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तीन तलाक: सुप्रीम कोर्ट को भेजा खून से लिखा खत

दतोत्तर गांव की रहने वाली शबाना शाह की जिंदगी को तीन तलाक ने बर्बाद कर दिया.

FP Staff | Published On: Dec 08, 2016 01:40 PM IST | Updated On: Dec 09, 2016 03:59 PM IST

तीन तलाक: सुप्रीम कोर्ट को भेजा खून से लिखा खत

तीन तलाक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इसे मुस्लिम महिलाओं पर जुल्म करार दिया है. हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए तीन तलाक को भारतीय संविधान के खिलाफ बताया.

मुस्लिम महिलाओं पर तीन तलाक की वजह से कैसा जुल्म हो रहा है. इसका एक नमूना मध्यप्रेदश के देवास जिले की मुस्लिम महिला शबाना शाह हैं.

मध्य प्रदेश के देवास जिले की मुस्लिम महिला शबाना ने कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को अपने खून से खत लिखकर इंसाफ मांगा था. पत्र को पेन से लिखकर महिला ने खत पर अपनी ऊंगली से खून निकालकर खून के धब्बे (निशान) छोड़ दिए थे.

तीन तलाक ने बर्बाद की जिंदगी

दतोत्तर गांव की रहने वाली शबाना शाह की जिंदगी को तीन तलाक ने बर्बाद कर दिया. पति के खिलाफ प्रताड़ना का केस कराने के बाद अब उसने चीफ जस्टिस को खून से सना खत लिख कर अपनी और 4 साल की बेटी तहजीब की जिंदगी को बदतर बनाने वाले मुस्लिम तलाक कानून को रद्द करने की गुहार लगाई.

Talaq_Letter

सौजन्य: प्रदेश18

ऐसे में शबाना शाह ने सर्वोच्च न्यायालय से ऐसे कानून को रद्द कर समान नागरिकता की वकालत की है. शबाना का कहना है कि वह ऐसे किसी कानून को नहीं मानती, जिसने उसकी और बेटी की जिंदगी को बर्बाद कर दी. शबाना ने खत में लिखा है कि यदि उसे इंसाफ नहीं मिलता है तो उसे अपनी मासूम बेटी के साथ आत्महत्या करने की इजाजत दी जाए.

10वीं तक शिक्षित और नर्सिंग का कोर्स कर चुकी शबाना का यह भी आरोप है कि पति टीपू शाह और ससुराल पक्ष उसे दहेज के नाम पर प्रताड़ित करते थे.

दतोत्तर निवासी शबाना का विवाह देवास की हाटपीपल्या तहसील के महुंखेड़ा गांव के टीपू शाह से मई 2011 में मुस्लिम रीति-रिवाज से हुआ था. वह नर्स बनकर नौकरी करना चाहती थी लेकिन ससुराल वाले उसे खेत पर काम करने के लिए मजबूर करते थे. वह सारी प्रताड़ना झेलती रही लेकिन तीन तलाक कहकर पति ने सारे रिश्ते तोड़ दिए और फिर दूसरा निकाह भी कर लिया.

शबाना की सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी

'श्रीमान,

मेरी शादी मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार 25 मई 2011 को टीपू शाह से महुंखेड़ा, हाटपीपल्या में हुई थी. मेरी चार साल की एक लड़की भी है, जिसका नाम तहजीब है. मेरे पति टीपू शाह ने मुझे शारीरिक, मानसिक रूप से परेशान कर तीन बार तलाक-तलाक-तलाक कहकर मुझे तलाक दे दिया.

पति ने कहा कि तुम मुझे पसंद नहीं हो और उसके बाद मेरे पति ने 19 नवम्बर 2016 को दूसरी शादी कर ली.

मैं तीन तलाक के सख्त खिलाफ हूं. ऐसे पर्सनल लॉ को मैं नहीं मानती, जिससे मेरी और मेरी बेटी का भविष्य ख़राब हो गया. मुझे अपने देश के कानून पर पूरा भरोसा है कि मुझे और मेरी जैसी और कई बहन-बेटियों को न्याय मिले.

यह मेरी लड़ाई और मेरी बच्ची और ऐसे कई बच्चों की है, जिन्हें इस तरह से छोड़ दिया जाता है. क्या पर्सनल लॉ ने मुझे बेटी होने की सजा दी है. मैं ऐसी जिंदगी से हताश हो चुकी हूं और मैं अपने मां- बाप पर बोझ नहीं बनना चाहती.

मैं ऐसी जिंदगी नहीं जीना चाहती, जो मौत से भी बदतर हो. मौत तो एक बार आती है और ऐसी मौत मैं हर रोज मरती हूं. ऐसे पर्सनल लॉ के तीन तलाक वाले कानून को रद्द किया जाए और मुझे न्याय दिलाया जाए. अगर ऐसा नहीं होता है तो मुझे और मेरी बच्ची को आत्महत्या करने की इजाजत दी जाए.

नोट- यह पत्र मैं अपने खून से लिख रही हूं- शबाना शाह,

Shabana_letter

सौजन्य: प्रदेश18

पति ने किया आरोपों से इनकार

तीन तलाक पर खून से सने पत्र लिखने पर शबाना के पति टीपू शाह का बयान भी सामने आया. टीपू ने कहा कि मुस्लिम परंपराओं के तहत ही तलाक का नोटिस दिया गया था. लेकिन शबाना एक भी सुनवाई के लिए नहीं पहुंची. मैं बच्ची को रखना चाहता हूं और उसके लिए प्रयास भी करूंगा.

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