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हैदराबाद के मुस्लिम युवाओं पर बढ़ता इस्लामिक स्टेट का असर

फ़र्स्टपोस्ट की ओर से भारत में फैलते कट्टरपंथ पर तुफैल अहमद की चार लेखों की एक श्रृंखला आपके लिए पेश की जा रही है.

Tufail Ahmad Updated On: Dec 20, 2016 10:37 AM IST

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हैदराबाद के मुस्लिम युवाओं पर बढ़ता इस्लामिक स्टेट का असर

मुसलमानों में कट्टरता भारत में नहीं किसी और देश में बढ़ रही होगी. ऐसा कह कर हमारे यहां कई लोग इस सच से आंखे मूंद लेते हैं. लेकिन हकीकत यह है कि भारत में इस्लामी कट्टरता का मुद्दा पिछले कुछ समय से जोर पकड़ रहा है.इस्लामी कट्टरता की गंभीरता को समझने वाले लोग इससे निपटने के सुझाव भी दे रहे हैं. फ़र्स्टपोस्ट की ओर से भारत में फैलते कट्टरपंथ पर तुफैल अहमद की चार लेखों की एक श्रृंखला आपके लिए पेश की जा रही है. जिसमें वे ऐसी हालातों का जायजा ले रहे हैं जिनके कारण महाराष्ट्र, हैदराबाद, केरल और समूचे भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है. पेश है इस श्रृंखला का तीसरा हिस्सा...

महाराष्ट्र के अलावा भारत के हैदराबाद इलाके ने भी पिछले तीन साल के दौरान मुसलमान युवाओं में फैलते कट्टरपंथ के कारण अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में जगह बनाई है. महाराष्ट्र में कट्टरपंथ फैलने की एक वजह यह भी है कि मुख्य तौर पर हैदराबाद पहुंचने का रास्ता यहीं से गुजरता है.

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हैदराबाद, एक मुस्लिम शहर है. यह ऑटोमान साम्राज्य के दौर से लेकर तक खिलाफत के वैश्विक विचार से वैचारिक तौर पर जुड़ा हुआ है. हाल के वर्षों में हैदराबाद के दर्जनों युवकों को गिरफ्तार किया गया है. उन्हें आईएस में शामिल होने के लिए भारत छोड़ने से रोका गया है.

हैदराबाद के इस्लामी कट्टरपंथी निजाम ने मदीना-ए-सानी यानी मदीना के बाद दूसरा इस्लामी राज्य कह कर पाकिस्तान के विचार का समर्थन किया था. मदीना में पैगंबर मोहम्मद ने पहले इस्लामी राज्य की स्थापना की थी. निजाम ने तो ऑटोमन साम्राज्य के आखिरी खलीफा सुल्तान अब्दुल मजीद–द्वितीय की भी वित्तीय मदद की थी.

सुल्तान परिवार की महिलाओं की शादी निजाम परिवार में हुईं. 1920 के दशक के शुरुआत में 18 हजार भारतीय मुसलमान ऑटोमान खिलाफत की रक्षा के लिए लड़ने तुर्की गए थे. इनमें हैदराबाद के लोग भी शामिल थे.

इसी साल पाकिस्तानी अखबार रोजनामा एक्सप्रेस में पाकिस्तानी लेखक अब्दुल कादिर हसन ने लिखा कि खिलाफत आंदोलन के दौरान भारत की मुसलमान औरतों ने जिहाद करने के लिए तुर्कों को अपने गहने तोहफे में भेजे थे.

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औवेसी की राजनीति

हैदराबाद ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) के नेता असदुद्दीन औवेसी और उनके भाई अकबरुद्दीन औवेसी की कट्टरपंथी इस्लामी राजनीति का गढ़ है. इसलिए हैरानी की बात नहीं है कि असदुद्दीन ने आईएस के उन संदिग्धों को कानूनी मदद की पेशकश की जिन्हें हैदराबाद पुलिस ने हिरासत में लिया था.

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इस लेखक का तो कहना है कि असदुद्दीन औवेसी आधुनिक भारत के मोहम्मद अली जिन्ना हैं. जिस तरह जिन्ना ने भारत के मुसलमानों के लिए अलग देश मांगा था उसी तरह औवेसी भाई मुसलमानों के लिए कोटा मांग रहे हैं.

वैसे मुसलमानों की निचली जातियों को पहले ही आरक्षण नीति का फायदा मिल रहा है. औवेसी मांग करते हैं कि सिर्फ गरीब मुसलमानों को नहीं बल्कि सारे मुसलमानों को आरक्षण का फायदा मिलना चाहिए. औवेसी के लिए लोग नहीं बल्कि इस्लाम कसौटी है.ठीक वैसे ही जैसे बंटवारे से पहले जिन्ना के लिए थी.

कई इस्लामी मौलवी हैदराबाद के युवाओं के मन में इस्लामी कट्टरपंथ के बीज बो रहे हैं. मिसाल के तौर पर पेरिस में शार्ली एब्दो पत्रिका के दफ्तर पर हमले के बाद इस्लामी मौलवी मौलाना नसीरुद्दीन ने 13 जनवरी 2015 को नमाज-ए-जनाजा कराई. उन दो भाइयों सैद कोएची और शेरिफ कोएची के लिए थी जिन्होंने फ्रांसीसी पत्रिका के संपादकों की गोली मार कर हत्या की.

मौलवी ने नमाज-ए-जनाजा में आए लोगों को बताया कि दोनो पैगंबर मोहम्मद का बदला ले रहे थे.

अल्लाह सैद और शेरिफ को माफ करे, ये दो लड़के पैगंबर मोहम्मद के दुश्मनों से बदला लेते हुए शहीद हुए हैं.

इस संदर्भ में माफ करने का अर्थ हमले के लिए माफी नहीं है, बल्कि इसका मतलब उन गुनाहों से है जो उन दोनों ने अपनी जिदंगी में पहले किए हो सकते हैं. ऐसे में, हैदराबाद में इस्लामिक स्टेट के समर्थन में कट्टरपंथ फैलने पर हैरानी नहीं होनी चाहिए. सबसे पहले इसका पता 2014 में चला और यह तब से लगातार जारी है.

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29 जून को हैदराबाद में 10 ठिकानों पर छापों के दौरान पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया. इनमें अब्दुल्लाह बिन अहमद अल अमूदी, हबीब मोहम्मद, मोहम्मद इब्राहिम याजदानी उर्फ इब्बु, मोहम्मद इलियास याजदानी और मुजफ्फर हुसैन रिजवान शामिल थे.

ये लोग आईएस के नाम पर मॉल और धार्मिक स्थलों पर हमलों की योजना बना रहे थे. 29 जून को हिरासत में लिए गए अन्य दो लोगों को 12 जुलाई को गिरफ्तार किया गया. ये हैं नेमतुल्लाह हुसैनी उर्फ अबु दर्दा जो आईएस की हैदराबाद शाखा का प्रमुख है. दूसरा है मोहम्मद अताउल्लाह रहमान, जो लोगों को अबु बकर अल बगदादी के प्रति वफादारी की शपथ दिलाता था.

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आईएस का आकर्षण

29 जून को हुई गिरफ्तारियों से एक बड़ी आतंकवादी साजिश का पता चला. इससे पहले गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश भर में मारे गए छापों के दौरान कम से कम 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. ये लोग जुनूद-उल-खलीफा-ए-हिंद (भारतीय खिलाफत की सेना) यानी आईएस की भारतीय सेना का हिस्सा थे.

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इनमे में से जिन चार को हैदराबाद में हिरासत में लिया गया, उनमें से दो को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार किया गया: नफीज खान (एक बेरोजगार युवक) और मोहम्मद शरीफ मोइउद्दीन खान. हालांकि हाल के सालों में भारत में जो भी संदिग्ध आतंकवादी पकड़े गए हैं उनमें ज्यादातर की उम्र 35 साल से कम है.

कट्टरपंथ किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है. मिसाल के तौर पर, मोइउद्दीन खान एक इलेक्ट्रिशियन है और उसकी उम्र 54 साल है. भारत या फिर अन्य जगहों पर होने वाली गिरफ्तारियों से साफ है कि जिहादी कुनियत (मनगढंत नाम) इस्तेमाल करते हैं ताकि पुलिस को उन्हें पकड़ने और फिर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने में मुश्किलें आए.

जिहादी, मुसलमानों की भावानओं से खेलते हैं. 20वीं सदी के दौरान एक खिलाफत आंदोलन उभरा और इसे हिजरत आंदोलन कहा गया. इसमें मौलाना अबुल कलाम आजाद, मौलाना अब्दुल बारी, मौलाना मोहम्मद अली और मौलाना अब्दुलमजीद सिंधीहाद जैसे कई मुसलमान नेताओं ने एक फतवा जारी कर भारत को दार-उल-हर्ब (युद्ध का घर) घोषित किया. मुसलमानों से दार-उल-इस्लाम (इस्लाम के घर) में जाने को कहा, जो सबसे नजदीक में अफगानिस्तान था.

इसी धार्मिक कारण से अबु बकर अल बगदादी ने इस्लामिक स्टेट की घोषणा की है. दुनिया भर के मुसलमानों से सीरिया पहुंचने को कहा है. 2014 में जुलाई से सितंबर के बीच हैदाराबाद और उसके नजदीक करीमनगर इलाके से एक लड़की समेत 15 युवाओं को कोलकाता एयरपोर्ट पर रोका गया. वहां से वे सीरिया के लिए रवाना होने की कोशिश में थे.

वर्ष 2015 में भी कट्टरपंथ फैलाने से जुड़े कई मामले सामने आए. जनवरी 2015 में सलमान मोहिउद्दीन को गिरफ्तार किया गया क्योंकि वह सीरिया जाकर आईएस में शामिल होने के लिए दुबई जाने वाली फ्लाइट में चढ़ने की कोशिश कर रहा था. मोहिउद्दीन एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट है और उसे सोशल मीडिया के जरिए यूएई में रहने वाली अफ्शा जबीन उर्फ निकी जोसेफ ने कट्टरपंथी बनाया.

मूल रूप से हैदराबाद की जबीन के तीन बच्चे हैं और उसका पति मुसलमान बनने से पहले एक हिंदू था. जबीन को भारत प्रत्यर्पित किया गया और सिंतबर 2015 में हैदराबाद एयरपोर्ट पर पहुंचते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

आईएस में शामिल होने वाला हैदराबाद का एक युवक मार्च 2015 में सीरियाई सेना के हाथों मारा गया. गूगल के एक पूर्व कर्मचारी को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब दो दर्जन से ज्यादा युवाओं को हैदराबाद के एयरपोर्ट पर रोक दिया गया. वे भी आईएस में भर्ती होने के लिए भारत से रवाना होने की फिराक में थे.

नाराजगी को भड़काना

हैदराबाद के तीन युवकों अब्दुल्लाह बासित, माज हसन फारूक और सैयद उमर फारूक हुसैनी को 27 दिसंबर 2015 को गिरफ्तार किया गया. वे भी आईएस में भर्ती होने जा रहे थे. उन्हें नागपुर में रोका गया जहां से वे श्रीनगर जा रहे थे.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी टी प्रभाकर राव ने बताया, 'उनका दावा है कि उनका आखिरी लक्ष्य दार-उल-इस्लाम है और उन्हें अफगानिस्तान पहुंचने में आसिया अंदराबी या (पाकिस्तान स्थित हिज्बुल मुजाहिदीन प्रमुख सैयद) सलाहुद्दीन मदद कर सकता है.'

वहां से फिर आगे वे इराक की तरफ बढ़ेंगे. उनका मानना है कि अबु बकर अल बगदादी ही उनका सर्वोच्च नेता है, जिसके नेतृत्व में वो दार-उल-इस्लाम को हासिल कर सकते हैं.

इन तीनों के बारे में अहम बात यह है कि ये उन 15 लोगों में शामिल थे जिन्हें 2014 में कोलकाता में रोका गया था और काउंसलिंग के बाद रिहा कर दिया गया था.

तीन लोगों की गिरफ्तारी के सिलसिले में तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक अनुराग शर्मा ने पिछले साल 30 दिसंबर को कहा था, 'कुल मिलाकर 20 युवक राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की तरफ आकर्षित हुए. जिनकी बाद में काउसलिंग हुई.'

यह आंकड़ा कोलकाता में हुई गिरफ्तारियों से अलग है. हैदराबाद को लेकर इस बात का जिक्र भी होना चाहिए कि हिंदुओं द्वारा किए गए 2007 के मक्का मस्जिद धमाकों के बाद पुलिस ने दर्जनों निर्दोष मुसलमानों को गिरफ्तार कर लिया था. जिसे लेकर मुसलमानों में नाराजगी है.

कट्टरपंथ धार्मिक विद्वानों, उर्दू प्रेस और समुदाय की नाराजगी के चलते फैल रहा है और राजनेता इस नाराजगी को भड़काते हैं.

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