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आज है पूर्ण सूर्य ग्रहण, जानिए कैसा रहने वाला है असर?

अमेरिकी लोगों का मानना है कि, पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच चंद्रमा का गुजरना शुभ संकेत हो सकता है.

Nidhi Nidhi Updated On: Aug 21, 2017 12:18 PM IST

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आज है पूर्ण सूर्य ग्रहण, जानिए कैसा रहने वाला है असर?

21 अगस्त को हिंदुस्तान के कई हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा. सूर्य ग्रहण से जुड़ी दो बेसिक बातें तो आपको पता ही होंगी कि धरती और सूरज के बीच जब चंद्रमा आ जाता है तो सूर्य ग्रहण पड़ता है, साथ ही सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को ही होता है.

अलग-अलग धर्मो में ग्रहण को लेकर कई बातें की गई हैं. मसलन महाभारत की लड़ाई में जयद्रथ वध के समय ग्रहण का जिक्र आता है. ग्रहण के दौरान मंदिर बंद रहते हैं, लोग खाने-पीने से परहेज करते हैं. सरोवर या गंगा स्नान करते हैं.

दूसरी तरफ वैज्ञानिकों के लिए सूर्य ग्रहण विज्ञान की दृष्टि से एक बड़ी घटना होती है जिसमें वो तमाम तरह के प्रयोग करते हैं. आसान भाषा में कहें तो सूर्य ग्रहण महज सूरज का कुछ देर के लिए छिप जाना भर नहीं है. इसके अंदर कई रोचक बातें छिपी हैं. चलिए कुछ पर रौशनी डालते हैं.

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यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा

21 अगस्त को होने वाला सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. भारतीय समय के मुताबिक यह ग्रहण रात में 9.15 मिनट से शुरू होगा और 22 अगस्त को रात में 2.34 मिनट पर खत्म होगा. इस समय भारत में रात होती है तो ऐसे में यहां सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा.

यह सूर्य ग्रहण प्रशांत महासागर, उत्तरी-दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्से, यूरोप के पश्चिमी-उत्तरी हिस्से, पूर्वी एशिया, उत्तर पश्चिमी अफ्रीका आदि क्षेत्रों में दिखाई देगा. हालांकि, भारत के लोग इस सूर्य ग्रहण को नासा की वेबसाइट के जरिए देख सकते हैं. नासा सूर्य ग्रहण का लाइव प्रसारण करेगा.

रिपोर्ट्स के मुताबिक नासा ने 12 जगहों से सूर्य ग्रहण को कवर करने की योजना बनाई है. वहीं नासा इसे रिसर्च प्लेन, गुब्बारों और सैटेलाइट से भी कवर करेगा.

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क्या ग्रहण खतरनाक है

कुछ मामलों में हां और कुछ में न. सूर्य ग्रहण नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए. इसके पीछे बड़ा सीधा-साधा कारण है. सूरज की रौशनी इतनी तेज होती है कि हम उसे नंगी आंखों से नहीं देख सकते हैं. ग्रहण के समय ये रौशनी धीमी पड़ जाती है. मगर ग्रहण कुछ सेकेंड के लिए होने वाली घटना है. बता दें, नंगी आंखों से सूर्य और चंद्र दोनों ग्रहणों को नहीं देखना चाहिए.

वैज्ञानिक भी इस तरह करने की मनाही करते हैं. बताया जाता है कि प्रमाणित टेलिस्कॉप के जरिए ही ग्रहण के दीदार करें. इसके पीछे वजह है कि नंगी आंखों से ग्रहण देखने से इसका असर आंखों पर पड़ सकता है, क्योंकि इस दौरान चंद्र और सूर्य से अल्ट्रावॉयलेट किरणें निकलती हैं.

हम धीमी रौशनी वाले सूरज को देख रहे होते हैं कि अचानक से सूरज पहले की तरह तेज़ चमकने लगता हैं. कुछ ही सेकेंड में हुए रौशनी के इस बड़े फर्क को हमारी आंखें कई बार बर्दाश्त नहीं कर पाती हैं औऱ आंखों की पुतलियां थोड़ा या पूरी तरह से खराब हो जाती हैं.

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भारत में धार्मिक मान्यताएं

धार्मिक और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का असर नकारात्मक होता है. ज्योतिषाचार्य आशुतोष गौर बताते हैं, वैसे तो यह ग्रहण भारत में नहीं दिख रहा है. इसलिए सूतक यहां नहीं माना जाएगा. लेकिन ग्रहण कहीं भी हो, कोई भी हो या कभी भी हो एक बात निश्चित रूप से मानी जाती है कि इसका असर नकारात्मक होता है. इसलिए इस समय घर से बाहर नहीं निकलते या फिर घर पर बैठकर भी मंत्रों, श्लोकों का जाप करते हैं.

ज्योतिषाचार्य आशुतोष ने यह भी बताया कि ग्रहण में खासतौर से बीमार व्यक्ति और गर्भवती महिलाओं का ध्यान रखना चाहिए. गर्भवती महिलाओं के लिए कई सारी मान्यताएं हैं. जैसे इस दौरान उन्हें सोना नहीं चाहिए. या फिर ग्रहण का समय रात में है तो उसके लिए भी कई तरह के नियमों का पालन करना होता है. धर्म के अनुसार सूर्य के कहीं ज्यादा असरदार चंद्र ग्रहण होता है.

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अमेरिका में सूर्यग्रहण पर हो रही हैं शादियां

अमेरिका में 'पैसिफिक डे टाइम' के अनुसार सुबह 10 बजकर 16 मिनट पर ये ग्रहण शुरू होकर 'इस्टर्न डे टाइम' के अनुसार शाम के 4 बजकर 9 मिनट पर खत्म होगा.

भारत में जिस तरह ग्रहण को नकारत्मक माना जाता है वहीं अमेरिका में इस ग्रहण को पूरे जोर-शोर से सेलिब्रेट किया जा रहा है. सोमवार 21 अगस्त को लगने वाला यह सूर्यग्रहण 'द ग्रेट अमेरिकन एक्लिप्स' होगा. जो इससे पहले 1918 में हुआ था.

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी लोगों का मानना है कि, पृथ्वी और सूर्य के ठीक बीच चंद्रमा का गुजरना शुभ संकेत हो सकता है. इसलिए कई जोड़े वहां इस दिन शादी भी कर रहे हैं. वे मानते हैं कि वो अपनी जिंदगी के सबसे यादगार दिन को और यादगार बनाना चाहते हैं.

वहीं कई जगहों पर 'एक्लिप्स फेस्टिवल' के अवसर पर योगा कैम्प भी लगाए जा रहे हैं.

 Eclipse Seen In India

सूर्य ग्रहण खास है चंद्र ग्रहण नहीं

सूर्य ग्रहण के समय अक्सर हमारे न्यूज चैनल उसकी महाकवरेज दिखाने लगते हैं. मगर कभी चंद्र ग्रहण की कवरेज नहीं होती. इसकी बड़ी वैज्ञानिक वजह है (चैनलों की नहीं ग्रहण की). चांद सूरज से बहुत छोटा हैं. इसलिए वो एक खास स्थिति में आने पर ही ये भ्रम पैदा कर सकता है कि उसने सूरज को ढक लिया. जैसे आप आंख के ठीक सामने अंगूठा रखकर चांद को ढक सकते हैं. मगर ये ढका हुआ चांद सिर्फ आपको नहीं दिखेगा. पड़ोस में बैठे आदमी को चांद को ढकने के लिए उसकी आंख के सामने अंगूठा रखना पड़ेगा.

सूर्य ग्रहण दुनिया में कुछ ही हिस्सों में देखा जा सकता है. साथ ही पूर्ण सूर्यग्रहण कई दशकों में होने वाली घटना है. हो सकता है आपके जीवन में पूर्ण सूर्यग्रहण एक या दो बार ही आए. ऊपर से आप दुनिया के उसी हिस्से में होना भी ज़रूरी है जहां से ये दिखाई देगा. कुल मिलाकर सूर्य ग्रहण एक अद्भुत और दुर्लभ घटना है. अगर मौका मिले तो सारी सुरक्षा के साथ इसे जरूर देखिए.

चंद्र ग्रहण की इंपॉर्टेस कम होने की एक ही वजह है. ये अक्सर होने वाली घटना है. सूर्य ग्रहण की तुलना में 40 गुना ज्यादा चंद्र ग्रहण पड़ते हैं. हम जानते ही हैं कि धरती चांद से बहुत बड़ी है, इसलिए जब चांद पर धरती की छाया पड़ती है तो वो उसे पूरी तरह से ढक लेती है. जिसके चलते चंद्र ग्रहण दुनिया में हर उस जगह से दिखता है जहां रात होती है. अगर कभी आप आसमान की तरफ देखें और चांद कुछ लाल सा दिखाई दे तो समझ जाइए कि चंद्र ग्रहण है. चांद दूर चला जाएगा.

आपने सोचा हे कि आसमान में सूरज और चांद बिलकुल बराबर क्यों दिखते हैं. दरअसल आधुनिक मानव सभ्यता बहुत ही रोमांचक समय में जी रही है. हमारा सूरज हमारे चांद से 400 गुना बड़ा है. और इस समय हमारे चांद से 400 गुना दूरी पर भी है. इसलिए 400 और 400 के आपस में कैंसिल हो जाने से सूरज और चांद बराबर साइज के दिखते हैं. इसी वजह से चांद जब सूरज के सामने एक खास जगह पर आता है तो पूरे सूरज को ढक लेता है. लेकिन धरती और चांद के बीच की ये दूरी हमेशा इतनी ही नहीं रहेगी.

चांद धरती से टूटकर अलग हुआ टुकड़ा है. जो धीरे-धीरे हमसे दूर जा रहा है. कितना दूर? लगभग तीन सेंटीमीटर प्रतिवर्ष. इसका मतलब हुआ कि जब डायनासॉर थे तो तो चांद बहुत बड़ा दिखता था. और आज से सौ करोड़ साल बाद इतना छोटा दिखेगा कि कभी सूर्य ग्रहण नहीं पड़ेगा. तब अगर आपको मौका मिले तो आप वो गाना गुनगुनाइएगा, ‘न ये चांद होगा, न तारे रहेंगे...’

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