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भोजपुरी संगीत में नई पीढ़ी: बहन गाए और बहनें भी सुन सकें

भोजपुरी में पब्लिक डिमांड से अलग हटकर गीत-संगीत बनाने की जरूरत है

Arun Tiwari Arun Tiwari | Published On: Dec 15, 2016 09:25 AM IST | Updated On: Dec 15, 2016 09:39 AM IST

भोजपुरी संगीत में नई पीढ़ी: बहन गाए और बहनें भी सुन सकें

देश में रीजनल सिनेमा और इसके संगीत का प्रभाव बढ़ रहा है. क्षेत्रीय कलाकारों की लोकप्रियता अपने इलाकों में मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा से कतई कम नहीं है. यूट्यूब पर इन कलाकारों की लोकप्रियता कई बार हिंदी सिनेमा के वीडियो से भी बहुत ज्यादा होती है. इन कलाकारों की लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए हम इस पर एक सीरीज शुरू कर रहे हैं. इसी क्रम में हमने भोजपुरी की गायिका चंदन तिवारी से बातचीत की. चंदन बीते कुछ सालों में तेजी से भोजपुरी संगीत के फलक पर आगे आई हैं...

आपने भोजपुरी सिनेमा में प्रचलित गीतों से हटकर भिखारी ठाकुर, महेंदर मिसिर और रघुवीर नारायण सिंह जैसे दिग्गज लेखकों को ही क्यों चुना?

आम भोजपुरी संगीत पब्लिक डिमांड पर बनाया जा रहा है. लोग इसे काफी पसंद भी करते हैं. लेकिन मैंने शुरुआत से ही यह तय किया था कि इस भेड़चाल में नहीं फंसना है. इन गायकों को चुनने के पीछे भी यही वजह थी. भिखारी ठाकुर को ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहा जाता है. भिखारी ठाकुर को सुनकर ऐसा लगता है जैसे भोजपुरी अंचल की साक्षात तस्वीर आपके सामने हो. ऐसा ही महेंदर मिसिर और रघुवीर जी के लिखे गीतों के साथ भी है.

फिल्मों में गाने की तरफ ध्यान क्यों नहीं दिया?

महुआ चैनल पर ‘जिलाटॉप’ कार्यक्रम प्रसारित होता था. यह बहुत लोकप्रिय था. इसमें मैं सेकंड रनरअप थी. इसके बाद कई जानने वालों ने यह सलाह दी कि फिल्मों की तरफ रुख करो. मुझे कई ऑफर भी आए लेकिन मुझे उस तरफ जाना नहीं था. मुझे यहीं रहना है अपनी मिट्टी में और अपनी बोली के लिए काम करना है.

क्या लगता है इस समय भोजपुरी सिनेमा-संगीत में ऐसे लेखकों की कमी हो गई है, जो भिखारी ठाकुर जैसे लेजेंड्री लेखकों की तरह पुरबिया आंचलिकता को समझें?

सच कहूं तो ऐसा नहीं है. कई लेखक हैं जो बेहतर लिखते हैं लेकिन मेनस्ट्रीम के साथ यह समस्या आती है. इसमें पब्लिक डिमांड ही असली माई-बाप होती है. कई बार गीत-लेखकों का असली रूप लोगों के सामने आ ही नहीं पाता है. ऐसा गायकों के भी साथ है. लेकिन कई बार यह अपनी पसंद की भी बात होती है. अगर आप को कुछ हटकर करना है तो आप अपने रास्ते चुन सकते है.

पब्लिक डिमांड पर आपकी क्या राय है?

भोजपुरी में पब्लिक डिमांड के मायने लगभग सभी भोजपुरी बोलने वाले जानते हैं. ट्रेन, बस, सड़क पर चलते हुए कई बार आपको ऐसे गाने सुनने को मिल जाएंगे जो असहज कर देते हैं. यही वजह है कि हमारे ‘पुरबिया तान’ का मकसद शुरू से ही यह रहा है कि ‘बहन गाए और बहनें भी सुन सकें’. हम इसी पर आगे बढ़ेंगे, जिसने हमें सफल किया है.

chandan

चंदन तिवारी की फेसबुक वॉल से

यूट्यूब और साउंड क्लाउड पर अपने गानों को अपलोड करने की कब सोची?

महेंदर मिसिर को सभी जानते हैं. उनका जन्मदिन था तो मैंने उन्हीं का एक गाना पहली बार अपलोड किया. उस गाने को चालीस हजार लोगों ने सुना. इससे हमारा उत्साह बढ़ा. फिर हमने अपना यू ट्यूब चैनल भी शुरू किया जो मेरे ही नाम से है.

क्या लगता है कि आम प्रचलित संगीत से अलग धारा बनाने में कितना जोखिम है?

देखिए जोखिम तो है ही. लेकिन अगर आप ठान लें और उसके नतीजे भी बेहतर आने लगे तो फिर ज्यादा सोचने जैसा कुछ रह नहीं जाता. आप उसी रास्ते को पुख्ता कीजिए जिस पर आप चलना चाहते हैं.

आगे और क्या नया करने वाली हैं?

अभी लगातार शो कर रही हूं. लोग पसंद कर रहे हैं. इसके अलावा अभी और कई गीतों के संग्रह और भजनों पर भी काम कर रही हूं. सब जल्दी ही लोगों तक पहुंचेगा.

 

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