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क्या कभी रास्ता छोड़ कर भागने का मन नहीं करता?

कभी द ट्रूमैन शो के ट्रूमैन की तरह नकली दुनिया से भाग जाने का मन होता है.

Nikhil Sachan Updated On: Mar 24, 2017 03:31 PM IST

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क्या कभी रास्ता छोड़ कर भागने का मन नहीं करता?

The Truman Show मेरी फेवरेट फिल्म है क्योंकि वो मुझे मेरी और तुम्हारी कहानी लगती है. उन सबकी कहानी लगती है जो नौकरी से इतर भी एक सपना देखते हैं पर दोराहे पर खड़े हमेशा ये सोचते रह जाते हैं कि वो सपना नोचने जाना बेवकूफी तो नहीं होगी?

ये फिल्म ट्रूमैन की कहानी है, जिसे एक दिन अचानक पता चलता है कि उसके आस-पास जो कुछ भी था, वो सब मिथ्या था. झूठ था.

उसे मालूम चलता है कि उसके पैदा होते ही उसके इर्द-गिर्द एक रियलिटी टीवी शो गढ़ा गया. मां, बाप, दोस्त, पड़ोसी, प्रेमिका, बॉस, कलीग्स और उसके खुद के अतिरिक्त हर एक इंसान एक एक्टर था. ट्रूमैन जो भी करता है उसे बाकी दुनिया लाइव देखती है. ‘ट्रूमैन शो’ दुनिया का सबसे पॉपुलर शो हो गया है.

ट्रूमैन वहां से भाग जाना चाहता है. उसे ‘जान-लेना’ टीसने लगता है. पिराने लगता है. लेकिन वो भाग नहीं पाता.

शो-क्रिएटर ने बचपन में, उसके भीतर, बड़ी चालाकी से पानी का डर रच दिया था. जब ट्रूमैन ने स्कूल में कहा कि वो ‘एक्स्प्लोरर' बनना चाहता है और पूरी दुनिया घूमना चाहता है, क्रिएटर ने एक एपिसोड में ट्रूमैन के पिता की समुद्र में डूबकर मर जाने की कहानी रच दी और उस दिन से ट्रूमैन के मन में पानी का डर बैठ जाता है. क्रिएटर ये इन्श्योर कर देता है कि ट्रूमैन आइलैंड से कभी भाग नहीं पाएगा और शो चलता रहेगा.

लेकिन एक दिन ट्रूमैन अपना डर छोड़कर अपनी नाव लेकर समुद्र में चल देता है. और मिथ्या से, माया से, भाग निकलता है. अपना सपना पालने के लिए. पोसने के लिए. एक्स्प्लोरर बनने के लिए.

मैं जब भी ये फिल्म देखता हूं, अंदर तक कुछ टीस जाता है. पता नहीं फिल्म में इतने मेटाफर, रूपक हैं या नहीं लेकिन मुझे लगता है कि फिल्म का एक-एक सीन एक बहुत बड़ा रूपक है.

हम सबके भीतर एक ट्रूमैन है. वो हमारे भीतर एक सपना बनकर रहता है. जो अपने इर्द-गिर्द के सिस्टम को छोड़कर भाग जाना चाहता है. एक्सप्लोर करने के लिए. लेकिन सिस्टम उसे डराकर रखने के लिए तमाम सारी मिथ्या रच देता है.

मिथ्या जैसे ऑफिस, मिथ्या जैसे पैसा, मिथ्या जैसे प्रतियोगिता. बिजनेस, भाग-दौड़, सरवाईवल, ‘लोग-क्या-कहेंगे', ‘घर-दुआर', ‘लोन-EMI’, ओहदा-स्टेटस. मैं जब मैट हैग को पढ़ता हूं तो सब जुड़ता हुआ सा लगने लगता है:

“THE WORLD IS increasingly designed to depress us. Happiness isn’t very good for the economy. If we were happy with what we had, why would we need more? How do you sell an anti-ageing moisturiser? You make someone worry about ageing. How do you get people to vote for a political party? You make them worry about immigration. How do you get them to buy insurance? By making them worry about everything. How do you get them to have plastic surgery? By highlighting their physical flaws. How do you get them to watch a TV show? By making them worry about missing out. How do you get them to buy a new smartphone? By making them feel like they are being left behind. To be calm becomes a kind of revolutionary act. To be happy with your own non-upgraded existence. To be comfortable with our messy, human selves, would not be good for business.”

पर मैं ये भी जानता हूँ मेरे दोस्त कि एक दिन ट्रूमैन हिम्मत करके, अपने क्रिएटर और सिस्टम को उंगली दिखाकर उस आइलैंड से भाग निकलता है. और उस दिन उससे अधिक सुखद कुछ नहीं होता. वो दिन, जब तुम्हारे भीतर का ट्रूमैन ये जान जाता है कि मिथ्या से परे, एक और भी दुनिया है, जहां तुम्हारे सपने हैं और उन्हें फलक से तोड़ लाना इतना भी मुश्किल नहीं है.

उस दिन तुम यूं निकल पड़ते हो, जैसे कोई पगला आसमान से तारे नोच लाने के लिए निकल पड़ता है. उस दिन तुम ये जान जाते हो कि जिंदगी में एक न एक ‘सुलेमानी कीड़ा' होना कितना जरूरी है. सपना देखना और पोसना कितना जरूरी है. अपने सपनों को मारकर खाली घर से दफ्तर और दफ्तर से घर आने-जाने से दुखद कुछ नहीं है.

उस दिन तुम्हें तुम्हारा क्रिएटर, तुम्हारा सिस्टम, तुम्हारा क्रिस्टोफ रोकेगा जरूर, पर तुम रुकना मत और उसको उंगली दिखाते हुए कहना:

TRUMAN:  Was nothing real?

CHRISTOF:  You were real. That's what made you so good to watch. Listen to me, Truman.  There's no more truth out there than there is in the world I created for you. Same lies. The same deceit. But in my world, you have nothing to fear. I know you better than you know yourself.

TRUMAN:  You never had a camera in my head!

CHRISTOF:  You're afraid. That's why you can't leave. It's okay, Truman. I understand. I have been watching you your whole life. I was watching when you were born. I was watching when you took your first step. I watched you on your first day of school. The episode when you lost your first tooth. You can't leave, Truman. You belong here...with me. Talk to me. Say something. Well, say something, god-damn-it! You're on television! You're live to the whole world!

TRUMAN:  In case I don't see ya', good afternoon, good evening and goodnight.

(कहने को निखिल सचान को IIT से एक इंजीनियर कहा जा सकता है या फिर IIM से एक मैनेज़र ही कह लीजिए. फिलहाल इनकी दोनों क़िताबों - ‘नमक स्वादानुसार’ और ‘ज़िंदगी आइस-पाइस’ को पॉपुलैरिटी और पाठकों की मोहोब्बत इतनी तादाद में मिली जो हिन्दी में बिरले ही मिलती है. दोनों किताबें रिलीज के बाद से आज भी ई-कॉमर्स पोर्टल्स पर कहानियों की सबसे लोकप्रिय किताबें हैं.)

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