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क्यों नाकाम हो रही है देश के बड़े कर्जदारों के खिलाफ चल रही मुहिम

बैंकों से कर्ज लेकर न चुकाने वाले देश की सबसे बड़ी 12 कंपनियों से कर्ज वसूलने को लेकर समस्याएं सामने आने लगी हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 09, 2017 09:45 PM IST

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क्यों नाकाम हो रही है देश के बड़े कर्जदारों के खिलाफ चल रही मुहिम

पिछले कई महीनों से देश में शराब कारोबारी विजय माल्या को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं. माल्या के भागने के बाद देश में यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि बैंकों के और बड़े कर्जदारों के खिलाफ भी सरकार लगाम लगाए.

सरकार ने अपनी तरफ से कार्रवाई भी शुरू कर दी. कई बैंकों के 12 बड़े कर्जदार कंपनियों सहित कुछ और कंपनियों पर आरबीआई ने नकेल कसना शुरू कर दिया. लेकिन, सरकारी बैंकों की सबसे बड़ी 12 कर्जदार कंपनियों से कर्ज वसूलने की मुहीम में अब समस्या आनी शुरू हो गई है. पिछले दिनों जब बैंकों ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की तो इस मुहीम में बहुत सुराख मिले.

देश की कई बैंकों ने इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की. बैंकों के बीच इस बात को लेकर चर्चा हुई कि जबतक दर्जन भर कंपनियों के खातों में कर्ज वसूलने की मुहिम एक मुकाम तक नहीं पहुंचती है तब तक देश के और नए कर्जदारों के खातों में हाथ डालने से बचना चाहिए.

इस बैठक से जुड़े सूत्रों का कहना है कि देश में कर्ज वसूली के नए नियम लागू होने के बाद बैंकों के बीच यह चर्चा हुई कि जिन कंपनियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं, उनमें से कई ने कर्ज चुकाने के लिए नए प्रस्ताव दिए हैं.

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एक अधिकारी के मुताबिक कुछ कर्जदाताओं के प्रस्ताव को बैंकों ने काफी आकर्षक माना और कहा है कि इस प्रस्ताव पर भरोसा किया जा सकता है. बैंकों का कहना था कि कुछ समय के लिए इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए.

आरबीआई सूत्रों का भी कहना है कि कर्जदाताओं के इस नए प्रस्ताव पर आरबीआई भी विचार करेगी. आरबीआई यह समझने की कोशिश करेगी कि कहीं कर्जदाताओं की यह नई चाल तो नहीं है. बैंकों का कहना था कि कंपनियों में कार्यरत हजारों लोगों के रोजगार का मुद्दा भी कंपनियों ने उठाया. पूरी प्रक्रिया का यह एक ऐसा पहलू है जिसे बैंक नजरअंदाज नहीं करना चाहते.

कर्ज वसूली के मुद्दे पर बैंकों का कहना था कि हमें कई मोर्चे पर लड़ाई लड़नी पड़ रही है. एक तरफ मामला देश की अदालतों में चल रहे हैं तो दूसरी तरफ नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में मामले को लगातार रखना पड़ रहा है.

हम आपको बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कर्ज वसूलने के लिए इन 12 खाताधारकों के अलावा दूसरी सूची भी तैयार कर रही है. आरबीआई के सूत्रों का कहना है कि आरबीआई ने अब तक इन 12 कंपनियों के अलावा लगभग 55 कर्जदाताओं की सूची तैयार कर ली है.

हम आपको बता दें कि बहुत गंभीर हो चुकी इस समस्या के समाधान के लिए आरबीआई ने एक अंतर सलाहकार समिति का गठन इसी साल के जून महीने में किया था. इस समिति ने लगभग एक दर्जन कंपनियों के खिलाफ बैंकक्रप्सी के तहत कर्ज वसूलने की इजाजत बैंकों को दे दी थी.

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एस्सार स्टील, भूषण स्टील, इलेक्ट्रोस्टील, एमटेक ऑटो, मोनेट इस्पात, भूषण पावर, आलोक इंडस्ट्रीज, लैंको इंफ्रा, इरा इंफ्रा, जेपी इंफ्राटेक, एबीजी शिपयार्ड और ज्योति स्टकचर्स जैसे कंपनियों की खाताओं की जांच पूरी कर ली गई. देश में विजय माल्या जैसे करीब 5 हजार 275 व्यवसाई डिफॉल्टर हैं, जो बैंकों का पैसा नहीं लौटा रहे हैं. इन डिफॉल्टरों के पास बैंकों के 56 हजार 621 करोड़ रुपए पड़े हुए हैं.

कंपनी के हिसाब से देखें तो मुंबई की विनसम डायमंड्सक एंड ज्वेलरी सबसे बड़ी डिफॉल्टर हैं, जिसके ऊपर बैंकों का 3 हजार 263 रुपए का कर्ज बकाया है. क्रेडिट इंफोर्मेशन ब्यूरो के मुताबिक देश में बैंकों से कर्ज लेकर ना लौटाने वाले उद्योगपतियों की संख्या 5 हजार 275 है. इन कर्जदारों पर बैंकों का कुल 56 हजार 521 करोड़ रुपए का कर्जा है.

हम आपको बता दें कि क्रेडिट इंफोर्मेशन ब्यूरो एक ऐसी कंपनी है, जो सभी बैंकों ने मिलकर बनाई है. इस कंपनी का काम कर्जदारों की जानकारी को जमा करना होता है. साल 2002 में बकाएदारों पर कुल कर्ज महज 6 हजार 291 करोड़ रुपए था. लेकिन पिछले 15 सालों में यह बढ़कर 56 हजार 521 करोड़ रुपए हो गया है.

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