S M L

विनोद खन्ना के साथ फिरोज खान को भी याद करेगा बॉलीवुड

आखिरी दिनों में कर रहे थे 'कुर्बानी’ के रीमेक की तैयारी.

Sunita Pandey | Published On: Apr 27, 2017 04:16 PM IST | Updated On: Apr 27, 2017 04:16 PM IST

विनोद खन्ना के साथ फिरोज खान को भी याद करेगा बॉलीवुड

बॉलीवुड में वैसे तो पठानों की पूरी फौज मौजूद है लेकिन पठानों की जो ठसक और धमक मरहूम अभिनेता फिरोज खान में थी वो शायद की किसी और अभिनेता में देखने को मिले.

कमीज के ऊपर के दो बटन खुले हुए और टाइट फिटिंग की पैंट, होठों में या फिर हाथ में लापरवाही से पकड़ी हुई सिगरेट, यह फिरोज का अपना स्टाइल था जो उनकी फिल्मों में बार-बार नजर आता है. ये स्टाइल फिरोज खान की पूरी शख्सियत को परदे से बाहर भी बयां कर देती थी.

फिल्मी दुनिया की ओर रुख

अफगानी पिता सादिक खान और ईरानी मां फातमा के सबसे बड़े बेटे फिरोज खान का जन्म 25 सितंबर, 1939 को बैंगलोर में हुआ. उनकी प्रारंभिक शिक्षा बैंगलोर में हुई. आगे की पढ़ाई के लिए वो मुंबई आ गए. कॉलेज तक पहुंचते-पहुंचते फिरोज खान को उनके दोस्तों और रिश्तेदारों से मिल रही तारीफों ने यह एहसास दिला दिया था कि वो एक खूबसूरत शख्स हैं और उनकी जगह फिल्मी दुनिया में है. इसलिए उन्होंने इस रूपहली दुनिया का रूख किया.

आठ साल बाद मिली कामयाबी

शुरुआती दौर में उन्हें  ‘रिपोर्टर राजू’, ‘सैमसन’, ‘चार दरवेश’, ‘एक सपेरा एक लुटेरा’, ‘सीआईडी 999’ जैसी कम बजट वाली फिल्मों में सहायक अभिनेता का रोल मिलता रहा. अपनी पहचान बनाने के लिए फिरोज को आठ साल लंबा इंतजार करना पड़ा. 1965 में आई फिल्म ‘ऊंचे लोग’ की कामयाबी ने फिरोज खान को मजबूती से स्थापित कर दिया.

निर्देशन के क्षेत्र में कामयाब रहे फिरोज

फिरोज खान मनमौजी थे और अपनी मर्जी के मुताबिक़ फिल्में बनाना चाहते थे और ये मौक़ा उन्हें मिल नहीं पा रहा था. इसलिए उन्होंने 1972 में फिल्म ‘अपराध’ के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में कदम रख दिया. 1975 में उनके निर्देशन में ‘धर्मात्मा’ आई. अपनी पहली बनाई फिल्म ‘अपराध’ में जहां फिरोज कार रेस शूट करने जर्मनी गए वहीं 'धर्मात्मा' की पूरी शूटिंग अफगानिस्तान में हुई और इसमें वहां के परंपरागत घुड़सवारी के खतरनाक खेल बुजकशी को दिखाया गया जो भारतीय दर्शकों के लिए नया और पहला अनुभव था. इसके बाद उन्होंने 'कुर्बानी', 'जाबांज', 'दयावान' और 'यलगार' फ़िल्में बनाई. बतौर निर्माता-निर्देशक 'कुर्बानी' उनके करियर की सबसे हिट फिल्म मानी जाती है.

फिल्मों में होते थे खास सीन

फिरोज खान अपनी फिल्मों में हिरोइन के सौंदर्य और सेक्स अपील को काफी खास तरीके से पेश करने के लिए भी जाने जाते हैं. 'धर्मात्मा' में हेमा मालिनी की खूबसूरती को उन्होंने बेहद सधे हुए ढंग से सामने लाया. ‘जांबाज’ में अनिल कपूर और डिंपल कपाड़िया का प्रणय दृश्य भारतीय सिनेमा के यादगार प्रणय दृश्यों में से एक माना जाता है. ‘दयावान’ में उन्होंने माधुरी दीक्षित और विनोद खन्ना का लगभग दो मिनट लंबा चुंबन दृश्य दिखाकर दर्शकों के बीच हंगामा खड़ा कर दिया था. इतना लंबा चुंबन दृश्य इससे पहले भारतीय सिनेमा के इतिहास में कभी नहीं दिखाया गया था. और ‘क़ुर्बानी’ में भीगी साड़ी में जीनत का सौंदर्य कभी न भुलाए जानेवाले दृश्यों में से एक है.

'कुर्बानीके रीमेक की तैयारी में थे फिरोज

बतौर अभिनेता फिरोज खान की आखिरी फिल्म अनीस बज्मी की 'वेलकम' थी, जिसमें उन्होंने आरडीएक्स का कॉमिक रोल निभाया. आख़िरी दिनों में फिरोज अपनी सुपरहिट फिल्म ‘कुर्बानी’ के रीमेक की तैयारी कर रहे थे. इसमें उनकी भूमिका फरदीन और विनोद खन्ना वाली भूमिका सैफ अली खान को अदा करनी थी, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और 27 अप्रैल, 2009 को उनकी मृत्यु हो गई.

विनोद खन्ना ने ली आखिरी सांस

विनोद खन्ना ने भी आज 27 अप्रैल को दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. बॉलीवुड की इन दोनों शख्सियतों को लोग हमेशा स्टाइल और लार्जन दैन लाइफ वाली जिंदगी और फिल्मों के लिए हमेशा याद करते रहेंगे.

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi