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रीगल: राजकपूर की फिल्मों के साथ अलविदा कहेगा उनका फेवरिट सिनेमाघर

दिल्ली के मशहूर सिनेमाहॉल रीगल के लिए गुरुवार आखिरी दिन है.

Ankita Virmani Updated On: Mar 30, 2017 02:28 PM IST

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रीगल: राजकपूर की फिल्मों के साथ अलविदा कहेगा उनका फेवरिट सिनेमाघर

राज कपूर की फिल्म 'मेरा नाम जोकर' और 'संगम' के आखिरी शो के साथ ही गुरुवार को रीगल सिनेमा के युग का अंत हो जाएगा.

आज की मल्टीप्लेक्स और स्मार्टफोन वाली जेनरेशन को शायद इससे अधिक फर्क न पड़े. लेकिन हर उस फिल्म प्रेमी के लिए, जिसके लिए फिल्म देखने का मतलब ही रीगल की सैर होता था, ये किसी अपने से बिछड़ जाने सा अनुभव है. वह तो 'मेरा नाम जोकर' की यही पंक्ति गुनगुनाएगा, 'जाने कहां गए वो दिन...'

रीगल यानी शाही. अपने नाम के जैसे इस सिनेमा हॉल का इतिहास भी किसी राजे-रजवाड़े से कम नहीं है. रीगल सिनेमा की शुरुआत साल 1932 में दिल्ली के कनॉट प्लेस में हुई थी. रीगल लगभग उतना ही पुराना है जितना भारतीय सिनेमा का इतिहास. साल 1931 में पहली आवाज वाली फिल्म 'आलम आरा' रिलीज हुई थी और 1932 में रीगल का जन्म हुआ था.

कनॉट प्लेस को उसकी शुरुआती पहचान भी रीगल से ही मिली. लगभग 1960 तक कनॉट प्लेस जाने के लिए आपको तांगे वाले को देना होता था 25 पैसा और पता बताना होता था रीगल का.

रीगल की स्थापना रियल स्टेट टाइकून सर सोभा सिंह ने की थी. इसे बनाया था ब्रिटीश आर्किटेक्ट वॉल्टर स्कायस जार्ज ने. हालांकि ये मुख्य रूप से स्टेज परफॉर्मेंसेज के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में इसने कई कॉन्सर्ट्स, नाटकों और बैले परफॉर्मेंसेज की भी मेजबानी की.

यहां फिल्म का प्रसारण कई साल बाद शुरू हुआ. 1950 से 70 के दशक तक रीगल में छह महीने तक एक ही फिल्म चला करती थी. बहुत हुआ तो साल भर में रीगल पर सिर्फ तीन बार मूवी बदलती थी. ये वो दौर था जब पुलिस को भीड़ पर काबू पाने के लिए नियुक्त किया जाता था. राजश्री प्रोडक्शन की ज्यादातर फिल्में यहीं स्क्रीन हुआ करती थी.

कई दशकों का नाता है रीगल से

84 साल पुराना रीगल सिनेमा कई किस्सों और कई यादों का गवाह रहा है. कभी किसी परिवार की सिनेमाघर में पहली फिल्म देखने की खुशी की याद का तो कभी किसी की पहली डेट की जगह बना है. कभी दोस्तों की खिलखिलाहटों और पॉपकार्न के बीच फिल्म देखने के मजे की याद का, तो कभी बगल में बैठे प्रेमी जोड़े के फुसफुसाहट सुनने की कोशिश वाली याद का.

रीगल सिनेमा (भारत सरकार आर्काइव्स से साभार)

रीगल सिनेमा (भारत सरकार आर्काइव्स से साभार)

रीगल सिनेमा, जो अब सिर्फ खुद इतिहास बन जाएगा, की दीवारो में इतिहास के कई यादगार पन्ने दर्ज हैं.

एक यादगार पन्ना है साल 1978 का. मार्च का महीना था और राजकपूर की नई फिल्म 'सत्यम् शिवम् सुंदरम्' चर्चा में थी. ये एक ऐसी फिल्म थी जिसने कई सुर्खियां बटौरी. 1978 के लिहाज से ये काफी बोल्ड फिल्म थी. बोल्ड इतनी कि कई डिस्ट्रीब्यूटर्स और सिनेमाघरों ने इस फिल्म को लेने तक से इंकार कर दिया था. लेकिन रीगल सिनेमा, उन सिनेमाघरों में से एक था जिसने बिना झिझक इस फिल्म को चलाया.

शायद यही वजह थी कि रीगल सिनेमा राजकपूर का सबसे पसंदीदा सिनेमाघर था. इतना ही नहीं अपनी हर फिल्म के प्रीमियर के लिए भी रीगल राज कपूर की पहली पसंद था. कहते हैं कि वे अक्सर नर्गिस के साथ फिल्म देखने यहां आया करते थे.

अभिनेताओं से लेकर नेताओं तक रीगल हर किसी की पहली पसंद था.

एक किस्सा तो ये भी बताता है कि किसी रोज शशि कपूर यहां फिल्म देखने आए थे और सीट न मिलने पर उन्होंने बिना पब्लिक की जानकारी के पीछे खड़े रहकर फिल्म देखी थीं.

दिल्ली में एलजीबीटीक्यू समुदाय की एकता और लड़ाई की शुरुआत भी एक तरह से रीगल से ही हुई थी. साल था 1998 और फिल्म थी फायर- इसकी निदेशक थी दीपा मेहता. इस फिल्म की कहानी दो महिलाओं के आपस में प्रेम संबंधो की थी, जिसने काफी बवाल मचाया था. 7 दिसंबर 1998 को दीपा मेहता और उनके साथ 30 और सामाजिक कार्यकर्ताओं और लगभग 200 लोगों ने रीगल से ही कैंडल मार्च निकाल कर विरोध किया था.

चलती है क्या 9 से 12

आज शायद आपको ये पंक्तियां सुनकर लगे कि 9 से 12 ही क्यों, 10 से 1 भी हो सकता है या फिर 8 से 11 क्यों नहीं. दरअसल सिंगल स्क्रीन थियेटरों में दिन में गिनती के 4 शो होेते थे. 12 से 3, 3 से 6, 6 से 9 और 9 से 12.

आज के दौर में फिल्म देखना बड़ा आसान है, अपने स्मार्टफोन का एक बटन दबाइए और टिकट आपके पास. लेकिन उस दौर में फिल्म देखने से ज्यादा मजा उसकी टिकट लेने में था. और मान लीजिए कि आपको पहले दिन के पहले शो की टिकट मिल गई तो ये किसी उपलब्धि से कम नहीं था.

खत्म होते सिंगल स्क्रीन थियेटर

साल 1970 तक दिल्ली में लगभग 65 सिंगल स्क्रीन थिएटर्स थे. लेकिन मॉर्डनाइजेशन की मार इन पर भी पड़ी. दिल्ली में पहले मल्टिप्लेक्स के खुलते ही इन थिएटर्स का धंधा मंदा होना शुरू हो गया था. इन 65 में से लगभग 25 थिएटर बंद हो चुके है और रीगल इसका लिस्ट में ताजा नाम है.

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