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वर्ल्ड वॉटर डे: पानी बचाइए वर्ना बूंद को तरस जाएंगे

हम पानी का इस्तेमाल ऐसे करते है जैसे इस पर सिर्फ हमारा हक हो.

Ankita Virmani Updated On: Mar 22, 2017 12:19 PM IST

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वर्ल्ड वॉटर डे: पानी बचाइए वर्ना बूंद को तरस जाएंगे

रोजमर्रा की जिंदगी में हम पानी का इस्तेमाल ऐसे करते है जैसे ये हमें विरासत में मिला हो और इस पर सिर्फ हमारा हक हो. नहाने गए तो एक घंटा शॉवर के नीचे खड़े रह गए, ब्रश या शेव करने लगे तो बार-बार नल बंद करने का झंझट किसे पसंद है, खुला ही छोड़ दिया. गाड़ी धोनी हो या बगीचे में पानी देना हो तो बाल्टी कौन भरेगा, बस पाइप लगाओ और शुरू हो जाओ.

ये तो हुई शहर में रहने वाले आप-हम जैसे लोगों की बात.

जिनके लिए हर बूंद रखती है अहमियत

अब जानिए छोटी के बारे में. वाटरएड की केस स्टडी के मुताबिक, छोटी अपने 4 बच्चों के साथ उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड के कुबरी गांव की रहती हैं. खेती के अलावा इस गांव में रोजी रोटी का और कोई जरिया नहीं है. छोटी बताती है पिछले कुछ सालों में कम बारिश के कारण उन्हें और उनके बच्चों को भूखमरी जैसे हालातों का सामना करना पड़ा. जितनी भी फसल हो पाई वो पेट काट-काट कर उसका इस्तेमाल करते है क्योंकि वो नहीं जानती कि फिर कब उन्हें कम बारिश के कारण ऐसे हालात का सामना करना पड़ेगा.

छोटी ने बताया कि वो पूरी गर्मी सरकार द्वारा चलाए गए पानी के टैंकरो पर निर्भर रहती है. लेकिन हर टैंकर से एक परिवार को सिर्फ चार कैन पानी मिलता है और हर परिवार में तकरीबन 15 सदस्य है. ऐसे हालात में अक्सर बच्चें पानी के लिए लड़ते है. और जब कभी टैंकर नहीं आता तो उन्हें नदी के पानी से ही काम चलाना पड़ता हैं. छोटी कहती है जब हमारे पास खुद खाने पीने के लिए नहीं तो हम अपने पशु-पक्षियों को कहां से पालें.

साफ पानी की समस्या बहुत बड़ी है

ये कहानी सिर्फ छोटी की नहीं. आज भी भारत के गांवों में रह रहें लगभग 6 करोड़ 50 लाख लोगों के पास पीने के लिए साफ पानी का कोई स्रोत नहीं है. ये संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है. भारत में हर साल 5 की उम्र से कम वाले लगभग 68000 बच्चे डायरिया जैसी बीमारियों के कारण मर जाते है. इसका मुख्य कारण पीने का साफ पानी न मिलना और साफ शौच की व्यवस्था न होना है.

भारत दुनिया की तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है लेकिन आज भी साफ पानी उपलब्ध कराना सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है.

पानी की तरह पानी बहाना बंद करो

यूं तो पृथ्वी का तीन चौथाई हिस्सा सिर्फ पानी से ढका हुआ है और आपका ये सोचना भी जायज है कि पानी तो सबसे रिन्युएबल संसाधन है और यह बारिश के रूप में फिर वापस आ जाएगा. फिर क्या जरूरत है इसे बचाने की. आपके लिए ये जानना बेहद जरूरी है कि सिर्फ एक प्रतिशत पानी ऐसा है जिसका हम सीधे तौर पर इस्तेमाल कर सकते है. 97 प्रतिशत पानी नमकीन है और बाकी का 2 प्रतिशत ग्लेशियर के रूप में है.

शायद अब आप समझें कि इस एक प्रतिशत पानी पर दुनिया का कितना भार है और कितना जरूरी है पानी बचाना. जिसे आप अपना समझ कर बेकदरी से इस्तेमाल करते है, उसकी थोड़ी कदर कीजिए. आखिर बूंद बूंद से ही सागर बनता है.

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