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नहीं होगा फ्लिपकार्ट के साथ स्नैपडील का मर्जर

दोनों पक्षों में मूल्यांकन और शर्तों को लेकर मतभेद के कारण बातचीत टूटी है

Bhasha Updated On: Jul 31, 2017 09:11 PM IST

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नहीं होगा फ्लिपकार्ट के साथ स्नैपडील का मर्जर

ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील ने फ्लिपकार्ट द्वारा 95 करोड़ डालर के प्रस्तावित मर्जर को लेकर जारी बातचीत तोड़ दी है और इस तरह देश के ई-कॉमर्स सेक्टर में अबतक के सबसे बड़े सौदे की संभावना खत्म हो गई है. समझा जाता है कि दोनों पक्षों में मूल्यांकन और शर्तों को लेकर मतभेद के कारण बातचीत टूटी है. संकट में फंसी स्नैपडील के अधिग्रहण को लेकर फ्लिपकार्ट से बातचीत मार्च में शुरू हुई थी.

स्नैपडील के प्रवक्ता ने फ्लिपकार्ट का नाम लिए बिना कहा, ‘स्नैपडील पिछले कई महीनों से रणनीतिक विकल्पों को तलाश रही है. कंपनी ने अब स्वतंत्र रास्ता अपनाने का निर्णय किया है और इसके परिणामस्वरूप रणनीतिक सौदे संबंधी सभी बातचीत को खत्म कर रही है.’

स्वतंत्र रास्ता अपनाएगी स्नैपडील 

प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अब अपनी नई रणनीति पर आगे बढ़ेगी और इससे कंपनी को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर होने की उम्मीद है. स्नैपडील में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली जापान की दिग्गज कंपनी साफ्टबैंक ने स्नैपडील और फ्लिपकार्ट की बातचीत भंग होने के बाद कहा कि वह उद्यमियों और उनके दृष्टिकोण का समर्थन करती है.

साफ्टबैंक के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘हम स्वतंत्र रास्ता अपनाने के फैसले का सम्मान करते हैं. हमारा स्नैपडील-2 रणनीति के परिणाम को लेकर नजरिया सकारात्मक है. हम गतिशील भारतीय ई-कॉमर्स सेक्टर में निवेश में बने हुए हैं.’

मर्जर को लेकर बातचीत साफ्टबैंक ही आगे बढ़ा रही थी. सूत्रों के अनुसार सौदे की जटिलता के कारण बातचीत समाप्त हुई. सौदे में क्षतिपूर्ति से लेकर गैर-प्रतिस्पर्धी उपबंध के साथ काफी शर्तें थी. उसने कहा कि गुरुग्राम की ऑनलाइन खुदराबाजार कंपनी स्नैपडील इन शर्तों के पक्ष में नहीं थी. यह सौदा रतन टाटा, अजीम प्रेमजी की निवेश इकाई प्रेमजीइनवेस्ट तथा स्नैपडील के दूसरे चर्चित अल्पांश निवेशकों के समर्थन पर भी निर्भर करता.

स्नैपडील एक समय भारत में ई-कॉमर्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी थी लेकिन प्रतिद्वंद्वी कंपनी अमेजन और फ्लिपकार्ट से कड़ी प्रतिस्पर्धा से उसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा और कंपनी का मूल्यांकन फरवरी 2016 में 6.5 अरब डालर के सर्वोच्च स्तर से घट कर चर्चाओं के अनुसार करीब एक अरब डालर तक आ गया है. देश के उभरते ई-कॉमर्स सेक्टर में अमेरिका की अमेजन और घरेलू कंपनी फ्लिपकार्ट के बीच कड़ी टक्कर है.

फ्लिपकार्ट ने विलय के लिए 95 करोड़ डॉलर की पेशकश की थी 

इस क्षेत्र की कंपनियों को बुनियादी ढांचा तैयार करने, ऑनलाइन विक्रेताओं को जोड़ने के लिए काफी धन निवेश करना पड़ता है. स्नैपडील ने हाल ही में अपने डिजिटल प्लेटफार्म फ्रीचार्ज एक्सिस बैंक को 385 करोड़ रुपए में बेचने पर सहमति जताई. उसके बाद अधिग्रहण को लेकर बातचीत समाप्त करने की बात सामने आई है. फ्लिपकार्ट के साथ बातचीत पांच महीने से अधिक समय तक चली.

साफ्टबैंक ने शुरूआती निवेशकों कालारी और नेक्सस वेंचर पार्टनर्स को राजी करने के लिए दिन रात काम किया था. ये दोनों कंपनी के बोर्ड में भी हैं. उनकी मंजूरी के बाद स्नैपडील के निदेशक मंडल ने फ्लिपकार्ट के 80 से 85 करोड़ डालर (करीब 5,500 करोड़ रुपए) की पेशकश को ठुकरा दिया था. बाद में फ्लिपकार्ट ने पेशकश को बढ़ाते हुए 90 से 95 करोड़ डालर किया. हालांकि इसमें कई शर्तें थी जिसे कंपनी ने समर्थन नहीं किया.

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