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बिहार से तिहाड़: कन्हैया की कहानी

जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया की किताब 'बिहार से तिहाड़' छपकर आ गई है.

Krishna Kant | Published On: Nov 07, 2016 07:36 PM IST | Updated On: Nov 21, 2016 12:39 PM IST

बिहार से तिहाड़: कन्हैया की कहानी

बेगुसराय से चलकर दिल्ली आया एक युवक संयोग से जेएनयू पहुंच गया. उसे लगा कि वह तैयारी करने में सक्षम नहीं है क्योंकि सिलेबस बदल गया है और अब वह नये सिरे तैयारी कर सकने की माथापच्ची नहीं कर सकता. इसके बाद राजनीति में दिलचस्पी और जेएनयू से मिले राजनीतिक-सामाजिक आत्मविश्वास ने लगातार उसे आगे बढ़ाया. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में कई जायज-नाजायज वजहों से जितना वह चर्चित हुआ, उतना शायद ही पहले कोई अध्यक्ष चर्चित हुआ हो. उस शख्स का नाम कन्हैया कुमार है.

Bihar se Tihar_300_RGB कन्हैया कुमार की किताब 'बिहार से तिहाड़' का कवर.

chai wla जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की किताब 'बिहार से तिहाड़' छपकर आ गई है. 'जगरनॉट बुक्स' दिल्ली से प्रकाशित यह किताब 5 भागों में है. किताब में क्रमश: बचपन, पटना, दिल्ली, जेएनयू और तिहाड़ नाम से पांच भाग हैं. इनमें कन्हैया अपने बचपन से लेकर तिहाड़ जाने तक के अनुभव दर्ज किए हैं.

कन्हैया ने किताब में अपने पारिवारिक संघर्ष, अपनी पढ़ाई-लिखाई, घर-परिवार से लेकर दिल्ली और जेएनयू के बारे विस्तार से लिखा है. जेएनयू और तिहाड़ शीर्षक के दो भाग काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसमें वे सारे घटनाक्रम दर्ज हैं जिनके कारण कन्हैया कुमार छात्र से नेता बने और चर्चा में आए. छात्र राजनीति, उसका महत्व, उसके दांव-पेंच और जटिलताएं भी किताब में दर्ज हैं. किताब का खास आकर्षण है पिछले दो साल का घटनाक्रम, जिसके चलते जेएनयू बनाम केंद्र सरकार के बीच राष्ट्रवाद की लंबी बहस भी चली. कन्हैया कुमार के समर्थकों और आलोचकों के लिए इस किताब में काफी कुछ मिल सकता है.

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