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5 सालों बाद फिर हाजी अली दरगाह में पहुंचीं महिलाएं

लंबी कानूनी लड़ाई के बाद महिलाओं ने 5 साल बाद फिर हाजी अली दरगाह में प्रवेश

IANS Updated On: Nov 29, 2016 06:43 PM IST

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5 सालों बाद फिर हाजी अली दरगाह में पहुंचीं महिलाएं

लंबी कानूनी लड़ाई और विरोध प्रदर्शनों के बाद महिलाओं ने 5 साल बाद फिर हाजी अली दरगाह में प्रवेश किया. सुप्रीम कोर्ट ने अब महिलाओं को दरगाह के गर्भगृह के अंदर भी प्रवेश करने की अनुमति भी दे दी है. ऐसा पहली बार हो रहा है.

मंगलवार महिला कार्यकर्ताओं के एक समूह ने मुंबई की हाजी अली दरगाह में प्रवेश किया. इस दौरान देशभर से 75-80 महिलाओं का एक समूह मुंबई के वरली तट के एक छोटे से टापू पर स्थित दरगाह में इकट्ठा हुआ.

भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन (बीएमएमए) की सहसंस्थापक नूरजहां एस. नियाज ने आईएएनएस से पहले कहा था, ‘अब यह सामान्य होगा, हमने पुलिस या दरगाह ट्रस्ट को सूचित नहीं किया है. हम मत्था टेकेंगे और बाहर आ जाएंगे.’

नियाज ने कहा,

‘यह समानता, लैंगिक भेदभाव खत्म करने और हमारे संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने की लड़ाई थी. हम खुश हैं कि अब महिलाओं और पुरुषों को पवित्र गर्भगृह में प्रवेश का समान अधिकार मिलेगा.’

दरगाह के एक ट्रस्टी सुहैल खांडवानी ने बताया कि दरगाह में प्रवेश के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग प्रवेशद्वार होंगे और किसी को भी पीर की मजार छूने की इजाजत नहीं दी जाएगी.

नई व्यवस्था के तहत पुरुषों और महिलाओं को दरगाह में जाने का समान अधिकार होगा और सभी श्रद्धालु मजार से करीब दो मीटर की दूरी से दुआ कर सकेंगे.

जून, 2012 तक महिलाओं को मुस्लिम संत सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार के गर्भगृह तक प्रवेश की अनुमति थी, लेकिन उसके बाद गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. वर्ष 2014 में बीएमएमए और कई अन्य संगठनों ने हाजी अली दरगाह के इस कदम को अदालत में चुनौती दी थी.

न्यायमूर्ति वी. एम. कनाडे और न्यायमूर्ति रेवती मोहिते-धेरे की खंडपीठ ने 26 अगस्त को फैसला सुनाते हुए महिलाओं को दरगाह के प्रतिबंधित मजार क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दे दी थी.

सर्वोच्च न्यायालय ने 24 अक्टूबर को महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार के आधार पर अपने फैसले में महिलाओं को दरगाह में प्रवेश की अनुमति दी थी.

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