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मिलिए कृष्ण और हनुमान की छवि कैद करने वाले अमेरिकी से

वास्वो एक्स वास्वो अमेरिका के मिलवॉकी में पैदा हुए और अब राजस्थान के उदयपुर में रहते हैं

Ankita Maneck Updated On: Mar 27, 2017 07:46 AM IST

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मिलिए कृष्ण और हनुमान की छवि कैद करने वाले अमेरिकी से

'फोटोग्राफ फिल्म पर दर्ज एक छवि है और प्रिंट उसकी फिजिकल कॉपी है. प्रिंट तैयार करना मेरे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. एक अच्छा फोटोग्राफ 50 प्रतिशत इसी बात पर निर्भर करता है कि उसका प्रिंट किस तरह लिया गया है. इसलिए अच्छा प्रिंट तैयार करना बहुत जरूरी है. और हाथ से प्रिंट होने वाली फोटोग्राफी एक तरीका था कि कैसे लोग ब्लैक एंड वाइट फोटोग्राफ्स को रंगते थे.'

'मैं इन दो कलाओं को एक साथ लाना चाहता था, जो कहीं गुम सी हो गई थीं और मैंने हाथ से ब्लैक एंड वाइट प्रिंट तैयार किए. यह प्रदर्शनी उसी को फिर से स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है.'

यह कहना है फोटोग्राफर वास्वो एक्स वास्वो का जिन्होंने अपनी तीन फोटो सीरिज ए स्टूडियो इन राजस्थान, गौरी डांसर्स और न्यू मिथ्स को एक एग्जीबिशन में पेश किया और इसे नाम दिया है 'फोटोवाला'.

वास्वो एक्स वास्वो अमेरिका के मिलवॉकी में पैदा हुए और अब राजस्थान के उदयपुर में रहते हैं. उन्होंने पुराने अंदाज के फोटोग्राफ्स और मिनिएचर प्रिंटिंग के लिए काफी नाम कमाया है.

उन्होंने भारत में यात्रा और रहने के अपने सोलह साल के अनुभव को अपनी किताबों इंडिया पोएम्स: द फोटोग्राफ्स (गैलरी पब्लिशर्स, 2006) और मेन ऑफ राजस्थान (सेरइंडिया, कंटेम्पररी, 2011) में समेटा है.

वह नौ साल से भी ज्यादा समय से उदयपुर में रह रहे हैं. लगभग शुरू से ही, वास्वो ने अलग अलग तरह के स्थानीय कलाकारों के साथ मिल कर काम करने की कोशिश की है. इनमें राजेश सोनी भी शामिल हैं जो फोटो कलर करने वाले एक परिवार की तीसरी पीढ़ी के सदस्य हैं.

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वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी

कैसे मिलते हैं मॉडल

उनके पोट्रेट पुराने अंदाज वाले हैं: इनमें लोग अपने स्थानीय परिवेश में कैमरे की तरफ देखते हुए फोटो खिंचा रहे हैं. इसके बाद, ब्लैक एंड वाइट फोटोग्राफ्स को हल्का सा कलर किया जाता है.

अपनी नई फोटो सीरीज की प्रेरणा के बारे में बताते हुए वह वास्वो कहते हैं, 'मिनिएचर प्रिंटिंग की मेरी सीरीज भारत में रहने वाले एक विदेशी को दिखाती है जो एक हैट पहनता है और अपने पुराने कैमरे से तस्वीरें ले रहा है. ये फोटोग्राफ्स उसी की तस्वीरें हैं...'

वह बताते हैं कि उनकी तस्वीरों में दिखाई देने वाले लोग उन्हें कैसे मिलते हैं. वह कहते हैं, 'चूंकि मैं उदयपुर में बहुत लंबे समय से रह रहा हूं, इसलिए इनमें से ज्यादातर लोग मेरे दोस्त हैं. ज्यादातर लोगों को इसमें बहुत मजा आता है. फोटो से पहले और बाद में हम लोग चाय पीते हैं. और लोगों को खूब मजा आता है. अगर वे पीने का शौक रखते हैं तो फिर हम सेशन को कुछ बीयर्स के साथ खत्म करते हैं.'

तस्वीर: वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी, न्यू मिथ्स

तस्वीर: वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी, न्यू मिथ्स

हिंदी में हाथ तंग

फोटो लेना आसान होता है या मुश्किल क्योंकि वह एक विदेशी हैं?

वास्वो बताते हैं, 'शुरुआत में थोड़ी सी मुश्किल हुई थी लेकिन मुझे लगता है कि भारतीय लोगों को फोटो खिंचवाना पसंद आता है. लेकिन महिलाओं का फोटो खींचना मुश्किल होता है क्योंकि वे तब तक नहीं आएंगी जब तक उनके साथ उनके पिता या कोई भाई न हो. इसमें थोड़ी सी मुश्किल हो जाती है.'

वह कहते हैं, 'लेकिन जब एक बार लोग देखने लगते हैं कि हम क्या कर रहे हैं, जैसे कि हम इन सुंदर प्रिंटों को बनाते हैं, तो वह हमारा साथ देते हैं. मेरे दरवाजे पर आते थे और खटखटाते थे. लेकिन एक कमी मुझे हमेशा खलती है जिसका सामना मुझे हर बार करना पड़ता है. वह यह कि मेरी हिंदी उतनी अच्छी नहीं है. मदद के लिए मुझे अपने ट्रांसलेटर पर निर्भर रहना पड़ता है. तो कभी कभी ये थर्ड पार्टी के जरिए होने वाली बातचीत होती है.'

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी द प्राउल

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी
द प्राउल

विदेशी फोटोग्राफर, बढ़िया कैमरा

वास्वो के साथ अकसर काम करने वाले राजेश सोनी बताते हैं, 'मुझे लगता है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह एक विदेशी हैं. मेरे ख्याल से वे तो बस अपना फोटो खिंचाना चाहते हैं. क्योंकि खुद खिंचवाने लायक तो वह होते नहीं हैं. और वास्वो जिसका फोटोग्राफ लेते हैं, उसके प्रोरट्रेट की एक कॉपी वह उन लोगों को जरूर देते हैं. और जब वे देखते हैं कि वास्वो एक विदेशी हैं तो समझते हैं कि उनके पास अच्छा कैमरा होगा और वे अच्छे फोटो लेंगे.'

वास्वो कहते हैं, 'मैं हर किसी को ए4 कॉपी देता हूं. हर किसी को उनका मेहनताना भी देता हूं. हर कोई मुझसे पूछा करता था, ‘क्या आप अपने मॉडल्स को पैसे देते हैं?’

'अगर मैं कहता कि मैं उन्हें पैसे देता हूं तो इससे फोटो की वैधता खत्म होती थी कि यह इसमें पैसे का लेन देन शामिल है. लेकिन अगर मैं कहता कि मैं पैसे नहीं देता हूं तो फिर मैं लोगों का शोषण करने वाला गोरा कहलाता.'

'मैंने इस मुश्किल का हल निकाला कि मैं लोगों को अपने पोट्रेट स्टूडियो में बुलाता हूं. लेकिन हम वहां उनके जैसा परिवेश तैयार करने की कोशिश करते हैं और फिर फोटो लेते हैं.'

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी शिव का भक्त

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी
शिव का भक्त

आज का सच

न्यू मिथ सिरीज में एक व्यक्ति अपने फोटो खिंचाने के लिए कृष्ण बना है और कृष्ण के जीवन की कुछ झलकियों को उकेरा गया है. वास्वो कहते हैं कि उन्होंने इस मॉडल को इसलिए चुना कि वह कृष्ण के सबसे करीब था. वह न सिर्फ कृष्ण की तरह दिखता था, बल्कि उसका व्यवहार भी वैसा ही था.

वह याद करते हैं, 'इस आदमी का नाम कृष्ण है. बचपन से ही उसका परिवार उसे त्योहारों पर कृष्ण की तरह कपड़े पहनाता रहा है. कृष्ण उसके व्यक्तित्व का हिस्सा रहे हैं. दरअसल वह कृष्ण जैसा आदमी भी है- कुछ कुछ रासलीला रचने वाला जैसा. इसलिए वह इसके लिए परफेक्ट मॉडल था.'

चूंकि पोट्रेट ब्लैक एंड वाइट होते हैं और उनमें रंग बहुत ही हल्के से होते हैं, इसीलिए इन्हें देखने वाले पुरानी यादों में खो से जाते हैं. या कहिए ‘नोस्टेलजिक’ हो जाते हैं.

तस्वीर: वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी गौरी डांसर

तस्वीर: वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी
गौरी डांसर

हालांकि वास्वो नहीं समझते कि उनकी सीरिज के लिए यह शब्द उचित है. वह कहते हैं, 'मैं इसे ऐसे नहीं देखता हूं. उदयपुर में यह जीवन की सच्चाइयां हैं. मुझे लगता है कि शहरों में रहने वाले धनाढ्य लोग ही इन फोटोग्राफ्स को ‘नोस्टेलजिक’ कहेंगे. उदयपुर में अब भी ऐसे लोग, इन्हीं हालात में रहते हैं. मुझे लगता है कि नोस्टेलिजक शब्द का इस्तेमाल करना उनके साथ न्याय नहीं होगा. वे लोग पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं.'

वह कहते हैं, 'मेरे लिए ये फोटोग्राफ्स अध्यात्म से भी जुड़े हैं. इनमें उदयपुर की महक है. ये इतिहास और हिंदू धर्म और साथ ही साथ इस्लाम की आध्यात्मिकता से भी जुड़े हैं. यह भी एक कारण है कि मैंने कृष्ण और हनुमान को अपने फ्रेम में लिया है.'

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी बाइक बॉयज

वास्वो एक्स वास्वो और राजेश सोनी
बाइक बॉयज

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