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जन्मदिन विशेष : जब एक ही साल में जॉनी लीवर की 25 फिल्में रिलीज हुई थीं

पढ़िए कि कैसे मिला था जॉनी लीवर को फिल्मों में ब्रेक और क्यों एक्टिंग से पहले उनको पड़ी थी डायरेक्टर की लताड़?

Abhishek Srivastava Updated On: Aug 14, 2017 10:49 AM IST

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जन्मदिन विशेष : जब एक ही साल में जॉनी लीवर की 25 फिल्में रिलीज हुई थीं

उनकी गोल आंखों में हंसी के रंग के इतने शेड्स छुपे हुए हैं जिसको फिल्म जगत आज भी परत दर परत निकालने में व्यस्त हैं. हंसाने के अंदाज इतने दिलकश की मानो उदास चेहरा के लिए वो दवा हो. जॉनी लीवर का अंदाज बेहद ही निराला है. लगभग तीन सौ से ऊपर फिल्म करने वाले जॉनी लीवर ने वैसे तो 1981 में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर दी थी लेकिन सफलता की सीढ़ी चढ़ने में उन्हें छह साल और लग गए.

ये महज इत्तेफ़ाक था कि मशहूर कामेडियन जॉनी वॉकर के करियर में फिल्म प्यासा के गाने 'सर जो तेरा चकराए' से उनको जो शोहरत मिली थी कुछ वैसा ही जॉनी लीवर के साथ हुआ. 1978 में रिलीज हुई फिल्म जलवा जिसमें नसीरुद्दीन शाह एक जुदा अंदाज में नजए आए थे, जलवा ने जॉनी को एक नई पहचान दी थी और इस फिल्म में जॉनी ने एक दक्षिण भारतीय मालिश वाले की भूमिका अदा की थी.

इस फिल्म की सफलता के बाद से जॉनी ने पीछे मुड़कर फिर कभी नहीं देखा. अगले ही साल जब अनिल कपूर अभिनीत तेजाब आई तो फिर उनका नाम चोटी के हास्य कलाकारों की श्रेणी में शुमार होने लगा.

कईयों को इस बात को जानने में बेहद दिलचस्पी होगी कि जॉनी का नाम साधारण नहीं है और इसके पीछे कोई कहानी रही होगी तो हकीक़त यही है कि जॉनी का असल नाम जॉन राव प्रकाश राव जानुमाला है. तेलुगू क्रिश्चियन परिवार में जन्मे जॉनी के पिता हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड के कर्मचारी थे और आगे चलकर अपने पिता की ही वजह से उनको उसी कंपनी में उनको नौकरी मिल गई. बचपन से ही दूसरों को हंसाने की कला में महारत हासिल थी, जॉनी ये व्यवहार वहां भी बदस्तूर जारी रहा.

अपनी कंपनी के एक फंक्शन के दौरान जब उन्होंने अपने वरिष्ठ अफसरों को मिमिक किया तो वहां हंसी का फव्वारा निकल पड़ा. फंक्शन के तुरंत बाद यूनियन लीडर सुदेश भोंसले स्टेज पर चढ़ गए और माइक लेकर एलान कर दिया कि आगे से सभी लोग जॉन को लीवर बुलाएंगे क्योंकि उसने हिंदुस्तान लीवर के सभी अधिकारियों की नकल की. इस वाकिए के बाद उनके सहकर्मियों ने उनको जॉनी लीवर बुलाना शुरु कर दिया. लेकिन ऐसा भी नहीं की जॉनी अपने नौकरी के दिनों में कोई अफसर थे, उनका काम था फावड़े से चीज़ों को उठाना और 100 किलो से भी ज्यादा वजनदार ड्रम्स को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह पर रखना यानी दूसरे शब्दों में जॉनी ने अपने हिंदुस्तान लीवर की नौकरी के दौरान खालिस मजदूरी का काम किया था.

आगे चलकर आर्थिक दिक़्कतों की वजह से जॉनी को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी और परिवार के लिए पैसे कमाने के रास्ते पर निकल गए. मुफलिसी की हालत ऐसी कि परिस्थितियों ने जॉनी को महज 15 साल की उम्र में मुंबई की सड़कों पर सामान बेचने पर मजबूर कर दिया और यहां पर उनका किसी ने साथ दिया तो वो था उनकी एक सिंधी दोस्त जिसने जॉनी को सड़कों पर पेन बेचने के लिए कहा.

पेन बेचने के लिए जॉनी की बचपन की कला ने उनका खूब साथ दिया. अमिताभ बच्चन, जितेंद्र और अशोक कुमार की आवाज निकालकर वो पेन बेचते थे और देखते ही देखते दिन ने उनकी कमाई 250 रुपए तक पहुंच गई. हर दिन अपने डांस से 5 रुपए कमाने वाले जॉनी के लिए ये एक बड़ी बात थी. सिलसिला निकल चला था और इसके बाद जॉनी फंक्शन, आर्केस्ट्रा इत्यादि में परफार्म करने लगे. वहीं पर उनके दो दोस्तों ने उनकी मुलाकात कल्याणजी आनंदजी भाइयों से करवाई. उनकी प्रतिभा को पहचानने ने उनको ज्यादा वक्त नहीं लगा और आगे चलकर वो उनके वर्ल्ड टूर का हिस्सा बन गए. इस बीच जॉनी की पैठ फिल्म जगत में बनती गई और इस वजह से 1975 में उन्होंने जो नौकरी पकड़ी थी उसे 1981 में छोड़ दिया.

फिल्मों में भी उनका ब्रेक मशहूर फिल्म संगीतकार कल्याणजी आनंदजी के कल्याणजी की वजह से ही संभव हो पाया और उनकी पहली फिल्म एक इत्तेफ़ाक थी जिसकी कहानी बेहद ही दिलचस्प है. एक दिन जब कल्याणजी और जॉनी फुर्सत के पलों में कैरम खेल रहे थे तभी साउथ के एक प्रोड्यूसर कल्याणजी से मिलने के लिए आए. बातों-बातों में ही इस बात का पता चला की उनको एक छोटे मोटे कामेडियन की तलाश थी  जिनको जगदीप साहब के सामने एक्टिंग करनी थी.

रोल था एक मराठी का जो फिल्मों के पोस्टर चिपकाता है और उन पोस्टरों के सितारों को देखकर उनकी मिमिक्री करता है. कल्याणजी ने तुरंत प्रोड्यूसर को बोला कि वो रोल जॉनी कर लेगा. उस वक्त तो बगल में बैठे जॉनी ने अपनी हामी तो दे दी थी लेकिन जब उन्हें इस बात का इल्म हुआ की वो फिल्म करन वाले हैं तब उनके हाथपांव फूलने लगे. जल्दबाजी इतनी थी उसी रात को उनके चेन्नई का फ्लाइट टिकट लेना पडा.

जब वो अपने होटल पहुंचे तो नर्वस इतने की उन्होंने मद्रास स्टेशन जाने की सोची ताकि वो मुंबई वापस निकल जाएं. लेकिन बाद में जब उनको यूनिट के बाकी लोगों को अपना अपना काम करते देखा तब उनको बल मिला. उन्होंने सोचा कि सभी अपना काम कर रहे हैं तो भला मैं पीछे क्यों रहूं. पहला ही शॉट शानदार रहा जिसमें उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा की मिमिक्री की. कारवां आगे बढ़ा और लव 86 में उनके काम को देखकर फिल्म जलवा में काम करने का मौका मिला. उस फिल्म में उन्होंने अशोक कुमार की मिमिक्री की जो की उस वक्त अपने सीरियल हम लोग में सूत्रधार की भूमिका के लिए छाए हुए थे. उनके इस रोल के लिए उनको हर ओर से शाबाशी मिली और आलम ये था कि जब फिल्म का प्रीमियर हुआ तब मौके पर खुद अशोक कुमार मौजूद थे और उन्होंने सभी के सामने जॉनी की तारीफ की.

जॉनी लीवर को अब तक फिल्मों में मिमिक्री ही करने का मौका मिला था किसी भी निर्देशक ने उनसे एक्टिंग नहीं करवाई थी. जॉनी को ये मौका भी जल्द ही मिल गया जब उन्होंने तेजाब बनाने वाले एन चंद्रा के साथ फिल्में करनी शुरु कीं. एन चंद्रा ने उनको एक्टिंग की बारिकियों से अवगत कराया और उसके बाद उनके साथ चार फिल्में करने के बाद जॉनी का दायरा स्टेज से बढ़कर फिल्मों की ओर भी हो गया. लेकिन धक्का लगा उनको एक दूजे के लिए बनाने वाले निर्देशक के बाला चंदर के सेट, पर जब एक सीन के लिए इनको राकेश बेदी के साथ एक्टिंग करनी थी.

जॉनी को मतलब था तो सिर्फ अपनी लाईने बोलने से. सामने वालो की बातों पर रिएक्ट भी करना होता है ये जॉनी नहीं जानते थे. गुस्से से थरथराए के बाला चंदर ने पूछ ही लिया यूनिट के बाकी लोगों से कि इसको फिल्म में काम कैसे मिला. राकेश बेदी ने मौके की नजाकत समझ कर उनको कैसे भी के बाला चंदर के प्रकोप से बचाया लेकिन ये जॉनी के लिए बड़ा सबका था कि अगर फिल्मों में काम करना है तो एक्टिंग भी सीखनी पडेगी.

जॉनी जिस रास्ते पर चल पड़े थे वो रास्ता लंबा था लेकिन फिल्म बाजीगर से उनके ऊपर एक एक्टर का टैग लग गया. बहुत लोगों को जानकर आश्चर्य होगा कि बाजीगर में जॉनी लीवर के लिए कोई डायलॉग लिखे नहीं गए थे, पूरी फिल्म में जो भी डायलॉग जॉनी ने बोले हैं वो खुद जॉनी के ही हैं जिसे उन्होंने सीन के मुताबिक खुद सेट पर लिखा था. पाकिस्तान के मशहूर कामेडियन मोईन अख्तर ने जब उनका परफार्मेंस फिल्म अनाडी नंबर वन में देखा तो उनसे रहा नहीं गया और सीधे फोन कर दिया. गौरतलब बात ये थी कि उस फिल्म में जॉनी लीवर के महज तीन सींस थे. नए मिलेनियन के पहले ही साल यानि की 2000 में जॉनी की अकेले की 25 फिल्में रिलीज हुई जो अपने आप में एक रिकार्ड माना जा सकता हैं.

ऐसा नहीं कि जॉनी की निजी जिंदगी भी उनका फिल्मों का तरह खुशहाल रही है. 1998 में लीवर को सात दिन की जेल की सजा सुनाई गई थी जब उनके ऊपर ये आरोप लगा था कि उन्होंने तिरंगे का अपमान किया है. मौका था दुबई में डॉन अनीस इब्राहिम कास्कर की एक प्राइवेट पार्टी के दौरान जब जॉनी ने ये हरकत की थी. आगे चलकर जॉनी के ऊपर से सारे आरोप हटा लिए गए थे.

जॉनी ने वैसे तो फिल्मों को करने की अपनी रफ्तार पर आजकल लगाम लगा दी है और आजकल वही फिल्में साइन करते हैं जिसके अंदर कुछ दिखाने का दम होता है लेकिन फिर भी फिल्मों के ऑफर बदस्तूर उनके पास आते रहते हैं. हालिया रिलीज में गोलमाल और आल द बेस्ट में जॉनी के काम को बेहद सराहा गया था. सात बार इनको प्रतिष्ठित फिल्म फेयर अवॉर्ड्स के लिए नामांकित किया जा चुका हैं और दो बार ट्राफ़ी इनके हाथ लगी है. मुंबई के शिवड़ी इलाके की एक चॉल से अपनी शुरुआत करने वाले जॉनी के बारे में किसी ने सोचा नहीं होगा कि ये सफलता की बुलंदियों को एक दिन छूएगा. जॉनी के जन्मदिन पर हंसी के इस जादूगर को सलाम है.

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