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गधा और उल्लू का पट्ठा बोलकर आप जानवरों के प्रति नाइंसाफी करते हैं

कुत्ते, भेड़िए, छिपकली, सुअर इन सभी जानवरों को किसी न किसी अवगुण के साथ जोड़ दिया गया है लेकिन वो असल में ऐसे नहीं है.

Maneka Gandhi Updated On: Sep 12, 2017 01:48 PM IST

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गधा और उल्लू का पट्ठा बोलकर आप जानवरों के प्रति नाइंसाफी करते हैं

जानवरों की मदद करने का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि उनके लिए कुछ किया ही जाए. यह उनके प्रति हमारा नजरिया है जो हमारे मूल्यों से जुड़ा हुआ है. हमारी भाषा से बेहतर कोई पैमाना नहीं है जिससे हम हमारे आसपास रहने वाले जीवों के साथ अपने व्यवहार का आकलन कर सकें.

‘जानवर’ शब्द से ही शुरू करें. ‘जानवर’ के लिए शब्दकोष की परिभाषा है वहशी आदमी- निर्दयी. एक जानवर को क्रूर व्यक्ति के रूप में बताया गया है. यह बोलचाल में इस्तेमाल होता है. हमें कहा जाता है कि हम ‘जानवर की तरह व्यवहार’ नहीं करें. अक्सर हम ऐसा टीवी और फिल्मों में सुनते हैं. हिंसक दृश्यों में पीड़ित अक्सर हमलावर पर ‘जानवर’ होने का आरोप लगाता है. और हमने हमेशा ही यह संवाद सुना है, 'वह जानवर है, उसे मारना जरूरी है.' हिन्दी सिनेमा में खलनायक आदतन कहते आए हैं 'कुत्ते का बच्चा, सुअर का बच्चा, उल्लू का पट्ठा.'

जानवरों के नामों की बुरी चीजों से तुलना

जानवर बलात्कार नहीं करते या वे लूट नहीं मचाते. इसके बावजूद बिना सोचे समझे उन्हें बदनाम किया जाना जारी है. और अब यह बहुत व्यक्तिगत होने लगा है. सुअर, गधा, चूहा, बिल्ली, कुतिया, कीड़े.. अब ये शब्द अपशब्दों का भाव बता दे रहे हैं. हमने तुलना करनी शुरू कर दी है जिसका कोई आधार नहीं है. सुअर लालची नहीं होता, लोमड़ियां धूर्त नहीं होतीं, भेड़िए भ्रष्ट नहीं होते और सांप नुकसान नहीं करते. अगर आप जिद्दी हैं तो आपकी तुलना खच्चर से हो जाती है, आप कायर हैं तो आपकी तुलना मुर्गियों से होती है.

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हिन्दी में कुत्ता और डॉग अपमानजनक शब्द हैं. जबकि, कुत्ते दुनिया के अच्छे मित्र, बहुत प्यारे और वफादार प्राणी हैं. सुअरों का दिमाग सभी जानवरों में सबसे ज्यादा तेज होता है.

A dog rescued from Harvey floodwaters in Houston

आप उनसे कितने अच्छे?

जानवर की तरह व्यवहार करना शातिराना और क्रूरतापूर्ण है? जानवर केवल अपना अस्तित्व बचाने के लिए जान लेते हैं और प्रजाति को आगे बढ़ाने के लिए संभोग करते हैं. वे षडयंत्र नहीं करते, चोरी, बलात्कार, नशा, धूम्रपान और जुआ नहीं खेलते. आपमें से कितने लोग ऐसा दावा कर सकते हैं?

हमारे व्यवहार की जड़ में है भाषा. जब आप अपने आपको जानवर का मालिक समझते हैं तो उसके साथ वो सबकुछ करने का अधिकार आप मान लेते हैं जो आप करना चाहते हैं, जबकि आपको चाहिए कि अपनी संपत्ति या पालतू समझने के बजाए अपना उन्हें साथी समझें. आप एक खिलौने की तरह उसे खरीदते, बेचते और खारिज करते हैं. अपने साथी के साथ भी क्या ऐसा ही करते हैं?

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मानवता से ओतप्रोत एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी का परिचय कराया, 'यह मेरी पत्नी है... नहीं मुझे खेद है, यह गलत है. यही वह महिला है जिसके साथ मैं ज़िन्दगी साझा करता हूं.' इसी तरह जब लोग मुझसे पूछते हैं कि आपके पास कितने पालतू जानवर हैं? मैं कहती हूं, कोई नहीं. मेरा उत्तर 'मुझे गिनती नहीं करनी अपने पुत्र और उन जीवों की, जो हमारी देखभाल करते हैं. 16 जानवर हैं, कुत्ते हैं जो हमारे घर में रहते हैं.'

जानवर मतलब खतरा नहीं है

जानवर न तो कीट हैं, न खतरा हैं. इस शब्द का इस्तेमाल तिलचट्टा, मक्खियां और मच्छरों के लिए शुरू हुआ था और अब यह किसी भी प्रजाति के जानवरों के लिए इस्तेमाल होने लगा है जिनका आशियाना नष्ट कर दिया गया है और जिनके पास भोजन के लिए कृषि भूमि या शहरों में जाने के सिवा की चारा नहीं होता. हाथी, बंदर, नील गाय, गिद्ध, कौए, कुत्ते, भेड़ें, सांप... इनमें से किसी भी जीव का जिक्र मीडिया बिना उन्हें खतरा बताए नहीं करता. गांवों में हाथी का ख़तरा है, कुत्तों की दहशत, बंदरों का आंतक...

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वास्तव में दुनिया अलग-अलग नामों से जानी जा रही है. गिद्ध भी तब तक आतंक ही थे, जब तक कि वे गायब नहीं हो गए और वैज्ञानिकों ने दोबारा उनके प्रजनन की कोशिश शुरू नहीं की क्योंकि गिद्ध से बेहतर पर्यावरण की सफाई कोई नहीं कर सकता. तिलचट्टा समेत इनमें से हर जीव मानव अस्तित्व के लिए पर्यावरण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है. इसलिए किसी को ये आजादी न दें कि वे विशेषणों के जरिए इन्हें हमसे छीन ले जाएं. हमारी भाषा एक और तरीके से हमें जीवों के सामने अपमानित करती है जब हम उनका वस्तु के रूप में जिक्र करते हैं. चीटीं समेत हर कोई हमारे परिवार का व्यक्ति है- मां, बच्चा, वंश का सदस्य.

जानवरों का जिक्र उन नामों से न करें जो उन्हें ‘भोजन’ के तौर पर दिए गए हैं. भैंस के बच्चे कटरा नहीं होते, मुर्गियां और मुर्गे ब्रॉयलर और लेयर नहीं हैं. जंगली जीव जिन्हें मार गिराया जाता है वह खेल नहीं है- हत्या किसी भी सूरत में खेल नहीं हो सकता. मिश्रित नस्ल, बेघर कुत्ते दोगले या जंगली नहीं होते, बल्कि वे भारतीय हैं. (उन्हें और बेहतर तरीके से आंका जाना चाहिए क्योंकि उनके जीन में कोई खराबी नहीं है बल्कि स्वाभाविक रूप से उनका विकास हुआ है.)

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जानवरों को चोट पहुंचाना कैसा खेल?

जानवरों को शामिल करते हुए जो स्पर्धाएं होती हैं वे स्पोर्ट्स नहीं है. स्पोर्ट्स शब्द का मतलब होता है- मनोरंजन, आनन्द, मौज, मस्ती, उल्लास, खेल. हर साल हजारों घोड़ों और बछड़ों की पीठ तोड़ने वाला खेल (रोडियो) इनमें से कुछ भी देता है? क्या बुलफाइटिंग से यह मिलता है? बैलगाड़ी रेस क्या कोई खेल है जिसमें धीमी गति से चलने वाले बैलों को अल्कोहल पिलाया जाता है और लाल मिर्ची खिलाई जाती है और फिर उन्हें फेंक दिया जाता है? अफगानिस्तान का पोलो खेल बुजकाशी, जिसमें भेड़ का मृत शरीर गेंद होता है, क्या यह खेल है? या राम फाइटिंग खेल है? कुत्ते की दौड़ जिसमें आधे जानवरों को पीटा जाता है, भूखे रखा जाता है और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाता है, क्या खेल है? क्या हॉर्सरेसिंग जुआ के अलावा भी कुछ है?

Spanish bullfighter Cayetano Rivera fails to perform a pass to a bull during a "Corrida Goyesca" bullfight in Ronda

कहानियों और हमारी भाषा का इस्तेमाल

बच्चों की कई कहानियों और कविताओं में हंसी मजाक के तौर पर या नकारात्मक कहानी के रूप में जानवरों को दिखाया जाता है. उदाहरण के लिए लाल कपड़ों में छिपा धूर्त भेड़िया. कहते समय यह नुकसानदेह नहीं लगता, लेकिन यह बच्चों के दिमाग में डालता है कि भेड़िया छोटे बच्चों को खा जाता है. इसके बदले वैसी कहानियों और दृष्टांतों को ढूंढ़ें, जो उन सच्ची विशेषताओं को उजागर करें जो अब तक सामने नहीं लाए गए हैं. इसी तरह अभिभावकों या आया के मुंह से यह सुनना बहुत सामान्य है जिसमें बच्चों को जानवरों से डराया जाता है- 'अभी सो जाओ, नहीं तो शेर आ जाएगा और तुम्हें खा जाएगा' या कुछ ऐसी ही मूर्खतापूर्ण बातें.

चिड़ियाघर में आप बड़ों को सुन सकते हैं, जब वे बच्चों को डराते हैं कि पिंजड़े या जानवरों से दूर रहो अन्यथा वे तुम्हें पकड़ लेंगे. इन सबसे डर पैदा होता है और जानवरों के प्रति नफरत पैदा होती है जो आगे चलकर क्रूरता में बदल जाती है. भाषा जन्म देती है, परिभाषित करती है, इजाजत देती है और हमारे रुख को बनाती और बदलती है और आखिरकार उससे हमारा व्यवहार बनता है. वास्तव में यह तलवार से अधिक ताकतवर है. भाषा को सावधानी और सही तरीके से अंगीकार करें. जानवरों के बारे में भावना और आदर के साथ बात करें और आप पाएंगे कि आप और आपके आसपास के लोग उनके साथ अच्छा व्यवहार करने लगे हैं.

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पहले इन विचारों को आप अपने दिमाग में डालें. तब उन पर आपत्तियां करना शुरू करें, जहां कहीं भी आप ऐसा सुनते और देखते हैं. अपने परिवार के साथ, मित्रों, कार्यस्थल पर लोगों और पार्टियों में इसे शुरू करें. मैगजीन, स्कूल की किताबों, फिल्मों, नाटकों और दूसरे किसी भी सांस्कतिक प्रदर्शनों के लिए आलेख लिखें. लिखित में प्रोड्यूसर और न्यूज़पेपर दोनों से शिकायत करें.

कुत्ते और बिल्लियों के बच्चों को प्यारा माना जाता है और वन्यजीवन को अजीबोगरीब. घर के आसपास के कई जीव लगातार खराब तरीके से दबाव झेलते हैं. उन मान्यताओं को चुनौती दें जो इतने लंबे समय से चले आ रहे हैं कि हमने उन्हें सच मानना शुरू कर दिया है.

ये हैं कुछ मान्यता और वास्तविकता

मान्यता है कि छिपकली भयानक होती है, जहीरीली होती है जिससे हम छुटकारा पाना चाहते हैं. वास्तविकता ये है कि छिपकली शर्मीली होती है, घर में जहरमुक्त वातावरण बनाती है क्योंकि यह घर को मक्खियों और मच्छरों से मुक्त कराती है.

मान्यता है कि सुअर गंदे होते हैं, बदबूदार जीव होते हैं. वास्तविकता ये है कि सुअर बहुत बुद्धिमान जानवर हैं. यहां तक कि कुत्तों से भी ज्यादा चालाक हैं. वे स्वाभाविक रूप से साफ-सुथरे रहने वाले होते हैं जिनकी नाक बहुत संवेदनशील होती है. फ्रांसीसी सुअरों का इस्तेमाल सुगंधित मशरूम को खोज निकालने में करते हैं. गंदे नालों में उनके रहने की एक मात्र वजह ये होती है कि उन्हें जिंदा रहने के लिए चारा चाहिए और वे इतने बुद्धिमान हैं कि उन्होंने ये जान लिया है कि उन्हीं नालियो में वे शांति से रह सकते हैं. लगाव, वफादारी और शौचालय प्रशिक्षित सुअर पश्चिम में तेजी से लोकप्रिय पालतू जीव बनते चले जा रहे हैं.

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मान्यता है कि सांप खतरनाक होते हैं और उन्हें मार दिया जाना चाहिए. वास्तविकता ये है कि सांप शर्मीले जीव होते हैं जो लड़ने के बजाए भागते हैं. भारत में सांपों की 200 प्रजातियों में से केवल चार- कोबरा, करैत, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड विपर ही जहरीले होते हैं. बाकी सभी न केवल हानिकारक होते हैं बल्कि वास्तव में वे मनुष्य के लिए फायदेमंद होते हैं क्योंकि वे चूहों को खाते हैं जो हमारी फसलों को नष्ट कर देता है. पर्यावरण श्रृंखला में वे उपयोगी लिंक हैं. घरों में अपना रास्ता भूल जाने वाले सांप को मारने के बजाए उसे किसी टोकरी से ढंक दें और उसे कहीं बाहर छोड़ आएं.

A previously captured 13-foot Burmese python is held for the press to view before U.S. Senator Bill Nelson (D-FL) took part in a state-sponsored snake hunt, in the Everglades, Florida January 17, 2013. Python Challenge 2013 is a month-long event sponsored by the Florida Fish and Wildlife Conservation Commission offering prizes of $1,500 for the most pythons captured and $1,000 for the longest python. REUTERS/Joe Skipper (UNITED STATES - Tags: SOCIETY ENVIRONMENT ANIMALS)

मान्यता है कि भेड़िए राक्षस होते हैं, जो छोटे बच्चों को खा जाते हैं. वास्तविकता ये है कि भेड़िए कुत्तों के पूर्वज हैं और साहस और वफादारी समेत वे सभी गुण कुत्तों की तरह उनमें भी होते हैं. भेड़िए शायद ही कभी इंसानों पर हमला करते हैं.

मान्यता है कि काला कौआ अपशकुन और मौत का प्रतीक है. वास्तविकता ये है कि कौआ बहुत बहादुर और बुद्धिमान होता है. पौराणिक कथा है कि कभी ये हंस की तरह सफेद होते थे और सूर्य देवता अपोलो के संदेशवाहक थे. लेकिन उनके लिए वह दिन दुर्भाग्यपूर्ण बनकर आया जब उस कौए ने अपोलो के सामने यह खुलासा किया कि वह अप्सरा विश्वासी नहीं है जिसे वे बहुत पसंद करते थे. उसके बाद ईश्वर ने उस संदेशवाहक पर अपना गुस्सा दिखाते हुए उन्हें काला बना दिया. हिन्दू धर्म में ब्रह्मा ने एक कौए के रूप में अवतार लिया था. रोम में कौए को उर्वरता का प्रतीक माना जाता है. वे शहर के मेहतर के रूप में बहुत उपयोगी होते हैं.

मान्यता है कि गधे जिद्दी और बेवकूफ होते हैं. वास्तविकता ये है कि गधे बहादुर, चालाक और कठिन परिश्रमी जानवर होते हैं. फुर्तीला और मजबूत पैरों वाले इस जानवर का इस्तेमाल मुश्किल मंजिल तय करने में किया जाता है. चूंकि गधे कभी शिकायत नहीं करते, उनसे बहुत ज्यादा काम लिया जाता है और उनका शोषण किया जाता है. उनके बारे में बुरा सोचने के बजाए उन्हें हमारी मदद की जरूरत है.

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