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Chhath Puja 2017: इन गानों के बिना अधूरी है छठ की रौनक

छठ के पर्व पर कई गाने लिखे और गाए गए हैं और इनमें से कुछ गीतों को 'छठ' का क्लासिक एंथम भी माना जाता है

FP Staff Updated On: Oct 24, 2017 11:02 AM IST

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Chhath Puja 2017: इन गानों के बिना अधूरी है छठ की रौनक

बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाने वाले पर्व छठ पूजा की शुरुआत हो चुकी है. भगवान भास्कर और छठी मैय्या के लिए किया जाने वाला ये चार दिवसीय त्योहार उत्तर भारत के एक बड़े जनसमूह के लिए भारी महत्व रखता है.

इन दिनों देश के कोने-कोने से बिहार और उत्तर प्रदेश जाने के लिए रेलवे स्टेशनों पर भारी भीड़ हो जाती है और रेलवे टिकट के लिए हो रही मारामारी खबर बनती है. वहीं छठ से जुड़ी कुछ खूबसूरत चीजें भी होती हैं, जो सुर्खियां बटोरती हैं.

ये है संगीत, छठ के पर्व पर कई गाने लिखे और गाए गए हैं और इनमें से कुछ गीतों को 'छठ' का क्लासिक एंथम भी माना जाता है. शारदा सिन्हा, देवी, अनुराधा पौडवाल और इन दिनों स्तुति सिन्हा की आवाज़ में इन गीतों को हर साल छठ के अवसर पर सुना जाता है.

केलवा के पात पर

शारदा सिन्हा की आवाज़ में गाया गया यह गीत छठ का एक हल्की शरारत वाला गाना है जिसमें भगवान सूरज से व्रती निकल आने का अनुरोध कर रहें है. इस गीत में सूर्य भगवान को सुबह का अर्घ्य देते व्रतियों की बात कही गई है. हालांकि इस गीत को अनुराधा पौडवाल और देवी ने भी अपने अंदाज़ में गाया है लेकिन शारदा सिन्हा के इस गीत को 47 लाख़ से ज्यादा बार देखा गया है.

हो दीनानाथ

छठ पर्व, भगवान सूर्य की अराधना का भी पर्व है और ऐसे में सूर्य पर बना पहला गीत 'हो दीनानाथ' इस पर्व का एंथम भी माना जाता है. शारदा सिन्हा की आवाज़ में इस गीत को यूट्यूब पर 1 करोड़ से ज्यादा बार देखा और सुना गया है.

पहिले पहिल

ये गाना छठ के एक पुराने मशहूर गाने का लेटेस्ट रीमेक है. यह शहरी लोगों को भी छठ को अपनाने की बात कहता है. दरअसल छठ एक लंबा त्योहार है और इसे करना भी बेहद कठिन है. आजकल की भागती दौड़ती लाइफ़ में इस पर्व के लिए चार दिन निकालना और शहरों से वापिस गाँव लौटना लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है. इसी समस्या को दिखाता और इसका समाधान दिखाता ये गीत यूट्यूब पर दो अलग-अलग हैंडल्स से शेयर किया गया है और दोनों ही जगह इसे 50 लाख से ज्यादा बार देखा और सुना गया है, साथ ही इसके वीडियो की बहुत तारीफ़ होती है.

काँच के बाँस ही बहंगिया

छठ के दिन सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है सुबह के समय सभी लोगों को घाट के नज़दीक पहुंचाना और ऐसे में व्रती के सामान या 'सूप' की टोकरियों को भी घाट के पास पहुंचाना होता है. इस गीत में इसी बात का वर्णन है और अनुराधा पौडवाल की सुरीली आवाज़ में यह गाना आपको सुकून पहुंचाएगा.

मारबो रे सुगवा

अनुराधा पौडवाल की आवाज़ में इस गीत को बाद में जब फ़िल्माया गया तो थोड़ा बहुत इस गाने की सिंकिंग में कमी रह गई लेकिन इस गीत में भक्ति से ज्यादा पेड़ पर बैठे एक सुग्गे या तोते को चेतावनी दी गई है कि वो सूर्य भगवान से पहले पेड़ पर लगे फल को झूठा ना करे, चोंच ना मारे, वर्ना उसे मारा जा सकता है और फिर इससे उसके परिवार को कितना दुख होगा, इसलिए वो उड़ जाए.

हे छठी मईया

छठी मईया का ये गीत आप में न सिर्फ़ ऊर्जा का संचार करता है बल्कि ये एक तरह से पर्व के अंतिम क्षणों को सही तरह से बताता भी है. कैसे इस पर्व में जात पात का फ़र्क मिट जाता है, कैसे छोटी मोटी त्रुटियों को भक्तों की प्यारी छठी मईया नज़रअंदाज़ कर देती है इसी पर आधारित इस गीत को आप 4 दिनों तक चलने वाले इस पर्व का अंतिम गीत मान सकते हैं.

(साभार न्यूज18)

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