S M L

व्यंग्य: दूध की धार नहीं, 'आधार' देखो सरकार

भैसों का कहना है कि आम आदमी के अधिकार के दायरे में जब गाय आ सकती हैं तो हम भैंसें क्‍यों नहीं

Shivaji Rai | Published On: Apr 27, 2017 07:46 AM IST | Updated On: Apr 27, 2017 07:46 AM IST

व्यंग्य: दूध की धार नहीं, 'आधार' देखो सरकार

सूबे में जब से भगवा सरकार आई है. अवधू गुरु हाव-भाव से माननीय जैसे हो गए हैं. कल तक गुरु की पहचान सिर्फ दूध डेयरी के मालिक की थी. खुद गुरु भी अपने को दूध का व्‍यापारी ही मानते थे. लेकिन योगीजी के मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही गुरु का खुद के प्रति नजरिया भी बदल गया है.

सड़क से संसद तक जब से 'गोसेवा' और 'गोरक्षकों' की चर्चा आम हुई है. गुरु को भी इस बात का एहसास हो गया है कि वह दूध के व्‍यापार से अधिक पुण्‍य का काम कर रहे हैं, दूध बेचना तो गौण और वैकल्पिक है. मुख्‍य तो यह है कि वह असली गोभक्‍त हैं और गोसेवा कर रहे हैं.

जनप्रतिनिधि नहीं होते हुए भी गुरु आजकल सुबह-शाम लोगों के समक्ष गाय की महिमा का बखान कर रहे हैं. लोगों को दूध से लेकर मूत्र तक के फायदे बता रहे हैं.

गाय के अंगों में निवास करने वाले 84 करोड़ देवताओं का सही पता ठिकाना और उनको प्रसन्‍न करने के उपाय समझा रहे हैं. प्रवचनकर्ता की तरह लोगों को उपदेश दे रहे हैं कि अमुक अंग के स्‍पर्श से अमुक देवता की छप्‍पर-फाड़ कृपा बरसेगी.

कैसे मिलेगा गोसेवा का लाभ?

गौ माता के नाम पर क्या हर गुनाह माफ है!

कल तक गायों की रखवाली नौकरों के जिम्‍मे थी. लेकिन आजकल गुरु खुद ही मल-मूत्र तक साफ कर रहे हैं. योगीजी से प्रेरित होकर गुरु ने सभी गायों के नाम भी रख दिए हैं. किसी को जया, किसी को विजया और किसी को सावित्री के नाम से पुकारते हैं.

गाय-बछड़ों के साथ दिनोंदिन प्रेम बढ़ा रहे हैं. घुल मिल रहे हैं. सुबह-शाम गाय और बछड़ों के साथ सेल्‍फी ले रहे हैं और सोशल साइट्स पर अपने गाय प्रेम को प्रदर्शित कर रहे हैं. गुरु को सोशल साइट्स पर खूब लाइक और कमेंट्स भी मिल रहे हैं.

प्रशंसकों की बढ़ती संख्‍या और शेयर बाजार की तरह आकाश छूते सम्‍मान से गुरु का सीना प्रधान सेवक के 56 इंच के सीने के आस-पास पहुंच गया है. गुरु को भरोसा है कि उनकी गायों के प्रति प्रेम आने वाले दिनों में शीर्ष नेतृत्‍व जरूर नोटिस करेगा.

उनकी गोसेवा का रिकॉर्ड चित्रगुप्‍त भले ना रखें पर मोदीजी और योगीजी की सरकार उनका रिकॉर्ड जरूर रखेगी. और अगले वित्त वर्ष तक ब्‍याज सहित उनका सम्‍मान और वित्‍तीय मदद जरूर करेगी.

संभव है सरकार द्वारा की जा रही यश भारती पुरस्‍कार की समीक्षा में कुछ अपात्र लाभार्थी निकाले जाएं और उनकी पात्रता स्‍वीकार की जाए. गुरु को उम्‍मीद है कि आने वाले दिनों में प्रेमचंद की तरह कोई साहित्‍यकार अवतरित हुआ और 'गोदान' जैसे कृति की रचना की तो उनकी कृतित्‍व को उसमें जरूर संजोएगा.

‘अच्छे दिन’ का इंतजार

पवित्र गाय

गुरु को जब से पता चला है कि गायों का आधार कार्ड बनेगा तब से वो फूले नहीं समा रहे हैं. गुरु के मन की सारी दुविधा भी कांग्रेस की तरह लघुत्‍तम आकार ले चुकी है. गुरु को खुशी है कि कल उनकी गायों का बायो-मीट्रि‍क्‍स डाटा लिया जाएगा. नाक-कान, आंख और पूंछ का चित्र लिया जाएगा. बतौर पालक, संरक्षक और अभिभावक उनका नाम सरकारी दस्‍तावेज में दर्ज होगा और उन्‍हें गोसवक और गोभक्‍त की सरकारी मान्‍यता मिल जाएगी.

गायों के आधार कार्ड बनने की बात से गुरु खुश तो बहुत हैं पर मन में एक चिंता पनप रही है. दरअसल गुरु की गौशाला की ज्‍यादातर गायें 'जर्सी' नस्‍ल की हैं. जिनके पुरखे या पति विदेशी या विदेशी मूल के रहे हैं. गुरु को डर है कि कहीं बायो-मीट्रिक्‍स पहचान में बांग्लादेशियों की तरह उनकी गायों को भी घुसपैठिया ना करार दे दिया जाए.

गुरु उभरती चिंता को दबाने के लिए खुद को संतोष दे रहे हैं कि जब विदेशी मूल की लड़की को देश बहू स्‍वीकार कर सकता है. शासन सत्ता और सबसे बड़ी पार्टी की मुखिया बना सकता है. तो फिर विदेशी मूल के पति और पुरखों वाली गायों को अपना क्‍यों नहीं बना सकता है?

गुरु भले ही सोच-विचार के मंझधार में हैं लेकिन उनकी गायें तो 'अच्‍छे दिन' का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं. आधार कार्ड को लेकर काफी उत्‍साहित हैं. उनका उत्‍साह भी निराधर नहीं है, उन्‍हें भरोसा है कि आज आधार कार्ड बन गया तो सरकार कल बैंक में खाता भी खुलवा देगी.

फिर गोसंवर्धन और चारे के लिए आने वाला सरकारी अनुदान सीधे उनके खाते में पहुंचेगा. किसान और सरपंच न उनका हक मार पाएगा, ना लालू यादव की तरह कोई सत्‍ताधारी उनका चारा खा पाएगा.

आजम की भैंसें क्यों हैं परेशान?

agriculture

सरकार के इस कदम से पूरा गोवंश खुश है. पर आजम खान की भैंसें इस असहिष्‍णुता से पूर्ण कदम बता रही हैं. भैसों का कहना है कि आम आदमी के अधिकार के दायरे में जब गाय आ सकती हैं तो हम भैंसें क्‍यों नहीं?

जब सरकार कॉमन सिविल कोड की बात कर रही है तो फिर यह नस्‍लीय भेद क्‍यों? वैसे भी इस देश में आधार कार्ड किसका नहीं बना. राजस्‍थान के सीकर में हनुमानजी का बना तो, मध्‍य प्रदेश के भिंड में कुत्ते का साथ ही 3,858 आधार कार्डों पर तो व्‍यक्ति की फोटो की जगह बिल्‍डिंग, सड़क, पेड़-पौधों की फोटो लगी मिली.

‘आधार' से सबका सुधार हो रहा है तो आधार से हम भैंसों का बंटाधार क्‍यों नहीं? हम भैंसें ही पानी में क्‍यों जाएं? खैर जो भी हो तकरार के बीच अवधू गुरु को गायों की वजह से नेता बनने का आधार मिल गया है. फिलहाल गुरु अपने प्‍यार को आधार से लिंक करने में लगे हैं..!

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi