी. पीएम मोदी के साथ उनकी तस्वीरें आ चुकी थीं और वो पीएम मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारे से सुर में सुर मिलाते नजर आ रहे थे. दंगल को उन्होंने हरियाणा के सीएम मनोहर खट्टर और केन्द्रीय मंत्री नितन गडकरी को दिखाया था.

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आमिर अपने हाथ जला चुके थे और सलमान ने इसे आमिर से पहले ही बदल लिया था. जब मोदी गुजरात के सीएम थे सलमान उनके साथ पतंग उठाकर आए और जब मोदी पीएम बने तो सलमान को उन्होंने शपथ ग्रहण में आने का न्योता भेजा.

सबसे ज्यादा नुकसान में शाहरुख रहे रईस के लिए उन्हें राज ठाकरे से समझौता करना पड़ा, क्योंकि अब बाजीगर बिजनेसमैन हो चुका है इसलिए उन्होंने भी बीजेपी के नेताओं से अपनी पीगें बढ़ाना शुरू कर दिया है.

उनकी फिल्म जब हैरी मेट सेजल रिलीज को तैयार है और वो गुजरात के सीएम विजय रूपानी से मिल चुके हैं.

SRK VIJAY RUPANI

यानी साफ है कि बॉलीवुड में बिजनेस करना है तो गेरुए रंग में रंग जाइए क्योंकि अब इसने देशभक्ति का चोला भी ओढ़ लिया है. बाकी की आवाजों को सुनने की फुर्सत अब किसी में नहीं है. सबको बस शोर पसंद है.

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