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इक़बाल पुण्यतिथि विशेष: सितारों से आगे जहां और भी है

भारतीय उन्हें 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' के रचनाकार के बतौर जानते हैं

FP Staff | Published On: Apr 21, 2017 01:45 PM IST | Updated On: May 03, 2017 12:57 PM IST

इक़बाल पुण्यतिथि विशेष: सितारों से आगे जहां और भी है

आज 'अल्लामा इक़बाल' की 79वीं पुण्यतिथि है. उनका जन्म 9 नवंबर 1877 को सियालकोट, पंजाब (अब पाकिस्तान में) हुआ था. इक़बाल के दादा सहज सप्रू हिंदू कश्मीरी पंडित थे जो बाद में सिआलकोट आ गए. भारत के विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना का विचार सबसे पहले इक़बाल ने ही रखा था.

1930 में इन्हीं के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने सबसे पहले भारत के विभाजन की मांग उठाई. इसके बाद इन्होंने मुहम्मद अली जिन्ना को भी मुस्लिम लीग में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और उनके साथ पाकिस्तान की स्थापना के लिए काम किया. उन्हें पाकिस्तान में राष्ट्रकवि माना जाता है.

भारतीय उन्हें 'सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा' के रचनाकार के बतौर जानते हैं. और वो गाना ‘लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी...’ किसे नहीं याद होगा.

याद करते हैं इक़बाल की कुछ चुनिंदा पंक्तियां:

सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा

हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा...

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खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले

खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है...

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ढूंढता रहता हूं ऐ ‘इक़बाल’ अपने आप को,

आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूं मैं

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खुदा के बंदे तो हैं हजारों बनो में फिरते हैं मारे-मारे

मैं उसका बन्दा बनूंगा जिसको खुदा के बन्दों से प्यार होगा

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सितारों से आगे जहां और भी हैं

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