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जीएसटी: सेवा कर में छिपे हैं महंगाई के सूत्र

गुड्स एंड सर्विस टैक्स या माल और सेवा कर दरअसल देश की महत्वपूर्ण सेवा अर्थव्यवस्था को ज्यादा बेहतर तरीके से दुह पाएगा

Alok Puranik Alok Puranik Updated On: Jun 30, 2017 07:27 PM IST

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जीएसटी: सेवा कर में छिपे हैं महंगाई के सूत्र

इस देश में उच्च वर्ग की जो स्थिति है, उसे करों की चिंता करने की जरूरत नहीं है, निम्न आय वर्ग के लिए जीएसटी कोई खास परेशानी लानेवाला नहीं है. हां, मध्यवर्ग को जरूर अपनी जेब को ज्यादा हल्की करवाने का इंतजाम कर लेना चाहिए.

जिंदगी काटने से जीवन शैली तक

जिंदगी काटी जाती है, जी भी जाती और जीवन शैली खास अपनाई भी जाती है. जिंदगी काटनेवाले अर्थव्यवस्था के नीचे पायदान पर होते हैं. जीवन शैली की ओर जाने का मतलब कि संबंधित व्यक्ति कुछ आर्थिक पायदान ऊपर चढ़ आया है.

गुड्स एंड सर्विस टैक्स या माल और सेवा कर दरअसल देश की महत्वपूर्ण सेवा अर्थव्यवस्था को ज्यादा बेहतर तरीके से दुह पाएगा. अधिकांश सेवाओं की कर दर 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 18 पर्सेंट हो गई है. 15 से 18 तक का सफर यूं तो तीन पर्सेंट बिंदुओँ का है, पर इसमें मध्यवर्ग की जेब से बड़ी रकम निकालने के इंतजाम हो गए हैं. इसकी वजह भी साफ है कि सेवाओं का उपभोग ज्यादातर मध्यवर्ग और उच्च मध्यवर्ग ही करता है.

ऐसा नहीं है कि निम्न आय वर्ग में सेवाओं का प्रयोग नहीं होता. पर आनुपातिक तौर पर देखें, तो आईआईटी की कोचिंग, मोबाइल के बिल, फाइव स्टार होटलों में स्टे- ये सब निम्न आय वर्ग के मामले नहीं होते. इसलिए सरकार जोर-शोर से इश्तिहारों में ये बताने में जुटी है कि गुड़, गेहूं, दूध, अन-ब्रांडेड शहद, ताजी सब्जियों, अन-ब्रांडेड आटे, अन-ब्रांडेड मैदा, अन-ब्रांडेड बेसन, अंडे, दही, लस्सी, बिना पैकिंग के पनीर, नमक, फूलवाली झाड़ू पर जीएसटी 0 पर्सेंट है यानी कोई जीएसटी नहीं है.

चीनी, चाय, खाने के तेल, मिल्क पाऊडर, घरेलू एलपीजी, 500 रुपए तक फुटवीयर, 1000 रुपए तक कपड़ों, अगर बत्ती पर सिर्फ 5 पर्सेंट जीएसटी है. आईसक्रीम, हेयर आयल, टूथपेस्ट, साबुन वगैरह पर 18 पर्सेंट का जीएसटी है. तो जीएसटी ने करामात यह की है कि सर्विस टैक्स अधिकांश सेवाओं का करीब 15पर्सेंट से बढ़ाकर 18 पर्सेंट कर दिया है.

ब्रांड का क्रेज आय बढ़ने के साथ बढ़ता है. अन-ब्रांडेड आइटम सिर्फ प्रयोग करने के लिए होते हैं, ब्रांड शुदा आइटम स्टेटस बढ़ाने के लिए भी काम आते हैं. यानी कुल मिलाकर ब्रांड वाला स्टेटस चाहिए होगा तो फिर जेब ज्यादा ढीली करने की तैयारी भी करनी होगी.

अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े हिस्से यानी दो तिहाई यानी सेवा क्षेत्र पर कर में बढ़ोत्तरी

भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा रोल अब सेवा क्षेत्र का है. भारत की सकल घरेलू उत्पाद का करीब 66 पर्सेंट सेवाओं से आता है, वो सेवाएं जो टेलीकॉम सेवा, कोचिंग सेवा, होटल, इंश्योरेंस, क्रेडिट कार्ड की शक्ल में हमारे सामने आती है. अधिकांश सेवाओं पर अब तक कर 15 पर्सेंट के आसपास था, अब यह बढ़कर 18 पर्सेंट हो गया है. यानी अर्थव्यवस्था का करीब दो तिहाई हिस्सा करीब 15 पर्सेंट के मुकाबले 18 पर्सेंट टैक्स के दायरे में आ गया है. सेवा कर 15 से 18 पर्सेंट तक जाते ही उन जेबों पर बोझ बढ़ा देगा, जिनसे तमाम तरह की सेवाओँ के भुगतान होते हैं.

जीएसटी को लेकर कहा जा रहा है कि आजाद भारत का यह सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म है

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15 से 18 पर्सेंट यानी हर हजार पर तीस रुपए ज्यादा

इंश्योरेंस प्रीमियम से लेकर क्रेडिट कार्ड तक, मोबाइल पेमेंट से लेकर कोचिंग सर्विस तक पर सर्विस टैक्स 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 18 पर्सेंट होना है. इसका मतलब यह हुआ कि  अगर मोबाइल का बिल 1000 रुपए का है तो उस पर तीस रुपए ज्यादा देने की तैयारी करें अगर मोबाइल बिल 3000 रुपए का आता है, तो नब्बे रुपए ज्यादा देने पड़ेंगे.

भारत में मध्यवर्गीय परिवारों में आईआईटी एक सपने की तरह आता है, उसकी कोचिंग कोटा समेत तमाम शहरों में फैली हुई है. आईआईटी की कोचिंग हजारों में नहीं लाखों की कीमत पर आती है, एक लाख रुपए पर तीन हजार रुपए ज्यादा देने होंगे. यानी अगर बच्चे की कोचिंग की फीस तीन लाख  रुपए है, तो फिर नौ हजार रुपए पहले के मुकाबले ज्यादा देने होंगे.

ब्रांडेड महंगाई

ब्रांडेड, एक तय सीमा से ऊपर की रेट के सामान और सेवाएं जैसे जूते, कपड़े, होटल महंगे होंगे. हजार से ऊपर के कपड़े खरीदेंगे, तो जीएसटी 12 पर्सेंट लगेगा. 1000 रुपए से नीचे के होटल कमरों पर टैक्स नहीं है, अगर 7500 रुपए से ऊपर के होटल कमरे लेनेवाले 28 पर्सेंट जीएसटी देंगे. यानी स्टैंडर्ड बढ़ाएंगे, तो सरकार के खजाने में योगदान करना भी आपकी जिम्मेदारी होगी. कुल मिलाकर मध्यवर्ग को ज्यादा महंगाई के लिए तैयार हो जाना चाहिए.

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