यमुना की गंदगी पर चिंतित सोनल मानसिंह, बोलीं- कृष्ण बनकर करनी होगी सफाई

उन्होंने अपील की कि जैसे पिछले जमाने में कपड़े और कागज की थैलियां इस्तेमाल होती थीं, वैसे ही आज भी इस्तेमाल किया जाए

FP Staff

पद्मविभूषण से सम्मानित कलाकार डॉ. सोनल मानसिंह ने ‘इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट’ को स्वच्छ भारत अभियान के लिए बड़ा खतरा बताया. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और रागगीरी की साझा प्रस्तुति ‘सुनेंगे तभी तो सीखेंगे’ सीरीज के तहत स्वच्छ भारत अभियान के प्रति छात्राओं को जागरूक करते हुए डॉ. मानसिंह ने छात्राओं को यमुना नदी और कालिया दमन का किस्सा बहुत ही रोचक तरीके से सुनाया. उन्होंने छात्राओं से कहा कि यमुना को कालिया नाग से साफ करने की जो जिम्मेदारी भगवान कृष्ण ने उठाई थी, वो अब आज की पीढ़ी को उठानी होगी.

उन्होंने कहा कि अगर हम अपने दिल दिमाग को साफ कर लें तो स्वच्छ भारत का सपना पूरा होगा. डॉ. सोनल मानसिंह ने ये भी कहा कि पॉलिथीन को लेकर अभी जागरूकता और ज्यादा फैलानी होगी. अदालतों के कड़े रुख के बाद भी लोग पॉलिथीन के इस्तेमाल को रोकने पर गंभीर नहीं हैं. उन्होंने अपील की कि जैसे हमारे बुजुर्गों के जमाने में कपड़े और कागज की थैलियां इस्तेमाल होती थीं उन्हें ही इस्तेमाल किया जाए. उन्होंने कहा कि नौजवानों को भविष्य बताने भर से काम नहीं चलेगा बल्कि अब साथ साथ इससे आगे की बात भी करनी होगी. उन्होंने अपने जीवन के कई दिलचस्प किस्से सुनाएं जो छात्राओं के लिए प्रेरणादायी रहे.


इस मौके पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं छात्र छात्राओं के मन में एक सकारात्मक तस्वीर उभारती हैं. जिससे उन्हें अपनी पसंद नापसंद का पता चलता है. डॉ. सोनल मानसिंह के व्याख्यान के बाद कथक कलाकार समीक्षा शर्मा ने छात्राओं को कथक की बारीकियों की जानकारी दी. उनके साथ मोहित गंगानी, अयूब और विधा ने संगत की. कार्यशाला के आखिर में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के कलाकार संजय श्रीवास्तव ने छात्राओं को रंगमंच की बारीकियों से परिचित कराया. आखिर में रागगीरी के संस्थापक शिवेंद्र कुमार सिंह ने कहाकि इस तरह की कार्यशालाओं का मकसद अपनी अगली पीढ़ी को भारतीय संगीत और संस्कृति के प्रति जागरूक करने के साथ साथ उन्हें अपनी जिम्मेदारियों से परिचित कराना भी है.