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वैलेंटाइन डे स्पेशल: मीरा से भी बड़ी कृष्ण दीवानी थी मुगलिया ताज बीबी

मीरा से भी बढ़कर कृष्ण की दीवानी थी मुगलिया ताज बीबी

Mridul Vaibhav | Published On: Feb 13, 2017 09:10 AM IST | Updated On: Feb 13, 2017 12:11 PM IST

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वैलेंटाइन डे स्पेशल: मीरा से भी बड़ी कृष्ण दीवानी थी मुगलिया ताज बीबी

एक थीं कृष्ण दीवानी ताज बीबी, कहती थी हूं तो मुगलानी, हिंदआनी ह्वै रहौंगी मैं?

कहती थी : वृन्दावन छोड़ अब कितहूँ न जाऊंगी, बांदी बनूंगी महारानी राधा जू की, तुर्कनी बहाय नाम गोपिका कहाऊंगी!

वैलेंटाइन डे पर यह जानना बहुत रोचक होगा कि मुगलकाल में मीरा बाई ही कृष्ण दीवानी नहीं थी. एक चांद बीबी भी थी, जो मीरा से बढ़कर प्रेम दीवानी थी. ताज बीबी का धर्म इजाजत नहीं देता था फिर भी वह कृष्ण के लिए दीवानी थी.

वह गाती थी कि हूं तो मैं मुगलानी, लेकिन कृष्ण के प्रेम के बिना जीवित नहीं रह सकती. हे नंद के मोहक पुत्र, मैं तुम से इतना सम्मोहित हूं कि तुम्हारे बिना मेरा जीवन निस्सार है. मैं मुगलानी हूं, लेकिन हिंदुआनी होना भी पड़े तो कोई बात नहीं. मैं कृष्ण के प्रेम में हिंदुआनी भी हो जाऊंगी.

A girl dressed up as Hindu Lord Krishna performs during Janmashtami festival celebrations marking the birth of Lord Krishna, in Ahmedabad, India, August 25, 2016. REUTERS/Amit Dave TPX IMAGES OF THE DAY - RTX2N2T8

कुछ लोग कहते हैं कि ताज बीबी कोई और नहीं, मुगल सम्राट अकबर की पत्नी थी और अपने पति की तमाम बंदिशों के बावजूद कृष्ण के प्रेम में पगी कृष्ण के गीत गाया करती थी.

कुछ लोगों का तर्क है कि ताज बीबी अकबर की नहीं, अकबर के बेटे जहांगीर की पत्नी थी और मूलत: हिन्दू थी. लेकिन जिस ताज बीबी के प्रेम का जिक्र किया जा रहा है, वह हिन्दू पृष्ठभूमि की नहीं हो सकती, क्योंकि वह स्वयं को मुगलानी घोषित करती है.

कृष्ण प्रेम में पगी ताज बीबी कहती थी : यह छैल-छबीला देवता सब रंग में रंगीला है और मैं उसके बिना जी नहीं सकती. वह चित्त का बेहद अड़ीला और सम्मोहक है आैर सब देवताओं से बिलकुल ही न्यारा है. वह गाती :

माल गले सोहै, नाक-मोती सेत जो है कान, कुण्डल मन मोहै, लाल मुकुट सिर धारा है ।

भारतीय साहित्य और इतिहास में अकबर की हिन्दू पत्नियों का तो जिक्र आता है, लेकिन ऐसी किसी मुसलिम पत्नी का उल्लेख कम मिलता है, जो बिलकुल बगावती तेवर अपनाए हो. अकबर के समय को भले उदार माना जाए, लेकिन उस समय भी मुल्ला मौलवी बहुत ताकत रखते थे और मुस्लिम स्त्रियों को बिलकुल आजादी नहीं थी.

Children dressed as Hindu Lord Krishna wait to participate in a fancy dress competition at a temple before the Janmashtami festival in Chandigarh, India, September 3, 2015. The festival, which marks the birth anniversary of Lord Krishna, will be celebrated across India on Saturday. REUTERS/Ajay Verma TPX IMAGES OF THE DAY - RTX1QYEJ

अकबर ने अपने हिन्दू नवरत्नों से एक बार आग्रह किया था कि वे मुस्लिम युवतियों से शादी करें और उन्हें अपने घरों में मुस्लित रीति नीति से पूजा की छूट दे दें, लेकिन अकबर के इस प्रस्ताव को उनके मंत्री बीरबल और मानसिंह जैसे सेनापतियों ने खारिज कर दिया था.

हिन्दू पंडितों ने जब अकबर के इस प्रस्ताव को सुना तो बहुत विरोध किया. लेकिन राहुल सांकृत्यायन और कुछ दूसरे विद्वानों का मानना है कि अकबर ने हिन्दू-मुस्लिम युवक-युवतियों के विवाह की नई परंपरा का प्रस्ताव रखा था. खासकर दीने-इलाही के समय.

ताज बीबी ने किसी हिन्दू से शादी की या नहीं यह तो प्रमाणित नहीं है, लेकिन हिन्दी साहित्य के रीतिकाल से पहले के दस्तावेजों में उसके पद बखूबी मिलते हैं, जो उसके कृष्ण प्रेम के बारे में बहुत कुछ बताते हैं. वे कृष्ण की वीरता का भी वर्णन करती है. वह कहती है :

दुष्टजन मारे, सब संत जो उबारे ताज, चित्त में निहारे प्रन, प्रीति करन वारा है।

वैलेंटाइन डे पर बहुत से कट्‌टरतावादी अपनी कट्टरता को दिखाते हैं, लेकिन वे भूल जाते हैं कि भारतीय इतिहास कुछ अलग ही तरह का रहा है. ताज बीबी घोषणा करती है :

नन्दजू का प्यारा, जिन कंस को पछारा, वह वृन्दावन वारा, कृष्ण साहेब हमारा है।।

कहते हैं कि एक बार ताज बीबी काबा की यात्रा पर जा रही थीं, लेकिन रास्ते में शंख, घंटे और घड़ियाल की ध्वनियां आईं तो वह मंदिर जा पहुंचीं. पंडितों ने उन्हें मंदिर में प्रवेश से रोक लिया तो वे वहीं बैठकर गाने लगीं. किंवदंती है कि कृष्ण ने उन्हें वहीं दर्शन दिए तो वे हज के लिए आगे बढ़ीं.

School children dressed as Hindu Lord Krishna take part in a function held ahead of "Janamashtmi" celebrations in the southern Indian city of Chennai, August 8, 2012. Janamashtmi is the birth anniversary of Lord Krishna which will be celebrated on August 10. REUTERS/Babu (INDIA - Tags: RELIGION SOCIETY ANNIVERSARY) - RTR36FC1

एक किंवदंती यह भी है कि ताज बीबी गोस्वामी विट्‌ठलदास की सेविका बन गईं थी और उन्होंने कृष्ण प्रेम में कवित्त, छंद और धमार लिखे. ये रचनाएं आज भी पुष्टिमार्गीय मंदिरों में गाई जाती हैं. ऐसा माना जाता है कि इन्होंने कृष्ण भक्ति में ही अपने प्राण गंवाए और इनकी समाधि ब्रज भूमि में ही है.

कृष्ण प्रेम में पगी ताज बीबी ने एलान किया : अब शरम नहीं मेरे कुछ काम की, श्याम मेरे हैं, मैं मेरे श्याम की. ब्रज में अब धूनी रमा ली जायगी, जब लगन हरि से लगा ली जायगी. अल्ला बिस्मिल्ला रहमान औ रहीमी छोड़, पुर वो शहीदों की चर्चा चलाऊँगी. सूथना उतार, पहन घाघरा घुमावदार, फ़रिया को फार शीश चुनरी चढ़ाऊंगी. कहत है ताज कृष्ण सों पैजकर, वृन्दावन छोड़ अब कितहूँ न जाऊंगी. बांदी बनूंगी महारानी राधा जू की, तुर्कनी बहाय नाम गोपिका कहाऊंगी.

मीरा ने कहा था कि कोई कहै कारो, कोई कहै गोरो, मैं तो लियो है री आंख खोल. कुछ उसी तरह ताज बीबी आगे बढ़कर कहती है :

सुनो दिल जानी, मेरे दिल की कहानी तुम, दस्त ही बिकानी, बदनामी भी सहूंगी मैं।

लेकिन कट्‌टरतावादियों के लिए, भले ही वे किसी भी खेमे या धर्म से हों, ताज बीबी कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का इजहार बहुत अनूठे और अलग ढंग से करती है. वह निर्भीकता से कहती है :

देवपूजा ठानी मैं, नमाज हूं भुलानी, तजे कलमा-कुरान साड़े गुननि गहूंगी मैं।। नन्द के कुमार, कुरबान तेरी सुरत पै, हूं तो मुगलानी, हिंदुआनी बन रहूंगी मैं।।

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