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रागदारी: हर तरफ से गूंज बनकर बजा था कौन सा शास्त्रीय राग?

‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ और ‘बजे सरगम हर तरफ से’ की दिलचस्प कहानी.

Shivendra Kumar Singh Updated On: Jun 11, 2017 06:19 PM IST

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रागदारी: हर तरफ से गूंज बनकर बजा था कौन सा शास्त्रीय राग?

80 के दशक की बात है. दूरदर्शन का दौर था. देश में कांग्रेस की सरकार थी. राष्ट्रीय एकता को बढ़ाने के लिए दो बहुत ही खूबसूरत वीडियो बनाए गए थे. ये दोनों ही वीडियो एक से बढ़कर एक थे. दोनों शास्त्रीय राग पर आधारित थे. दोनों में जानी मानी हस्तियां स्क्रीन पर दिखाई देती थीं. एक से बढ़कर एक कलाकारों को उसमें ‘फीचर’ किया गया था.

फर्क सिर्फ एक था- एक में लिपसिंक (किसी और की आवाज पर होंठ हिलाना) का सहारा लिया गया था जबकि दूसरा उन्हीं कलाकारों पर फिल्माया गया था जो स्क्रीन पर दिखाई दे रहे थे. अब तक आप समझ गए होंगे कि यहां हम कौन से दो वीडियो की बात कर रहे हैं. चलिए आज के राग के बारे में बताने से पहले इन दोनों वीडियो को देखते हैं. जिसे देखकर एक बहुत बड़े तबके को अपना बचपन याद आ जाएगा. जिसमें दूरदर्शन पर हमलोग, बुनियाद, व्योमकेश बख्शी, तमस और मालगुडी डेज जैसे सीरियर आया करते थे.

'मिले सुर मेरा तुम्हारा' जहां राग भैरवी पर कंपोज किया गया था. वहीं बजे सरगम राग देस पर आधारित था. जो आपको इस वीडियो को सुनकर भी समझ आ गया होगा क्योंकि इसके बोल में ही कहा गया है- बजे सरगम हर तरफ से गूंज बनकर देस राग.

आपको इन दोनों ही वीडियो से जुड़ी दिलचस्प कहानियां बताते हैं. मिले सुर मेरा तुम्हारा से जुड़ी दिलचस्प कहानी तो ये है कि एक वक्त ऐसा आया जब इस बात पर लड़ाई छिड़ गई कि असल में इस गीत को कंपोज किसने किया था. जाने माने मराठी कंपोजर अशोक पाटकी का कहना था कि उन्होंने इसे कंपोज किया है जबकि दूसरी तरफ पंडित भीमसेन जोशी के पुत्र जयंत जोशी ने दावा किया कि ये गीत उनके पिता ने कंपोज किया है.

एक इंटरव्यू में जयंत जोशी ने इसे कंपोज किए जाने की पूरी प्रक्रिया पर बात करते हुए कहा था कि दरअसल तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी राष्ट्रीय एकता की अलख जलाने वाला एक गीत चाहते थे, जिसका प्रस्ताव लेकर जानी मानी कंपनी ओ एंड एम उनके पिता यानी पंडित भीमसेन जोशी के पास लेकर आई थी. जिसके बाद ये कंपोजिशन तैयार की गई थी.

दूसरी तरफ 'बजे सरगम' से जुड़ा किस्सा ये है कि एक वक्त ऐसा आया जब इसकी लोकप्रियता ने 'मिले सुर मेरा तुम्हारा' को भी चुनौती दे दी. इस वीडियो में कविता कृष्णमूर्ति की आवाज के बाद पंडित रविशंकर, पंडित भीमसेन जोशी, पंडित रामनारायण, पंडित हरिप्रसाद चौरसिया, पंडित शिवकुमार शर्मा, उस्ताद जाकिर हुसैन और उनके अब्बा उस्ताद अल्लारखां खान, उस्ताद अमजद  अली खान के अलावा तमाम शास्त्रीय नृत्यों को जगह दी गई थी.

'मिले सुर मेरा तुम्हारा' की तरह इसमें अमिताभ बच्चन, जितेंद्र, मिथुन चक्रवर्ती, हेमा मालिनी, वहीदा रहमान, शर्मिला टैगोर और तमाम जाने माने ‘सेलीब्रिटी’ चेहरे  नहीं थे. फिर भी वो राग देश और इसमें शामिल कलाकारों की काबिलियत थी कि इसने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. आज हम राग देश की बात करने जा रहे हैं.

राग देस से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प किस्सा याद आ रहा है. 1964 में शक्ति सामंत की फिल्म आई- कश्मीर की कली. फिल्म में शम्मी कपूर और शर्मिला टैगोर थे. एस एच बिहारी ने फिल्म के गीत लिखे थे और संगीत ओपी नैयर साहब ने तैयार किया था. शम्मी कपूर पर आम तौर से रोमांटिक और तड़कीले भड़कीले गाने फिल्माए जाते थे. उदाहरण के तौर पर इसी फिल्म का गाना 'तारीफ करूं क्या उसकी जिसने तुम्हें बनाया' याद कीजिए. जिसमें शम्मी कपूर गाते गाते झील में गिर जाते हैं.

खैर, इस फिल्म में शम्मी कपूर पर एक ‘सैड’ गाना फिल्माया जाना था. गाने के बोल थे ‘है दुनिया उसी की जमाना उसी का’. मोहम्मद रफी इस गीत को गा रहे थे. इसे एक बार में फिल्माया गया था. जहां शम्मी कपूर पहली बार कोल्डड्रिंक की बोतल को झटककर शराब को हाथ लगाते हैं. पहले आप इस गाने को सुनिए, फिर आपको इसका किस्सा भी सुनाएंगे.

हुआ यूं कि इस गाने में ओपी नैयर ने ‘सेक्साफोन’ का इस्तेमाल किया था. उन्हें एक ऐसे कलाकार की तलाश थी जो गाने में इस इंस्ट्रूमेंट के साथ न्याय कर सके. एक दिन उनके साथ काम कर चुके एक कलाकार अब्दुल ने डरते-डरते बताया कि वो एक सेक्साफोन बजाने वाले को जानते हैं लेकिन वो एक बैंड पार्टी में काम करता है. जिस कलाकार का जिक्र अब्दुल भाई ने किया था वो भेंडी बाजार में रहता था और नूर मोहम्मद बैंड पार्टी में काम करता था. अब्दुल भाई को इस बात का डर था कि कहीं ओपी नैयर साहब अपनी प्रतिष्ठा को दिमाग में रखकर ऐसे कलाकार को बुलाने से मना कर दें.

ताज्जुब तब हुआ जब ओपी नैयर ने कहाकि उस कलाकार को बुला लो. दिलचस्प कहानी ये भी है कि उस कलाकार के पास अपना सेक्सोफोन तक नहीं था वो अपने बैंड पार्टी का सेक्सोफोन लेकर आया और उसने ओपी नैयर के लिए इस गाने में रिकॉर्डिंग की. गाना बेहद हिट हुआ और साथ ही साथ सेक्साफोन की धुन भी. ये धुन बजाने वाले कलाकार थे- जाने माने संगीत निर्देशक इस्माइल दरबार के पिता हुसैन साहब. इस गाने में राग देस के रंग आपको दिखाई देंगे.

राग देस में और भी कई फिल्मी गीत कंपोज किए गए. आपको राग देश में कंपोज कुछ ऐसे ही गाने और सुनाते हैं जिन्हें खूब लोकप्रियता मिली. 1936 में आई फिल्म 'देवदास' का ‘दुख के दिन अब बीतत नाहीं’ राग देस में ही कंपोज किया गया था, जिसे केएल सहगल ने गाया था. इस गीत को सुनिए और उस दौर की गायकी का लुत्फ उठाइए. जो आज के संगीत के मुकाबले बिल्कुल अलग अहसास कराता है.

1965 में आई फिल्म- आरजू का ‘अजी रूठकर अब कहां जाइएगा’, 1965 में आई फिल्म- नीला आकाश का ‘आपको प्यार छुपाने की बुरी आदत है’ जैसे फिल्मी गीत भी हैं.

फिल्मी गीतों से अलग आपको भजन की दुनिया में ले चलते हैं. भजन सम्राट के तौर पर मशहूर गायक अनूप जलोटा का ये बहुचर्चित भजन भी राग देस में ही कंपोज किया गया है. जो कबीर दास का लिखा हुआ है.

चलिए अब आपको राग देस के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं। राग देस खमाज थाट से निकलता है. इसके आरोह में 'ग' और ‘ध’ नहीं लगाते. जबकि अवरोह में सभी स्वर लगाए जाते हैं. इस प्रकार इसकी जाति औडव सम्पूर्ण कहा जाता है. राग देश के आरोह में शुद्ध ‘नी’ और अवरोह में कोमल ‘नी’ का इस्तेमाल किया जाता है. वादी स्वर 'रे' और सम्वादी स्वर ‘प’ है. राग देस को गाने बजाने का समय रात का दूसरा प्रहर माना गया है. राग देस के आरोह अवरोह को देखिए-

आरोह-- स रे म प नी सं

अवरोह-- सं नी ध प, म ग रे ग स

पकड़-- रे म प, नी ध प, प ध प म, ग रे ग स

एनसीईआरटी की एक खास श्रृंखला में भी राग देस के बारे में बताया गया है. इसे देखिए-

शास्त्रीय रागों को आप तक पहुंचाने की इस श्रृंखला में हम हमेशा आपको जाने माने शास्त्रीय कलाकारों को भी सुनाते हैं. सबसे पहले उस्ताद बड़े गुलाम अली खान का गाया राग देस सुनाते हैं आपको. पद्मविभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात गायिका गिरिजा देवी का गाया राग देस भी सुनिए. ठुमरी के बोल हैं- पिया नहीं आए... काली बदरिया बरसे.

इस राग की बारीकियों और खूबसूरती को समझने के लिए कुछ वाद्यंत्रों पर भी इसे सुनिए, आपको उस्ताद विलायत खान का राग देस सुनाते हैं. साथ ही ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित विश्वविख्यात कलाकार पंडित विश्वमोहन भट्ट का राग देस-

आप इस खूबसूरत राग का आनंद लीजिए. जल्दी ही हम फिर हाजिर होंगे एक नए शास्त्रीय राग के जुड़े किस्से कहानियों को लेकर.

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